DehradunUttarakhandमनमानी

टिहरी में नक्शे से छेड़छाड़ में घिरे एई का हरिद्वार का कारनामा भी आया सामने, नक्शा पास करने को बढ़ा दी थी सड़क की चौड़ाई

टिहरी में फर्जी मानचित्र मामले के बाद हटाए गए पंकज पाठक की हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान तीन मानचित्रों को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत, करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोपों की भी जांच की मांग

Rajkumar Dhiman, Dehradun: विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती के बाद टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में स्वीकृत मानचित्र से छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद सहायक अभियंता पंकज पाठक पर कार्रवाई की गई है। उन्हें संबंधित पद से हटा दिया गया। विभागीय जांच में स्वीकृत नक्शे के स्थान पर अलग मानचित्र ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाने समेत कई सवाल खड़े होने के बाद कार्रवाई और जांच गतिमान है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया और अब उन्हें जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के काम से हटा दिया गया है।

टिहरी के ताजा प्रकरण के बीच पंकज पाठक की हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) में पूर्व तैनाती के दौरान स्वीकृत किए गए कुछ मानचित्रों को लेकर मुख्यमंत्री को भेजी गई एक शिकायत भी सामने आई है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से इन मानचित्रों की स्वतंत्र जांच और सहायक अभियंता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एचआरडीए में सहायक अभियंता रहते हुए पंकज पाठक ने कुछ ऐसे मानचित्र स्वीकृत किए, जिनमें मौके पर उपलब्ध सड़क की चौड़ाई से अधिक चौड़ाई मानचित्र में दर्शाई गई। शिकायत में इसे उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम और संबंधित भवन उपविधियों के विपरीत बताया गया है।

इन तीन मानचित्रों पर उठाए गए सवाल
शिकायत में स्वामी कपिल मुनि महाराज, हरे राम आश्रम, कनखल सिंहद्वार के मानचित्र संख्या एचआर-160/2019-20 का उल्लेख है। आरोप है कि मौके पर परियोजना तक पहुंच मार्ग करीब तीन मीटर था, जबकि मानचित्र में इसे नौ मीटर दर्शाया गया और इसी आधार पर मानचित्र स्वीकृत किया गया। दूसरे मामले में हरे राम आश्रम, स्वामी कपिल मुनि महाराज, सिंहद्वार-ज्वालापुर मार्ग, कनखल के मानचित्र संख्या एचआरडीए/एनसी/0124/21-22/आरई-2 का उल्लेख है।

शिकायत के अनुसार मौके पर करीब छह मीटर मार्ग था, जबकि मानचित्र में 15 मीटर दर्शाए जाने का आरोप है। तीसरे मामले में एचआरडीए/ओटीएस/0185/21-22, श्यामलोक कॉलोनी, भूपतवाला से संबंधित प्रकरण उठाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्वीकृत लेआउट में अलग-अलग तीन भूखंडों को जोड़कर आश्रम के लिए स्वीकृति दी गई, जबकि स्वीकृत लेआउट में इस तरह भूखंडों को जोड़ना नियमों के विपरीत था।

करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप भी, जांच की मांग
शिकायत में पंकज पाठक पर कथित तौर पर अनुचित धन की मांग करने और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, यह आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से इन आरोपों की जांच कराने और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की मांग की है।

हालिया पकड़ में आए टिहरी के प्रकरण से खुल सकती है पाठक की कार्यप्रणाली की पूरी कड़ी
टिहरी के मामले की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 6 अप्रैल को सक्षम स्तर से एक व्यावसायिक भवन का मानचित्र स्वीकृत हुआ था। विभागीय जांच के अनुसार बाद में 30 जून को ऑनलाइन पोर्टल से मूल नक्शा हटाकर उसकी जगह दूसरा नक्शा अपलोड किया गया। जांच में यह भी सवाल उठा कि स्वीकृत मानचित्र में स्टिल्ट पार्किंग और बेसमेंट से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी नियमों का पालन नहीं हुआ।

सहायक अभियंता से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि, पंकज पाठक ने सोमवार को अपना स्पष्टीकरण प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को दे दिया। उनका कहना है कि नक्शा खोलने के दौरान पीडीएफ सपोर्ट नहीं कर रही थी, इसलिए आपत्ति दर्ज होने के बाद फाइल दोबारा अपलोड की गई। उन्होंने मानचित्र में किसी तरह का कूटरचित दस्तावेज तैयार करने से इनकार करते हुए कहा कि स्टिल्ट एरिया से संबंधित त्रुटि को भूलवश सुधारा गया था।

इसके बाद जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने उन्हें इस प्राधिकरण के कार्य से हटा दिया। आदेश के अनुसार अब जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण का काम पहले से तैनात सहायक अभियंता दिग्विजय नाथ तिवारी देखेंगे, जबकि पंकज पाठक को विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण का काम सौंपा गया है। आदेश में टिहरी प्राधिकरण के काम के प्रति अपेक्षित ध्यान नहीं देने का भी उल्लेख है।

धामी की समीक्षा के बाद क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
दरअसल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 सितंबर 2026 को विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक में मानचित्र स्वीकृति और अवैध निर्माण की निगरानी को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे। उन्होंने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति व्यवस्था को प्रभावी बनाने, अवैध निर्माण की शुरुआती स्तर पर पहचान के लिए जीआइएस, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन का इस्तेमाल करने तथा अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा था।

इसी पृष्ठभूमि में टिहरी का मामला अहम हो जाता है। यहां अब सवाल सिर्फ एक ऑनलाइन मानचित्र के बदले जाने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि स्वीकृत नक्शे में बदलाव की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई, किसने उसे पोर्टल पर अपलोड किया और निर्माण की निगरानी के दौरान नियमों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई हुई।

अब हरिद्वार में पंकज पाठक की पूर्व तैनाती से जुड़े जिन तीन मानचित्रों और अन्य आरोपों की शिकायत मुख्यमंत्री को भेजी गई है, उनकी जांच होती है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी। टिहरी प्रकरण में फिलहाल विभागीय स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ रही है और पाठक की ओर से लगाए गए स्पष्टीकरण के बाद अंतिम जिम्मेदारी तय होना बाकी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button