सुप्रीम गुहार: कॉर्बेट बाघ शिकार मामले में सीबीआई जांच से हट सकती है रोक
वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से बाघों के शिकार और अंगों की तस्करी की आशंका

Amit Bhatt, Dehradun: कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में बाघों के शिकार का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आठ साल से ठहरी हुई जांच को लेकर अब नया मोड़ उस समय आया, जब जोशीमठ के सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच पर लगी रोक हटाने और सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
मामले की शुरुआत: नेपाल से कॉर्बेट तक का कनेक्शन
यह विवाद 2015 में सामने आया, जब नेपाल पुलिस ने सुनसरी जिले के इतहरी क्षेत्र में हरियाणा के दो व्यक्तियों—राम दयाल और राजू—को गिरफ्तार कर उनके पास से बाघ की एक खाल बरामद की। जांच में पता चला कि यह खाल कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व से तस्करी कर नेपाल पहुंचाई गई थी।
2016 से शुरू हुए बड़े खुलासे
मार्च 2016 में हरिद्वार एसटीएफ ने भटिंडा के रहने वाले रामचंद्र को गिरफ्तार किया। उसके पास से 5 बाघों की खालें और 125 किलो बाघ की हड्डियाँ मिलीं। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि बरामद खालों में से चार कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व की ही थीं।
इसके बाद NTCA की रिपोर्ट ने भी पार्क प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। इससे पूरे मामले की जड़ें और गहरी हो गईं, और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
हाईकोर्ट और जांच आयोग की कार्रवाई
जनवरी 2018 में ‘टाइगर आई’ नामक एनजीओ की याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य व केंद्र सरकार से जवाब मांगा। राज्य ने जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ IFS अधिकारी जयराज को सौंपी।
जून 2018 में जयराज की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें तत्कालीन चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डी.एस. खाती, CTR के तत्कालीन निदेशक समीर सिन्हा, और दो अन्य अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया।
सितंबर 2018 में हाईकोर्ट ने अधिकारियों की मिलीभगत के ठोस संकेतों के आधार पर सीबीआई जांच के आदेश दिए। लेकिन आदेश में एक छोटी सी टाइपिंग गलती—गलत याचिका नंबर दर्ज होने—ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।
सुप्रीम कोर्ट में तकनीकी आधार पर लगी रोक
सेवानिवृत्त वन अधिकारी डी.एस. खाती इस तकनीकी खामी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला और तीन अहम रिपोर्टें—WII, NTCA और जयराज की जांच रिपोर्ट—को कोर्ट से छिपाया। 22 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच पर रोक लगा दी। 2023 में सीबीआई ने खुद इस रोक को हटाने का अनुरोध किया, लेकिन आज तक सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
विवादास्पद नियुक्ति ने बढ़ाई चिंता
इसी बीच जून 2025 में एक और बड़ा विवाद हुआ—जांच रिपोर्टों में आरोपी रहे समीर सिन्हा को चयन समिति से अहम जानकारियाँ छिपाकर उत्तराखंड का हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) बना दिया गया। इससे जांच की निष्पक्षता और सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए।
अतुल सती की सुप्रीम कोर्ट में पहल
3 नवंबर 2025 को अतुल सती ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर खुद को मामले में पक्षकार बनाने की मांग की। उन्होंने न सिर्फ सीबीआई जांच पर लगी रोक हटाने, बल्कि डी.एस. खाती पर झूठा हलफनामा दाखिल करने के लिए IPC की धारा 193 के तहत कार्रवाई की अपील भी की।





