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इस महिला की एंट्री से मंत्री रेखा-पति गिरधारी के रिश्ते में बढ़ी दरार! कल्पना प्रकरण से हत्या की साजिश के आरोपों तक पहुंचा विवाद

अक्टूबर 2024 में गहरी हुई थी रिश्तों की दरार, मंत्री रेखा आर्य ने कल्पना मिश्रा/चतुर्वेदी के खिलाफ दर्ज कराया था मुकदमा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। मामला केवल पति-पत्नी के आपसी विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कथित वैवाहिक धोखाधड़ी, दूसरी महिलाओं से संबंध, मारपीट, जातिगत अपमान, दस्तावेजों में जालसाजी और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की एक अहम कड़ी अक्टूबर 2024 में सामने आई थी, जब रेखा आर्य ने बरेली में कल्पना मिश्रा/चतुर्वेदी नाम की महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मंत्री का आरोप था कि महिला ने आधार कार्ड और पासपोर्ट समेत विभिन्न दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम अपने पति के रूप में दर्ज कराया है। अब करीब दो साल बाद पति-पत्नी के बीच विवाद पुलिस तक पहुंचने और दोनों पक्षों के बयान सार्वजनिक होने से यह पुराना प्रकरण फिर चर्चा में है।

अक्टूबर 2024 में पड़ी थी विवाद की असल नींव
रेखा आर्य ने अक्टूबर 2024 में बरेली के बारादरी थाने में कल्पना मिश्रा/चतुर्वेदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इससे पहले उन्होंने बरेली के आइजी को शिकायती पत्र देकर महिला पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के मुताबिक, कल्पना ने अपने आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में गिरधारी लाल साहू को अपना पति बताया था। इतना ही नहीं, मंत्री ने आरोप लगाया था कि महिला ने बरेली स्थित उनके घर का पता भी अपने पते के रूप में दर्ज कराया।

रेखा आर्य ने शिकायत में आरोप लगाया था कि संबंधित महिला उनके बरेली स्थित आवास से सात लाख रुपये और स्वर्ण जड़ित रुद्राक्ष की माला चोरी कर ले गई। उन्होंने यह भी दावा किया था कि महिला हुंडई क्रेटा कार से चलती है, जिस पर कथित तौर पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली बत्ती अवैध रूप से लगा रखी थी।

मंत्री की शिकायत में कल्पना के साथ डा. आरसी पांडे का नाम भी आया था। रेखा आर्य ने आरोप लगाया था कि महिला और उसके कथित मौसा गलत धंधों का गिरोह संचालित करते हैं। उस समय महिला को भाजपा कार्यकर्ता भी बताया गया था। हालांकि, महिला ने गिरधारी लाल साहू का नाम अपने पति के रूप में दर्ज कराने के पीछे क्या वजह बताई थी और दस्तावेजों में नाम दर्ज कराने की परिस्थितियां क्या थीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध तथ्यों से नहीं होती।

इस प्रकरण ने उस समय राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी। मंत्री की शिकायत के केंद्र में उनके पति का नाम किसी दूसरी महिला के दस्तावेजों में पति के रूप में दर्ज होना था। हालांकि, केवल इस मुकदमे के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि इसी घटना ने पति-पत्नी के रिश्ते में आई दरार को जन्म दिया। इतना जरूर है कि गिरधारी साहू के नाम से जुड़ा यह विवाद उनके वैवाहिक संबंधों को लेकर उठे सवालों की एक पुरानी कड़ी है।

दो साल बाद पति के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ एफआइआर से सिस्टम भी सकते में
15 अक्टूबर 2026 को विवाद ने नया मोड़ ले लिया। रेखा आर्य ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत में उन्होंने शादी के समय वैवाहिक स्थिति छिपाने, दूसरी महिलाओं से कथित संबंध रखने, मारपीट, गाली-गलौज, जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए। जिसे पूरा सरकारी सिस्टम भी सकते में आ गया

रेखा आर्य के मुताबिक, उनकी शादी छह जुलाई 2004 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के समय गिरधारी लाल साहू ने खुद को अविवाहित बताया, जबकि बाद में उन्हें पता चला कि उनके पति पहले से विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे।

शिकायत में यह भी आरोप है कि पति के अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। रेखा आर्य ने दावा किया कि शुरुआत में पति ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मौखिक और लिखित रूप से माफी भी मांगी थी, लेकिन इसके बाद भी कथित संबंधों का सिलसिला जारी रहा।

मंत्री ने आरोप लगाया कि गिरधारी लाल साहू ने उनके सरकारी आवास पर स्टाफ की मौजूदगी में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित किया। इसके अलावा, उन्होंने अपनी और अपने नाबालिग बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

