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वीडियो: वीआईपी की खोज पहुंची थी धर्मेंद्र ‘प्रधान’ तक, पुलिस ने इस एंगल को ही किया खारिज, दिया स्पष्टीकरण

उर्मिला सनावर के सुरक्षा मांगने की अर्जी पर भी पुलिस ने दी जानकारी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों पर लगातार फैलाए जा रहे दावों को उत्तराखंड पुलिस ने आधे-अधूरे तथ्यों और निराधार आरोपों वाला बताया है। पुलिस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर पूरे प्रकरण से जुड़े अहम तथ्यों को सार्वजनिक किया। पुलिस ने दो टूक कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार का कोई वीआईपी संलिप्त नहीं है और इस तथ्य को माननीय न्यायालय भी स्वीकार कर चुका है। हालांकि, पुलिस ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान नाम के एक व्यक्ति पर कथित वीआइपी होने का अंदेशा था। जिस पर उसकी पूरी कुंडली खंगाली गई और जांच के बाद ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया।

पुलिस के अनुसार वायरल ऑडियो को भी गंभीरता से लेते हुए तत्काल एसआईटी गठित की गई, जिसने निष्पक्ष व गहन जांच की। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जा चुकी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई साक्ष्य न तो नष्ट किया गया और न ही छिपाया गया।

जिस कमरे को लेकर भ्रम फैलाया गया, उसकी वीडियोग्राफी सहित सभी साक्ष्य तीनों न्यायालयों में विधिवत पेश किए गए। प्रारंभिक जांच में ही कुछ घंटों के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली गई थी और वे तब से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। तथाकथित वीआईपी एंगल सामने आने पर रिसोर्ट में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की जांच की गई, पर कोई वीआईपी संलिप्तता नहीं मिली।

एसआईटी ने सभी कर्मचारियों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए। पुलिस रिमांड में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अंकिता पर “एक्स्ट्रा सर्विस” का दबाव बनाया। इनकार पर अपराध किया गया। कर्मचारियों के बयानों से भी पुष्टि हुई कि अंकिता मानसिक रूप से परेशान थी और जबरन ले जाई गई। अभियुक्तों की निशानदेही पर ही शव की बरामदगी विधिसम्मत ढंग से हुई।

पुलिस ने कहा कि उर्मिला सनावर के आरोपों को लेकर अलग एसआईटी गठित है। उन्हें जांच में सहयोग हेतु नोटिस दिए गए हैं, गिरफ्तारी नहीं हुई। सुरक्षा मांग पर स्पष्ट पता न होने की बात पुलिस ने कही। साथ ही मार्च 2025 का एक अलग प्रकरण इस केस से असंबंधित बताया गया।

अंत में पुलिस ने अपील की कि किसी के पास अतिरिक्त साक्ष्य हों तो सामने लाए जाएं। पुलिस ने दोहराया कि जांच निष्पक्ष, तथ्यपरक और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप हुई है; किसी को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

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