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जिस सुमन को पुलिस और आयोग ने बीच में बैठाया, सीबीआई ने उसे किया गिरफ्तार

सितंबर में आयोजित और फिर रद्द की जा चुकी यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक मामले आरोपी है असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की रविवार 20 सितंबर 2025 को आयोजित की गई स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर लीक कांड में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने जिस असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को आयोग अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया के साथ बीच में बैठाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उसे शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

Uksssc पेपर लीक की सह आरोपी निलंबित असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन (प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान)

असिस्टेंट प्रोफेसर (वर्तमान में निलंबित) सुमन ने ही पेपर लीक के मास्टर माइंड खालिद मलिक की ओर से परीक्षा केंद्र से बाहर भेजे गए पेपर को महज 10 मिनट के भीतर हल कर वापस भेज दिया था। पुलिस ने प्रकरण में सुमन को आरोपी जरूर बनाया, लेकिन उस पर सख्ती नहीं दिखाई। उसे गिरफ्तार भी नहीं किया, बल्कि कहानी बयां करने के लिए उसे एक अतिथि की भांति अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठा दिया गया। जबकि, घटनाक्रम बता रहा था कि पेपर हल करने में दिखाई गई तत्परता असामान्य है।

बेशक पुलिस ने 20 सितंबर को पेपर लीक कांड के सामने आने के बाद तत्परता से 21 सितंबर को मास्टर माइंड खालिद मलिक की बहन साबिया और हिना के साथ सुमन को भी हिरासत में लिया था, लेकिन 22 सितंबर को गिरफ्तार सिर्फ साबिया को किया गया।

पुलिस जांच में हिना की भूमिका पुख्ता रूप से नहीं पाई गई थी, लिहाजा उसे गिरफ्तार नहीं किया गया और खालिद तब फरार चल रहा था। जिसे 23 सितंबर 2025 को हरिद्वार से पकड़ा गया। लेकिन, असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को लेकर सवाल अपनी जगह कायम थे।

क्योंकि, परीक्षा के दौरान हुए घटनाक्रम की एसआईटी जांच में पाया गया कि सुमन, जो अगरोडा डिग्री कॉलेज प्रतापनगर टिहरी गढवाल में असिसटेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थी, उसके मोबाइल पर 20 सितंबर प्रातः 07:55 बजे पर खालिद मलिक के मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया था। उसमें कहा गया था कि सिस्टर के पेपर हैं, उसकी मदद करनी है। जिस पर प्रातः 08:02 बजे सुमन ने OK मैसेज किया। उसके पश्चात प्रातः 11:34 बजे खालिद के नंबर से खालिद की बहन साबिया व हिना की व्हाट्सएप कॉल आई।

11:35 बजे स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्न पत्र के 03 पेज की फोटो, जिसमें 12 प्रश्न थे, सुमन के मोबाइल नंबर पर प्राप्त हुए। सुमन ने उक्त प्रश्नों के उत्तर हाथ से लिखकर महज 10 मिनट के भीतर प्रातः 11:45 बजे खालिद के मोबाइल नंबर पर भेज दिए।

इसके बाद की जो कहानी है, वह नाटकीय रूप भी लेती है। पूछताछ में सुमन ने पुलिस को बताया था कि उत्तर भेजने के बाद उसे कुछ शक हुआ कि कहीं आज कोई पेपर तो नही है? इस संबंध में सुमन ने अपनी बहन सीमा से पूछा तो उसकी बहन ने कहा कि मेरे पास बॉबी पंवार (पूर्व की परीक्षाओं में पेपर लीक का भांडा फोड़ने वाला व्यक्ति) का नंबर है, उससे यह बात मालूम करनी चाहिए।

तब सुमन ने किसी अधिकृत विभाग को सूचना देने के बजाय समय दोपहर 12:21 मिनट पर बॉबी पंवार का नंबर मिलाकर उससे बात की तथा समय 12:28 मिनट पर बॉबी पंवार को तीनों पेज के साथ ही हाथ से लिखे उत्तर व्हाट्सएप पर भेजे।

दोपहर 12:32 मिनट पर सुमन ने फिर से कॉल की, जिसमें बॉबी पंवार ने कहा कि इस बारे में किसी को मत बताना और उसके पश्चात दोपहर 12:42 और 12:43 मिनट पर भी कॉल की गई। बॉबी पंवार को परीक्षा के दौरान ही यह प्रश्न पत्र के 03 पेज व हाथ से लिखे उत्तर मिल गये थे। जिसके बाद पूरा प्रकरण सार्वजनिक हो गया और इंटरनेट पर वायरल होने लगा।

पुलिस को यहां तक बताई गई कहानी में सुमन आरोपी भी है और नासमझ हमदर्द भी। लेकिन, शायद सीबीआई ने इतनी आसानी से इस कहानी पर भरोसा नहीं किया और खुद तफ्तीश को अपने हिसाब से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। यही कारण है कि पुलिस की आरोपी और हमदर्दी की कहानी से आगे बढ़कर सीबीआई ने सुमन को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, खालिद और साबिया पहले से जेल में हैं।

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