नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, मुंबई के पांच यात्री थे सवार
तकनीकी खराबी आने पर पायलट ने लिया सुरक्षित लैंडिंग का फैसला, सुबह करीब सात बजे की घटना

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में चारधाम हेली सेवाओं के संचालन के बीच शनिवार सुबह नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में एक हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। सहस्त्रधारा हेलीपैड, देहरादून से गुप्तकाशी जा रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर में उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने यह फैसला लिया। हेलीकॉप्टर में मुंबई के पांच यात्री सवार थे। गनीमत रही कि सभी सुरक्षित रहे और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
घटना शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब सात बजे की है। हेलीकॉप्टर सहस्त्रधारा से गुप्तकाशी के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान तकनीकी समस्या आने पर पायलट ने नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में हेलीकॉप्टर उतार दिया। अचानक मैदान में हेलीकॉप्टर उतरने से वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई।
पायलट ने तकनीकी खराबी दूर करने के बाद भरी उड़ान
नई टिहरी कोतवाली निरीक्षक ऐश्वर्या पाल ने बताया कि हेलीकॉप्टर में मुंबई के पांच यात्री सवार थे। सुरक्षित लैंडिंग के बाद तकनीकी खराबी को दूर किया गया। इसके बाद हेलीकॉप्टर को वापस सहस्त्रधारा हेलीपैड ले जाया गया।
हालांकि, घटना को लेकर सामने आई कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तकनीकी खराबी दूर करने के बाद हेलीकॉप्टर ने बौराड़ी स्टेडियम से दोबारा गुप्तकाशी-केदारनाथ के लिए उड़ान भरी। इसलिए हेलीकॉप्टर की अंतिम गंतव्य उड़ान को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा फिर चर्चा में
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाएं यात्रियों को कम समय में चारधाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, पहाड़ी भूभाग, मौसम में अचानक बदलाव और तकनीकी समस्याएं इन उड़ानों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
ऐसे में नई टिहरी की यह घटना एक बार फिर हेली सेवाओं की सुरक्षा, तकनीकी जांच और आपात परिस्थितियों में पायलट के निर्णय की अहमियत सामने लाती है। फिलहाल इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।स्रोत एवं तथ्य संबंधी नोट: घटना का समय, कंपनी, यात्रियों की संख्या और तकनीकी खराबी की जानकारी की पुष्टि समकालीन रिपोर्टों से होती है। हेलीकॉप्टर के वापस सहस्त्रधारा लौटने और गुप्तकाशी के लिए दोबारा उड़ान भरने को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। प्रकाशन से पहले स्थानीय पुलिस या संबंधित विमानन कंपनी से इसकी पुष्टि कर लेना उचित होगा।
उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर हादसों और इमरजेंसी लैंडिंग के घटनाक्रम
2026: टिहरी में दो महत्वपूर्ण घटनाएं
1. 21 मई 2026 — नवागांव, सकलाना क्षेत्र, टिहरी गढ़वाल
बदरीनाथ से देहरादून लौटते हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग हुई थी। ट्रांस भारत एविएशन का एक चार्टर हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से छह यात्रियों को लेकर देहरादून लौट रहा था। जौनपुर क्षेत्र के नवागांव-सत्यों के ऊपर से गुजरते समय हेलीकॉप्टर में समस्या आई।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, हेलीकॉप्टर हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आने से क्षतिग्रस्त हुआ था। पायलट अनुपमा चौधरी ने स्थिति को संभालते हुए हेलीकॉप्टर को खेतों में सुरक्षित उतार दिया। पायलट समेत सभी छह यात्री सुरक्षित रहे। घटना के बाद प्रशासन ने यात्रियों को सड़क मार्ग से देहरादून भेजा और हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच के लिए कंपनी की टीम को बुलाया गया।
2. 24 अक्टूबर 2026 — बौराड़ी स्टेडियम, नई टिहरी
तकनीकी खराबी के बाद हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