शिकायत में कंपनियों के निदेशक पद से हटाने के लिए कथित फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। रेखा आर्य के अनुसार, उन्होंने संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और न ही निदेशक पद से हटने के लिए कोई त्यागपत्र दिया था।

एफआइआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498-ए, 504 और 506 का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(द), 3(1)(ध) और 3(2)(va) भी दर्ज हैं। इन धाराओं का उल्लेख शिकायत में लगाए गए आरोपों के संदर्भ में है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

ऑडियो जारी कर हत्या की साजिश रचने का आरोप गंभीर
मामले का सबसे गंभीर पहलू एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग है। रेखा आर्य ने दावा किया कि इस रिकॉर्डिंग में गिरधारी लाल साहू एक महिला से बातचीत के दौरान उन्हें जान से मारने की साजिश रचते सुनाई देते हैं। मंत्री के अनुसार, ऑडियो सामने आने के बाद उन्हें अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता हुई।

एफआइआर दर्ज कराने के बाद रेखा आर्य ने फेसबुक पर एक वीडियो और पति से संबंधित ऑडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने अपने वैवाहिक रिश्ते को लेकर पीड़ा जाहिर की। उनका कहना था कि ऑडियो ने उनके रिश्ते और समर्पण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए सवाल उठाया कि सच्चाई और ईमानदारी से साथ निभाने का क्या यही परिणाम मिलता है।

रेखा आर्य ने कहा कि उन्होंने पुलिस से शिकायत करने का फैसला अपने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया। उन्होंने महिलाओं से घरेलू अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा, “महिला आम हो, महिला खास हो… घरेलू अत्याचार न सहना है, न सहना है, बल्कि उसे कहना है।”

इस घटनाक्रम के बाद मंत्री की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, कथित ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों की वास्तविक परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पति का पलटवार, बोले- मैंने ही सड़क से उठाकर मंत्री बनाया
रेखा आर्य की ओर से मुकदमा दर्ज कराने और ऑडियो सार्वजनिक करने के बाद गिरधारी लाल साहू का वीडियो भी सामने आया। इसमें उन्होंने मंत्री के आरोपों पर पलटवार करते हुए उनके राजनीतिक सफर का जिक्र किया। साहू ने दावा किया कि उन्होंने ही रेखा आर्य को सड़क से उठाकर मंत्री बनाया और जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएंगे।

उनके इस बयान को पत्नी की शिकायत के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वीडियो में उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए प्रत्येक आरोप का विस्तृत तथ्यात्मक जवाब नहीं दिया है। उनके दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस तरह एक ओर रेखा आर्य ने कथित ऑडियो के आधार पर अपनी और बच्चों की सुरक्षा का सवाल उठाया है, वहीं दूसरी ओर गिरधारी साहू ने सार्वजनिक रूप से पलटवार करते हुए मामले की सच्चाई सामने लाने की बात कही है। अब पुलिस जांच में शिकायत के आरोपों, संबंधित दस्तावेजों और ऑडियो रिकॉर्डिंग की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

03 शादियों से जुड़ा गिरधारी का पारिवारिक दायरा
गिरधारी लाल साहू मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली में बारादरी थाना क्षेत्र के जोगी नवादा के निवासी बताए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके पारिवारिक जीवन में तीन शादियों का उल्लेख मिलता है।

उनकी पहली पत्नी रामा देवी बरेली के दिशा गार्डन में रहती हैं। उनसे दो बेटियां लता और शशि हैं। लता की उम्र 46 वर्ष बताई गई है और वह लखनऊ में रहती हैं, जबकि 40 वर्षीय शशि बरेली में रहती हैं।

दूसरी पत्नी वैजयंती माला थीं, जिनका कोरोना काल में निधन हो गया। उनसे दो बेटे हुए। इनमें रिंकू की उम्र 35 वर्ष बताई गई है, जबकि दूसरे बेटे रूबी की 15 वर्ष की उम्र में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

रेखा आर्य उनकी तीसरी पत्नी हैं। दोनों के तीन बच्चे हैं। बेटी वैष्णवी की उम्र 20 वर्ष, जबकि बेटों रुद्राक्ष और कृष्णा की उम्र क्रमशः 15 और 12 वर्ष बताई गई है।

मंत्री की वर्तमान शिकायत में शादी के समय पति की वैवाहिक स्थिति छिपाने का आरोप भी इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ता है। हालांकि, शादी के समय कथित धोखाधड़ी और पहले के वैवाहिक संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच से ही हो सकेगी।

बरेली में कई संपत्तियां, सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ा परिवार
उपलब्ध विवरण के अनुसार, गिरधारी लाल साहू के परिवार की बरेली में कई संपत्तियां हैं। जोगी नवादा की गल्ला मंडी के पास करीब 100 वर्ग गज का पैतृक मकान बताया गया है। सुरेश शर्मा नगर में लगभग 500 वर्ग गज में दूसरा मकान और करीब एक बीघा क्षेत्र में दिशा गार्डन मैरिज हॉल स्थित है।

