पीपलकोटी टनल में पानी रिसने की चेतावनी को नजरअंदाज करने का आरोप, एक श्रमिक ने वीडियो जारी कर किया दावा
60 घंटे बाद भी दो मजदूर लापता, भूगर्भ विशेषज्ञ प्रो एमपीएस बिष्ट ने भी कहा-भूगर्भ की संवेदनशीलता को किया गया नजरअंदाज

Round The Watch News: उत्तराखंड की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद अब कंपनी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। टनल में काम कर चुके कुछ युवकों ने दावा किया है कि हादसे से करीब दो-तीन दिन पहले ही अंदर पानी का रिसाव अचानक बढ़ गया था। टनल में गंदा पानी भी आने लगा था और इसकी जानकारी कंपनी के कर्मचारियों को दी गई थी, लेकिन आरोप है कि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
युवकों का यह भी दावा है कि 13 अगस्त की शाम हादसे के समय पानी के साथ इतनी तेज हवा टनल में दाखिल हुई कि उसकी रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे जैसी महसूस हुई। कुछ ही मिनटों में टनल के अंदर हालात पूरी तरह बदल गए और मलबे व पानी के तेज बहाव से एक तरफ का रास्ता ब्लॉक हो गया।
हादसे के करीब 60 घंटे बाद भी रेस्क्यू अभियान जारी है। टनल में काम कर रहे कुल 22 लोगों में से 12 को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि आठ श्रमिकों की मौत हो गई है। मृतकों में उत्तर प्रदेश के तीन, छत्तीसगढ़ के तीन और उत्तराखंड के दो श्रमिक शामिल हैं। दो मजदूर अब भी लापता हैं और उन्हें बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार चल रहा है।
हादसे से पहले बढ़ गया था पानी का रिसाव
टनल में काम करने वाले अंकुश के मुताबिक जिस हिस्से से पानी अंदर आया, वहां पहले भी पानी टपकता था और धीरे-धीरे यह सामान्य स्थिति जैसी हो गई थी। उनका दावा है कि हादसे से दो-तीन दिन पहले पानी का रिसाव काफी बढ़ गया था और गंदा पानी भी अंदर आने लगा था। अंकुश का आरोप है कि इस बारे में कंपनी के लोगों को जानकारी दी गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रभावी सपोर्ट या कार्रवाई नहीं की गई।
कामगारों के मुताबिक टनल के ऊपरी हिस्से में करीब 20 मीटर के दायरे में एक स्थान पर लगभग एक मीटर नीचे रिप जैसी जगह थी, जहां पानी जमा होता रहा। वहां कितना पानी एकत्र हो गया था, इसकी जानकारी अंदर काम कर रहे मजदूरों को भी नहीं थी।
युवकों का दावा है कि 13 अगस्त की शाम अचानक पानी और हवा का दबाव बेहद तेज हो गया। कुछ ही समय में पानी और मलबे के तेज बहाव ने टनल के एक हिस्से को ब्लॉक कर दिया और अंदर मौजूद सामान व अन्य चीजें भी बिखर गईं।
एक तरफ से ही चल रहा रेस्क्यू
हादसे के बाद टनल का एक हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया है। दूसरे हिस्से से भी मलबा हटाकर बचाव कार्य शुरू करना संभव नहीं हो पाया है। ऐसे में फिलहाल रेस्क्यू अभियान एक ही तरफ से चलाया जा रहा है।
बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर लगातार मौजूद पानी है। सात डिवाटरिंग पंप लगातार पानी बाहर निकाल रहे हैं, लेकिन रिसाव अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। पानी के साथ अंदर आया मलबा कई स्थानों पर दलदल में बदल गया है।
रेस्क्यू टीमों को एक साथ पानी निकालने, मलबा हटाने और आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करने का काम करना पड़ रहा है। दलदली स्थिति के कारण सामान्य तरीके से आगे बढ़ना मुश्किल है। मलबे के नीचे की वास्तविक स्थिति भी साफ दिखाई नहीं दे रही, जिससे बचाव अभियान और चुनौतीपूर्ण हो गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में THDC, HCC, NDRF, SDRF, CISF और जिला प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं। करीब 125 लोगों की टीम दो शिफ्ट में लगातार काम कर रही है।
पानी और मलबा कहां से आया, अभी रहस्य
THDC के अनुसार 1440 मीटर चेनज के पास अचानक तेज आवाज के साथ बड़ी मात्रा में पानी और मलबा टनल के भीतर आया था। हालांकि पानी का वास्तविक स्रोत क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
कुछ जानकारी में यह भी सामने आया है कि टनल के भीतर करीब 1500 मीटर की दूरी पर पहले धंसाव हुआ था। हालांकि उस घटना और 13 अगस्त को हुए हादसे के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। हादसे की वास्तविक वजह और पानी के अचानक बढ़े दबाव का कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मजदूरों ने मांगा एक करोड़ रुपये मुआवजा
हादसे के बाद शनिवार को THDC में काम करने वाले मजदूरों ने आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक के काफिले को रोककर विरोध प्रदर्शन किया। मजदूरों ने मृत श्रमिकों के परिवारों को कंपनी और सरकार की ओर से कम से कम एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। इसके अलावा मृतकों के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार और कंपनी द्वारा उठाने तथा हादसे में घायल श्रमिकों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की गई।
विरोध की सूचना मिलने पर पुलिस और CISF के जवान मौके पर पहुंचे। मंत्री मदन कौशिक ने मजदूरों को आश्वासन दिया कि प्रभावित श्रमिकों और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। हालांकि सरकार पहले ही मृतकों के परिजनों के लिए चार लाख रुपये मुआवजे का ऐलान कर चुकी है।
मजिस्ट्रियल जांच में अहम होंगे ये सवाल
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पहले ही मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे चुके हैं। ऐसे में टनल में काम कर चुके मजदूरों की ओर से लगाए गए आरोप जांच के दौरान महत्वपूर्ण बिंदु बन सकते हैं।
जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि हादसे से पहले टनल में पानी का रिसाव कितना बढ़ा था, इसकी जानकारी कंपनी और सुरक्षा तंत्र को कब मिली, शिकायत मिलने के बाद क्या कदम उठाए गए और हादसे के समय टनल के भीतर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। इसके साथ ही पानी और मलबे के अचानक आने के वास्तविक स्रोत, टनल में पहले हुए धंसाव और 13 अगस्त की घटना के बीच संभावित संबंध की भी जांच की जरूरत होगी।
फिलहाल प्रशासन और सभी रेस्क्यू एजेंसियों का मुख्य फोकस टनल में फंसे दो लापता मजदूरों तक पहुंचने पर है। पानी का रिसाव, दलदल और मलबा बचाव अभियान को लगातार चुनौती दे रहे हैं। दोनों श्रमिकों के सुरक्षित बाहर आने का इंतजार है।



