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हरीश रावत का अप्रत्याशित कदम, सभी पद छोड़ने की पेशकश, पूर्व ओएसडी पर ईडी के छापे के बाद जताई इच्छा

हरीश रावत बोले, ‘यदि चंदन जीना ने गलती की है तो मैं लज्जित हूं’

Rajkumar Dhiman, Dehradun: UKSSSC की VPDO परीक्षा-2016 में OMR शीट हेराफेरी के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर से नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद होने की ED की कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अप्रत्याशित घटनाक्रम में हरीश रावत ने खुद फेसबुक पोस्ट के जरिए कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से हटने की पेशकश कर दी है।

रावत ने कहा है कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं, लेकिन यदि उनके कारण पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष में कोई कमजोरी आती है तो वह इन दोनों पदों से हटना चाहते हैं।

हालांकि, रावत ने चंदन सिंह जीना पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर अविश्वास जताते हुए कहा कि जीना उनके OSD रहे हैं और विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीना बेहद सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं। यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में OMR शीट से छेड़छाड़ और इस तरह की गलती करने के कोई प्रमाण हैं तो वह जीना के कथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए लज्जित हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें आरोप पर विश्वास नहीं है।

‘मेरे घर नहीं, सहयोगी के घर दस्तक देकर नरेटिव बनाने की कोशिश’
ED की कार्रवाई को लेकर रावत ने चुनावी राजनीति की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड चुनाव में भारी स्टेक्स हैं। उनके अनुसार, जब कोई उनसे चुनाव की तारीख पूछता था तो वह मजाक में कहते थे कि चुनाव तब होंगे, जब CBI उनके दरवाजे पर दस्तक देगी। रावत ने कहा कि इस बार उनके घर पर नहीं, बल्कि उनके एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं। ऐसे समय में उनके किसी कृत्य से पार्टी के संघर्ष को कमजोरी नहीं मिलनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने अपने दोनों पार्टी पदों से हटने की पेशकश करने का निर्णय लिया है।

UKSSSC गठन पर भी रावत ने दी सफाई
रावत ने UKSSSC के गठन को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन राज्य के नौजवानों के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनके अनुसार, उनके कार्यकाल में पब्लिक सर्विस कमीशन को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए बाध्य किया गया और दो बार शीर्ष पदों की भर्तियां हुईं।

उन्होंने मेडिकल भर्ती बोर्ड और शिक्षा भर्ती बोर्ड समेत विभिन्न भर्ती बोर्ड बनाए जाने का भी उल्लेख किया। रावत ने दावा किया कि उनके तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं।

‘एरर ऑफ जजमेंट हुआ तो उत्तराखंड से क्षमा’
रावत ने कहा कि यदि नियुक्तियों की प्रक्रिया के दौरान उनसे ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है तो वह उत्तराखंड के लोगों से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

UKSSSC के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर रावत ने कहा कि उनकी नियुक्ति पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उस व्यक्ति की नियुक्ति के संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने उन्हें प्रभावी सलाह दी थी और वह दो बार उनके पास नियुक्ति के संदर्भ में मिलने आए थे।

रावत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति से भविष्य में गलती हो जाए, यह कोई नहीं जान सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि क्या RSS को भी पहले से पता रहा होगा कि जिस व्यक्ति को उत्तराखंड के पर्यावरण मंच का अध्यक्ष बनाया जा रहा है, वह आगे चलकर इस तरह के भ्रष्ट कृत्य करेगा और UKSSSC अध्यक्ष के रूप में कलंकित होगा।

‘मेरी संलिप्तता के प्रमाण हों तो CBI, ED या पुलिस को दें’
रावत ने सार्वजनिक रूप से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास नियुक्तियों के मामले में उनकी ओर से हस्तक्षेप या संलिप्तता के कोई प्रमाण हैं तो उन्हें CBI, ED या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बड़े दायित्व को संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे घृणित प्रलोभनों से बचना चाहिए। यदि उनसे जाने-अनजाने ऐसा कोई कृत्य हुआ है जिससे राज्य के युवाओं के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है तो वह खुद को प्रताड़ना और दंड का पात्र मानते हैं और कानून से दंडित किए जाने की बात कही।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, UKSSSC की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा-2016 में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत ED के देहरादून सब-जोनल कार्यालय ने 10 सितंबर 2026 को PMLA, 2002 के तहत देहरादून में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था।

ED ने तत्कालीन UKSSSC चेयरमैन, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, OMR प्रोसेसिंग का काम करने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कथित साजिश से जुड़े बिचौलियों के परिसरों की तलाशी ली। इसी कार्रवाई के दौरान चंदन सिंह जीना के आवास पर भी तलाशी हुई।

ED के मुताबिक, जीना वर्ष 2014 से 2017 के दौरान हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में OSD रहे थे और वर्तमान में भी पूर्व मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत सहायक के तौर पर कार्यरत हैं।

OMR शीट में कथित हेराफेरी का आरोप
ED की जांच के अनुसार UKSSSC की सुरक्षित अभिरक्षा में रखी OMR उत्तर पुस्तिकाओं को तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक पहुंचाया गया। वहां अधूरी छोड़ी गई OMR शीटों के रोल नंबर नोट किए जाते थे। इसके बाद कथित तौर पर इन शीटों को निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिया जाता था।

एजेंसी के अनुसार कर्मचारियों ने कथित रूप से उत्तरों के बुलबुले भरने और बदलने का काम किया। बाद में OMR शीटों को दोबारा सील कर दिया जाता था। ED के मुताबिक इस कथित हेराफेरी के बदले बिचौलियों के माध्यम से अवैध रकम पहुंचाई जाती थी।

जीना के घर से 32 लाख नकद, 200.5 ग्राम सोना
ED के अनुसार चंदन सिंह जीना के आवास से 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी बरामद हुई। इसके अलावा करीब 200.5 ग्राम सोना मिला, जिसमें 13 सोने के सिक्के और सात सोने की चेन शामिल हैं। तलाशी में 12 लग्जरी कलाई घड़ियां भी मिलीं। इनमें Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice ब्रांड की घड़ियां शामिल हैं।

ED ने जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों को PMLA की धारा 17(1A) के तहत फ्रीज किया है। इन खातों में कुल 52,16,312 रुपये का क्रेडिट बैलेंस बताया गया है। जीना का मोबाइल फोन भी फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किया गया है।

ED के अनुसार, जीना के बड़े पैमाने पर नकद खर्च की जानकारी भी जांच में सामने आई, जिसका स्पष्ट स्रोत नहीं बताया गया और जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से पुष्ट नहीं होता।

जब्त और फ्रीज संपत्तियों का कुल मौजूदा मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपये बताया गया है। इसमें 12 लग्जरी घड़ियों का मूल्य अलग से निर्धारित किया जा रहा है, इसलिए कुल मूल्य में आगे बदलाव संभव है।

ED की कार्रवाई में अन्य पूर्व UKSSSC अधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों से भी बेहिसाबी नकदी और कुछ मामलों में सोने के आभूषण बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। कई मोबाइल फोन भी फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किए गए हैं।

फिलहाल ED की जांच OMR शीटों की कथित हेराफेरी, तत्कालीन UKSSSC अधिकारियों, निजी कंप्यूटर एजेंसी और बिचौलियों के बीच कथित लेन-देन की कड़ियों पर केंद्रित है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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