इसके अलावा बड़े बाईपास पर लालपुर चौराहे के पास लगभग 10 बीघा का फार्म हाउस और महानगर कॉलोनी के एक बहुमंजिला अपार्टमेंट में फ्लैट होने की जानकारी भी सामने आई है। परिवार सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहा है। उसका संबंध वनखंडीनाथ मंदिर की रामलीला समिति और सामूहिक विवाह आयोजनों से बताया जाता है।

इन संपत्तियों और सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख गिरधारी साहू की पारिवारिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इनका वर्तमान वैवाहिक विवाद या दर्ज मुकदमे के आरोपों से सीधा संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता।

1990 के दोहरे हत्याकांड से लेकर 39 मुकदमों तक का आपराधिक इतिहास
गिरधारी लाल साहू का आपराधिक इतिहास भी चर्चा में रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनके खिलाफ बरेली में 39 मुकदमे दर्ज होने की बात कही गई है। बारादरी थाने में उनकी हिस्ट्रीशीट खोले जाने और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई होने का भी उल्लेख मिलता है। इन सभी मामलों की वर्तमान कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है और केवल मुकदमे दर्ज होने को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।

उनसे जुड़ा सबसे चर्चित मामला 11 जून 1990 का जैन दंपती दोहरा हत्याकांड बताया जाता है। आरोप के मुताबिक, बरेली के सिविल लाइंस क्षेत्र में नरेश जैन और पुष्पा जैन की गला दबाकर हत्या कर संपत्ति हड़पने की साजिश रची गई थी। इस मामले में गिरधारी साहू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज होने का उल्लेख है।

वर्ष 2013 में अदालत से इस मामले की फाइल गायब होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर पत्रावली दोबारा तैयार की गई थी। अगस्त 2021 में गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद गिरधारी साहू के आत्मसमर्पण की जानकारी भी सामने आई थी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, यह मामला अब भी विचाराधीन है। इसलिए इस प्रकरण में आरोपों को सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, 1990 के दशक में जमीन कब्जाने और रंगदारी से जुड़े करीब दो दर्जन मामलों में भी उनका नाम आने की जानकारी दी गई है। हाल के वर्षों में 9 दिसंबर 2024 को बरेली के जोगी नवादा में एक महिला अधिवक्ता के परिवार पर जानलेवा हमले का मामला भी सामने आया था।

इस प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई का उल्लेख है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें गिरधारी साहू के करीबी रिश्तेदारों और भतीजों की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद 9 जुलाई 2025 को उनके भतीजे टिंकू राठौर और उसके गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई।

पुराने विवाद से मौजूदा मुकदमे तक, अब जांच पर टिकी नजरें
रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू के बीच मौजूदा विवाद को समझने के लिए अक्टूबर 2024 का कल्पना मिश्रा/चतुर्वेदी प्रकरण महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि उपलब्ध कराता है। उस समय मंत्री ने आरोप लगाया था कि दूसरी महिला ने उनके पति का नाम अपने पति के रूप में दस्तावेजों में दर्ज कराया और उनके बरेली स्थित आवास से नकदी तथा आभूषण चोरी किए। अब अक्टूबर 2026 में मंत्री ने अपने पति के खिलाफ कथित वैवाहिक धोखाधड़ी, उत्पीड़न, जालसाजी और हत्या की साजिश जैसे आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया है।

हालांकि, पुराने प्रकरण में कल्पना की कथित भूमिका और वर्तमान वैवाहिक विवाद के बीच सीधा कारणात्मक संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है। यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि उसी महिला के सामने आने से पति-पत्नी के रिश्ते में दरार पड़ी। इसकी पुष्टि के लिए पुराने मुकदमे के अभिलेख, संबंधित दस्तावेज और दोनों पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल मामला तीन स्तरों पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है—2024 में दूसरी महिला के खिलाफ दर्ज मुकदमा, 15 अक्टूबर 2026 को पति के खिलाफ दर्ज एफआइआर और उसके बाद दोनों पक्षों की ओर से सार्वजनिक किए गए बयान। कथित ऑडियो की सत्यता, दस्तावेजों में नाम दर्ज कराने की परिस्थितियां, वैवाहिक स्थिति से जुड़े आरोप और हत्या की साजिश के दावे जांच के प्रमुख बिंदु हो सकते हैं।

अब पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा कि पुराने विवाद और वर्तमान शिकायत के बीच क्या संबंध है, किन आरोपों के समर्थन में साक्ष्य उपलब्ध हैं और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

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