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रजिस्ट्री फर्जीवाड़े में ईडी ने मुख्य आरोपी नवीन मित्तल को दबोचा, अन्य आरोपियों में हड़कंप

ईडी रजिस्ट्री फर्जीवाड़े के अलग-अलग मामलों में निरंतर कर रही जांच

Rajkumar Dhiman, Dehradun: राजधानी देहरादून में सामने आए बहुचर्चित और अरबों रुपये के रजिस्ट्री फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की वित्तीय कड़ियां भी सामने आ रही हैं। इसी क्रम में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुभाष नगर निवासी डीके मित्तल की भूमि को कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए हड़पने के मामले में सहारनपुर निवासी नवीन कुमार मित्तल को गिरफ्तार किया है। ईडी की जांच में उसे इस प्रकरण का मुख्य आरोपित और कथित तौर पर प्रमुख लाभार्थी बताया गया है। इस कार्रवाई के बाद रजिस्ट्री फर्जीवाड़े के अलग-अलग मामलों में आरोपी सकते में हैं। उन्हें डर है कि वह भी कार्रवाई की जद में कभी भी आ सकते हैं।

पीएमएलए की विशेष अदालत में पेश किए जाने के बाद अदालत ने नवीन मित्तल को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। इससे पहले मई 2024 में देहरादून पुलिस भी इसी मामले में नवीन मित्तल को गिरफ्तार कर चुकी थी। हालांकि, बाद में उसे जमानत मिल गई थी।

फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेचने का आरोप
ईडी के अनुसार, मामले में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर एक सह-आरोपित को संबंधित भूमि का वास्तविक स्वामी प्रदर्शित किया गया। इसके बाद कथित रूप से यही जमीन निर्दोष खरीदारों को बेच दी गई। जमीन की बिक्री से प्राप्त रकम में लगभग 3.24 करोड़ रुपये अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) के रूप में चिन्हित की गई है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, बिक्री से मिली यह रकम सह-आरोपित के नाम से खोले गए बैंक खाते में जमा हुई। बाद में इस धनराशि को नवीन मित्तल के नियंत्रण वाली संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया। ईडी इसी वित्तीय लेनदेन को मामले की महत्वपूर्ण कड़ी मानकर जांच कर रही है।

सीएफएसएल जांच में सामने आया बैंक खाते का कनेक्शन
मामले में बैंक खाते की भूमिका को लेकर हुई फोरेंसिक जांच ने भी अहम जानकारी सामने रखी। ईडी के मुताबिक, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) ने बैंक के मूल अभिलेखों की जांच की। इसमें कथित तौर पर यह सामने आया कि सह-आरोपित के नाम से खोला गया बैंक खाता वास्तव में नवीन कुमार मित्तल द्वारा संचालित किया जा रहा था।

इस मामले में ईडी पहले ही हुमायूं परवेज, मोहम्मद वकील और मुकेश कुमार गुप्ता के खिलाफ पीएमएलए की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है।

2021 में मिली थी जमीन हड़पने की शिकायत
इस प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई शिकायत से हुई थी। गुरुनानक रोड, सुभाष नगर निवासी देवेंद्र मित्तल ने 7 दिसंबर 2021 को पटेलनगर कोतवाली में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि हुमायूं परवेज और मोहम्मद वकील ने फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनकी भूमि को बेच दिया।

शिकायत के आधार पर हुमायूं परवेज, मोहम्मद वकील समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान क्लेमेंट टाउन के तत्कालीन थानाध्यक्ष दीपक धारीवाल ने मोहम्मद वकील और फईम अहमद को गिरफ्तार किया था। वहीं हुमायूं परवेज ने इस फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण में अदालत से अंतरिम जमानत हासिल कर ली थी।

जांच आगे बढ़ने पर फर्जी बैनामा तैयार कराने में हरिप्रकाश मित्तल, नवीन मित्तल और सुशील गाबा के नाम भी सामने आए। तीनों सहारनपुर के रहने वाले हैं। पुलिस ने मई 2024 में सहारनपुर से तीनों को गिरफ्तार किया था।

समन के बावजूद पूछताछ में शामिल नहीं हुआ
ईडी का कहना है कि नवीन कुमार मित्तल को जांच में शामिल होने के लिए कई बार समन भेजे गए, लेकिन वह एजेंसी के समक्ष पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुआ। जांच एजेंसी ने उस पर गवाहों को प्रभावित करने और अपने रिश्तेदारों को ईडी के सामने बयान देने से रोकने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया है।

ईडी के मुताबिक संदिग्ध लेनदेन को वैध दिखाने के उद्देश्य से नए दस्तावेज तैयार किए जाने की भी जानकारी मिली है। इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

अगस्त 2026 में परिसरों पर हुई थी तलाशी
नवीन मित्तल की गिरफ्तारी से पहले भी ईडी की कार्रवाई फर्जीवाड़े के विभिन्न मामलों में आगे बढ़ चुकी थी। अगस्त 2026 में ईडी ने कई आरोपियों के परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी के दौरान एजेंसी ने कथित रूप से आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे।

ईडी की जांच में नवीन मित्तल से जुड़े रजिस्ट्री और भूमि फर्जीवाड़े के अन्य मामले भी सामने आए हैं। एजेंसी इन मामलों में वित्तीय लेनदेन और अपराध से अर्जित संपत्तियों की कड़ियों को खंगाल रही है।

ऐसे सामने आया देहरादून का बड़ा रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा
देहरादून में जमीनों की रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला जुलाई 2023 में सामने आया। जिला प्रशासन को जानकारी मिली थी कि देहरादून के सब रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में रखे दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों में व्यापक स्तर पर छेड़छाड़ की गई है।

मामला सामने आने के बाद इसे प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े भूमि फर्जीवाड़ों में से एक होने की आशंका जताई गई। जिला प्रशासन ने जांच शुरू कराई और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले का संज्ञान लिया।

इसके बाद अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज होने लगे और आरोपितों की गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ। जांच में कथित भूमाफिया गिरोह द्वारा बड़े पैमाने पर अरबों रुपये मूल्य की जमीनों के रिकॉर्ड में हेरफेर किए जाने की बात सामने आई। अलग-अलग प्रकरणों में कई आरोपितों के नाम सामने आए।

मामले की जांच के लिए पुलिस के साथ-साथ स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की एसआईटी भी गठित की गई। अब तक दो दर्जन से अधिक आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं 378 से अधिक शिकायतों के आधार पर करीब 100 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

रजिस्ट्री फर्जीवाड़े के अलग-अलग मामलों की ईडी कर रही जांच
मामले की गंभीरता और कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन के लेनदेन को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की। ईडी ने पहली बार अगस्त 2024 में रजिस्ट्री फर्जीवाड़े से जुड़े आरोपितों के ठिकानों पर बड़े स्तर पर छापेमारी की थी।

उस कार्रवाई के दौरान उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और असम में आरोपितों से जुड़े कुल 18 ठिकानों की तलाशी ली गई थी। ईडी ने तब करीब 95 लाख रुपये की नकदी और आभूषण जब्त किए थे। इसके अलावा करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी एजेंसी ने कब्जे में लिए थे।

अब नवीन कुमार मित्तल की गिरफ्तारी के साथ जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है। ईडी अलग-अलग रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा मामलों में कथित अपराध से अर्जित रकम, उसके हस्तांतरण और उससे जुड़ी संपत्तियों की पड़ताल कर रही है।

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