सहस्त्रधारा से गुप्तकाशी जा रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर में तकनीकी समस्या आने पर पायलट ने बौराड़ी स्टेडियम में लैंडिंग की। हेलीकॉप्टर में मुंबई के पांच यात्री सवार थे।
कोतवाली निरीक्षक ऐश्वर्या पाल के अनुसार, लैंडिंग सुरक्षित रही। तकनीकी खराबी दूर करने के बाद हेलीकॉप्टर को वापस सहस्त्रधारा ले जाया गया। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्टों में उसके गुप्तकाशी के लिए दोबारा उड़ान भरने का उल्लेख है। अंतिम स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
2025: चारधाम यात्रा के दौरान पांच प्रमुख घटनाएं
3. 8 मई 2025 — गंगनानी, उत्तरकाशी
गंगोत्री जा रहा हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, छह लोगों की मौत
एयरो ट्रांस कंपनी का हेलीकॉप्टर उत्तरकाशी जिले में गंगनानी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर में सवार छह लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ।
घटना की सूचना मिलने पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। घायल को उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंचाया गया। हादसे की जांच के निर्देश भी दिए गए।उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने छह यात्रियों की मौत और एक व्यक्ति के घायल होने की पुष्टि की थी।
4. 12 मई 2025 — उखीमठ, रुद्रप्रयाग
खराब दृश्यता के कारण स्कूल के मैदान में उतारा हेलीकॉप्टर
बदरीनाथ से सिरसी लौट रहे यात्रियों को लेकर जा रहे एक हेलीकॉप्टर को खराब दृश्यता के कारण उखीमठ के एक स्कूल के मैदान में उतारना पड़ा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हेलीकॉप्टर में सवार सभी यात्री सुरक्षित रहे। मौसम में सुधार होने के बाद करीब एक घंटे तक रुकने के पश्चात हेलीकॉप्टर ने दोबारा उड़ान भरी। यह घटना पहाड़ी इलाकों में मौसम की अनिश्चितता के कारण सामने आई आपात लैंडिंग का एक उदाहरण है।
5. 17 मई 2025 — केदारनाथ क्षेत्र, रुद्रप्रयाग
बीमार यात्री को लेने जा रहे हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
एम्स ऋषिकेश की हेलीकॉप्टर एंबुलेंस बीमार श्रद्धालु को लेने के लिए केदारनाथ जा रही थी। उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के पिछले हिस्से में समस्या आने के कारण उसे आपात स्थिति में उतारना पड़ा।हेलीकॉप्टर में सवार डॉक्टर, पायलट और चिकित्सा कर्मी समेत तीनों लोग सुरक्षित रहे। घटना में किसी की जान नहीं गई।
6. 7 जून 2025 — बदासू क्षेत्र, रुद्रप्रयाग
उड़ान भरते समय हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पांच यात्री सुरक्षित
केदारनाथ के लिए उड़ान भरते समय एक हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई। पायलट को सड़क पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी। लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर का पिछला रोटर एक खड़ी कार से टकराया।
हेलीकॉप्टर में सवार पांच यात्री सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि पायलट को मामूली चोट आई। घटना के बाद हेली सेवाओं की तकनीकी जांच और संचालन सुरक्षा पर सवाल उठे।
7. 15 जून 2025 — गौरीकुंड के पास, रुद्रप्रयाग
केदारनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, सात लोगों की मौत
आर्यन एविएशन का बेल-407 हेलीकॉप्टर केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहा था। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, हेलीकॉप्टर ने सुबह 5:19 बजे केदारनाथ से वापसी की उड़ान भरी थी और सुबह 5:30 से 5:45 बजे के बीच गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
हेलीकॉप्टर में पांच यात्री, एक शिशु और चालक दल का एक सदस्य सवार था। हादसे में सभी सात लोगों की मौत हो गई।
प्रारंभिक आकलन में खराब दृश्यता और घाटी में बादलों की मौजूदगी को संभावित जोखिम माना गया। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारण का निर्धारण विस्तृत जांच के आधार पर किया जाना था।
हादसे के बाद आर्यन एविएशन की चारधाम यात्रा सेवाएं तत्काल निलंबित कर दी गईं। क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश भी दिए गए।
2024: केदारनाथ में आपात लैंडिंग और हेलीकॉप्टर को एयरलिफ्ट करने के दौरान दुर्घटना
