मुख्यमंत्री धामी को नेपाली मूल का कहा, यूकेडी नेता आशुतोष नेगी पर मुकदमा
माहभर पहले केंद्रीय उपाध्यक्ष पद से नेगी को निष्कासित कर चुका पार्टी प्रबंधन

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के पूर्व केंद्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और भ्रामक टिप्पणी (सीएम को नेपाली मूल का बताया) करने के आरोप में पौड़ी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य राजेश सिंह राजा कोली की तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के मुताबिक, आशुतोष नेगी ने हाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा की थी। इसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नेपाली मूल का बताया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दावे के समर्थन में पोस्ट में कोई प्रमाण या तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही पोस्ट में जाति और धर्म से संबंधित कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गईं।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर क्या है शिकायत
राजेश सिंह राजा कोली ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि संबंधित पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री की जातीय और राष्ट्रीय पहचान को लेकर ऐसे दावे किए गए, जो भ्रामक हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस तरह की सामग्री सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने पर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है।
तहरीर में पोस्ट की भाषा और उसमें किए गए दावों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। शिकायतकर्ता ने आशंका व्यक्त की कि इस प्रकार की सामग्री से जनभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज करने के बाद संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल शुरू कर दी है।
पोस्ट के कंटेंट की भी होगी जांच
मामला केवल मुख्यमंत्री की पहचान को लेकर किए गए दावे तक सीमित नहीं है। शिकायत में जाति और धर्म से जुड़े कथित आपत्तिजनक संदर्भों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि पोस्ट किस संदर्भ में तैयार और साझा की गई थी तथा उसके पीछे क्या उद्देश्य था।
पुलिस पोस्ट के मूल स्रोत, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की प्रामाणिकता, पोस्ट किए जाने के समय, उसके प्रसार और उस पर हुई डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर सकती है। पोस्ट को कितने लोगों ने देखा, साझा किया या उस पर टिप्पणी की, यह पहलू भी जांच का हिस्सा बन सकता है।
पहले भी कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे नेगी
आशुतोष नेगी इससे पहले भी एक अलग मामले में कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। मार्च 2024 में उन्हें एक पुराने मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।
उस मामले में पौड़ी कोतवाली में राजेश सिंह राजा कोली की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। उस समय पुलिस ने स्पष्ट किया था कि आशुतोष नेगी की गिरफ्तारी अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित नहीं थी, बल्कि एक अलग प्रकरण में हुई थी।
2024 के उस मामले में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504 और 506, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) तथा SC/ST Act की धारा 3(1)(घ) समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई थी।
अब वर्ष 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर सोशल मीडिया पर कथित टिप्पणी के मामले में पौड़ी कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद आशुतोष नेगी एक बार फिर चर्चा में हैं। मामला राजनीतिक के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं राजेश सिंह राजा कोली
राजेश सिंह राजा कोली को अप्रैल 2026 में उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। उन्होंने अप्रैल में आयोग के सदस्य के रूप में कार्यभार संभाला था।
इसी के बाद अब उनके द्वारा पौड़ी पुलिस को दी गई शिकायत के आधार पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में आशुतोष नेगी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई है।
जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
मामले की जांच में पुलिस सबसे पहले विवादित सोशल मीडिया पोस्ट की वास्तविकता और उसके कंटेंट की पुष्टि करेगी। इसके बाद यह देखा जाएगा कि पोस्ट किस अकाउंट से अपलोड की गई, अकाउंट किसके नाम पर है, पोस्ट तैयार करने और साझा करने के पीछे कौन था तथा उसमें किए गए दावों का आधार क्या था।
इसके अलावा पोस्ट के प्रसार, उस पर आए कमेंट, शेयर और अन्य डिजिटल गतिविधियों की भी पड़ताल की जा सकती है। पुलिस यह भी जांच सकती है कि पोस्ट से वास्तव में किसी समुदाय या समूह के खिलाफ वैमनस्य पैदा करने अथवा सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की स्थिति बनी या नहीं।
जांच में यदि पोस्ट के जरिए जानबूझकर किसी समुदाय के खिलाफ वैमनस्य फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या सार्वजनिक शांति प्रभावित करने का प्रयास किए जाने के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो पुलिस मामले में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती है।
फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।



