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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर विधायक दिलीप रावत की टिप्पणी से विवाद, सोशल मीडिया पर माफी की मांग तेज

स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को कहा, वह बुद्धिमान नहीं थे

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड की लैंसडाउन विधानसभा सीट से भाजपा विधायक दिलीप रावत का स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को लेकर दिया गया एक बयान विवादों में आ गया है। देहरादून में आयोजित स्वरोजगार दिवस कार्यक्रम के दौरान उनके संबोधन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

क्या कहा विधायक ने? जिस पर हुआ विवाद 
कार्यक्रम में बोलते हुए विधायक ने कहा कि “बुद्धिमान व्यक्ति कभी क्रांति नहीं करते। इतिहास देख लेना। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कोई ऐसे बुद्धिमान नहीं थे।” उन्होंने आगे कहा कि “क्रांति तब होती है, जब बुद्धि नहीं होती। बुद्धि वाला व्यक्ति ज्यादा विश्लेषण (एनालिसिस) और विचार करता है।”

भाषण के दौरान मौजूद एक व्यक्ति ने बीच में टिप्पणी करते हुए कहा कि “पढ़ा-लिखा नहीं था।” इसके बाद विधायक ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि “क्रांति जो होती है…” और इसी दौरान उनके बयान का वीडियो रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया।

विवाद बढ़ने पर विधायक ने दी सफाई
वीडियो वायरल होने के बाद उठे विवाद पर विधायक दिलीप रावत ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनका पूरा भाषण नहीं दिखाया गया, बल्कि केवल आधा हिस्सा वायरल किया गया है।

उनके अनुसार उन्होंने यह कहा था कि अत्यधिक विश्लेषण करने वाले लोग अक्सर निर्णय लेने में समय लगाते हैं, जबकि क्रांति वही लोग करते हैं जो सीधे समाज के बीच जाकर काम करते हैं। विधायक का दावा है कि पूरा वीडियो देखने पर उनके बयान का वास्तविक संदर्भ स्पष्ट हो जाएगा और उनकी बात का गलत अर्थ निकाला जा रहा है।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
विधायक के बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे उत्तराखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का अपमान बताया।

एक वायरल पोस्ट में कहा गया कि पेशावर में निहत्थे भारतीयों पर गोली चलाने से इनकार करना असाधारण नैतिक साहस, विवेक और मानवीय मूल्यों का परिचायक था। ऐसे निर्णय किसी बुद्धिहीन व्यक्ति के नहीं, बल्कि गहरी सोच और मजबूत सिद्धांतों वाले व्यक्ति के हो सकते हैं।

पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत के अनेक क्रांतिकारी केवल साहसी ही नहीं, बल्कि अध्ययनशील और वैचारिक रूप से भी बेहद मजबूत थे। उदाहरण के तौर पर भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ और सुभाष चंद्र बोस का उल्लेख करते हुए कहा गया कि क्रांति और बौद्धिक क्षमता को एक-दूसरे के विरोध में नहीं देखा जा सकता।

सार्वजनिक माफी की उठी मांग
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने विधायक से अपने शब्द वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश और उत्तराखंड की साझा विरासत हैं। इसलिए उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं विधायक
दिलीप रावत इससे पहले भी अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ चुके हैं। उन्होंने भराड़ीसैंण (गैरसैंण) स्थित विधानसभा भवन में बजट सत्र के दौरान ऑक्सीजन की कमी और अधिक ठंड का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि अधिक ऊंचाई के कारण वहां ऑक्सीजन का स्तर कम महसूस होता है, जिससे विधायकों और कर्मचारियों को दिक्कत होती है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि यदि भराड़ीसैंण में विधानसभा का बजट सत्र बेहतर ढंग से आयोजित करना है तो वहां की आधारभूत सुविधाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए। उनके इस बयान पर भी विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

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