8. 24 मई 2024 — केदारनाथ हेलीपैड, रुद्रप्रयाग
तकनीकी खराबी के कारण हेलीपैड से पहले उतारा हेलीकॉप्टर
केदारनाथ जा रहे एक हेलीकॉप्टर में पिछले मोटर से संबंधित तकनीकी समस्या आ गई। पायलट ने हेलीपैड से करीब 100 मीटर पहले हेलीकॉप्टर उतार दिया। हेलीकॉप्टर में छह यात्री सवार थे। सभी यात्री और पायलट सुरक्षित रहे। हेलीकॉप्टर को बाद में मरम्मत के लिए ले जाने की तैयारी की गई।
9. 31 अगस्त 2024 — थारू कैंप घाटी, केदारनाथ क्षेत्र
एमआई-17 से ले जाया जा रहा क्षतिग्रस्त हेलीकॉप्टर नीचे गिरा
केदारनाथ में पहले आपात लैंडिंग कर चुके एक हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से मरम्मत के लिए गौचर ले जाया जा रहा था।
हेलीकॉप्टर को नीचे लटकाकर ले जाने के दौरान तेज हवा और भार के कारण एमआई-17 का संतुलन प्रभावित हुआ। स्थिति को देखते हुए पायलट ने क्षतिग्रस्त हेलीकॉप्टर को थारू कैंप घाटी के निर्जन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस घटना में किसी की जान नहीं गई। हालांकि, इसने पहाड़ी इलाकों में क्षतिग्रस्त विमानों को एयरलिफ्ट करने से जुड़ी चुनौतियों को सामने ला दिया।
2023: हेलीपैड पर जानलेवा हादसा और तकनीकी खराबी
10. 23 अप्रैल 2023 — केदारनाथ हेलीपैड, रुद्रप्रयाग
हेलीकॉप्टर के टेल रोटर की चपेट में आने से अधिकारी की मौत
केदारनाथ में हेलीकॉप्टर के पिछले रोटर की चपेट में आने से उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ वित्त नियंत्रक की मौत हो गई। यह घटना उड़ान के दौरान नहीं, बल्कि हेलीपैड पर हुई थी। इससे हेलीकॉप्टर के आसपास यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की रिपोर्ट में इस घटना के संदर्भ में यात्रियों को हेलीकॉप्टर तक ले जाने और सुरक्षा ब्रीफिंग की प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया है।
11. 2 अक्टूबर 2023 — गुप्तकाशी क्षेत्र, रुद्रप्रयाग
तकनीकी खराबी के बाद हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग
चारधाम यात्रा के दौरान गुप्तकाशी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग की घटना सामने आई। मीडिया रिपोर्टों में छह लोगों के सुरक्षित बचने का उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध स्रोतों में इस घटना के सटीक घटनास्थल, तकनीकी खराबी की प्रकृति और लैंडिंग की परिस्थितियों का पर्याप्त विवरण नहीं मिला है। इसलिए इन पहलुओं पर निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
2022: गरुड़चट्टी में बड़ा हादसा
12. 18 अक्टूबर 2022 — गरुड़चट्टी, केदारनाथ
हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराया, पायलट समेत सात लोगों की मौत
आर्यन एविएशन का हेलीकॉप्टर केदारनाथ से गुप्तकाशी लौटते समय गरुड़चट्टी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर में पायलट समेत सात लोग सवार थे। हादसे में सभी सात लोगों की मौत हो गई।दुर्घटना के बाद बचाव दल मौके पर पहुंचे। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और मौसम की परिस्थितियों के कारण राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। यह हादसा उत्तराखंड में केदारनाथ हेली सेवाओं से जुड़ी गंभीर दुर्घटनाओं में शामिल है।
2019: केदारनाथ और उत्तरकाशी में दुर्घटनाएं
13. 21 अगस्त 2019 — उत्तरकाशी क्षेत्र
हेलीकॉप्टर दुर्घटना में तीन लोगों की मौत
उत्तरकाशी जिले में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में पायलट समेत तीन लोगों की मौत हुई थी। यह घटना उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं के जोखिम को सामने लाने वाली घटनाओं में शामिल है।
14. 23 अगस्त 2019 — उत्तरकाशी क्षेत्र
आपात लैंडिंग के दौरान पायलट घायल
उत्तरकाशी क्षेत्र में एक अन्य हेलीकॉप्टर को आपात स्थिति में उतारना पड़ा। इस घटना में पायलट के घायल होने की सूचना सामने आई थी।
15. सितंबर 2019 — केदारनाथ
लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, छह यात्री सुरक्षित
केदारनाथ में लैंडिंग के दौरान एक निजी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उसमें छह यात्री सवार थे। सभी यात्री सुरक्षित बचा लिए गए। इन घटनाओं के संबंध में उपलब्ध समाचार संकलनों में तारीखों और परिस्थितियों का सीमित विवरण है। किसी विस्तृत आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बिना इनके तकनीकी कारणों के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
2018: केदारनाथ में वायुसेना के हेलीकॉप्टर से जुड़ी दुर्घटना
16. 3 अप्रैल 2018 — केदारनाथ
एमआई-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटना, एक व्यक्ति की मौत
केदारनाथ में भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर से जुड़ी दुर्घटना हुई। उपलब्ध समाचार संकलन के अनुसार, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन अन्य घायल हुए। यह घटना चारधाम क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन से जुड़ी प्रमुख दुर्घटनाओं में दर्ज है।
2013: आपदा राहत अभियान के दौरान कई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं
जून 2013 में उत्तराखंड में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल फंसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर किया गया। इस दौरान कई दुर्घटनाएं हुईं।
17. 21 जून 2013 — जंगलचट्टी, केदारनाथ क्षेत्र
बचाव अभियान में लगा निजी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त
प्रभातम एविएशन का हेलीकॉप्टर बाढ़ राहत अभियान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट की मौत हुई।
18. 25 जून 2013 — गौरीकुंड के पास
एमआई-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटना, 20 से अधिक लोगों की मौत
आपदा राहत अभियान में लगा भारतीय वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में राहत अभियान में शामिल जवानों और अन्य कर्मियों की जान गई। विभिन्न समाचार संकलनों में मृतकों की संख्या 20 या 21 बताई गई है। इस दुर्घटना में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
19. 28 जून 2013 — गरुड़चट्टी, केदारनाथ
हेलीकॉप्टर दुर्घटना में तीन लोगों की मौत
केदारनाथ से करीब दो किलोमीटर आगे गरुड़चट्टी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर दुर्घटना की एक और घटना सामने आई। उपलब्ध संकलनों के अनुसार, इसमें तीन लोगों की मौत हुई।
20. 24 जुलाई 2013 — केदारनाथ घाटी
हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सह-पायलट और इंजीनियर की मौत
केदारनाथ क्षेत्र में हुई एक अन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सह-पायलट और इंजीनियर की मौत हुई थी। इन घटनाओं में राहत एवं बचाव अभियान की कठिन परिस्थितियां, दुर्गम भूभाग और मौसम प्रमुख चुनौतियों में शामिल थे। हालांकि, प्रत्येक दुर्घटना के तकनीकी कारणों को उसकी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अलग-अलग निर्धारित किया जाना चाहिए।
2009: केदारनाथ हेलीपैड पर जानलेवा घटना
21. 12 जून 2009 — केदारनाथ हेलीपैड
हेलीकॉप्टर के पंखे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत
केदारनाथ हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के पंखे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह घटना भी दर्शाती है कि हेलीकॉप्टर सुरक्षा केवल उड़ान और मौसम तक सीमित नहीं है। हेलीपैड पर यात्रियों की आवाजाही, सुरक्षित दूरी और ग्राउंड स्टाफ की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इन घटनाओं से क्या सामने आता है?
उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर से जुड़ी घटनाओं को मोटे तौर पर चार श्रेणियों में समझा जा सकता है:
1. खराब मौसम और कम दृश्यता: उत्तरकाशी, केदारनाथ और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम में अचानक बदलाव उड़ान संचालन को प्रभावित कर सकता है।
2. तकनीकी खराबी: इंजन, मोटर या हेलीकॉप्टर के अन्य हिस्सों में समस्या आने पर पायलट को सुरक्षित स्थान पर उतरने का फैसला लेना पड़ सकता है।
3. दुर्गम भूभाग और बिजली की लाइनें: पहाड़ी घाटियों, सीमित लैंडिंग स्थलों और हाईटेंशन लाइनों के आसपास उड़ान संचालन अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है।
4. हेलीपैड पर सुरक्षा: घूमते रोटर के पास यात्रियों और कर्मचारियों की आवाजाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।



