ब्रेकिंग: दुष्यंत गौतम ने हाई कोर्ट में दायर किया मुकदमा, फेसबुक और यूट्यूब समेत 12 के नाम दर्ज
02 करोड़ रुपए की मानहानि का वाद किया, अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े कथित भ्रामक सोशल मीडिया कंटेंट पर रोक की मांग

Rajkumar Dhiman, Dehradun: अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़कर सोशल मीडिया पर फैलाए गए कथित भ्रामक, अपमानजनक और मानहानिकारक कंटेंट को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम ने एक बड़ा सिविल मुकदमा दायर किया है। जिसमें उर्मिला सनावर (कथित पत्नी सुरेश राठौर), पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म समेत कुल 12 को पार्टी बनाया गया है। अदालती दस्तावेज़ों के अनुसार, यह वाद स्थायी व अनिवार्य निषेधाज्ञा (Permanent & Mandatory Injunction) के साथ मानहानि के आधार पर लगभग 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी करता है। इसी आधार पर 1,97,613 रुपए की कोर्ट फीस जमा की गई है।
मानहानि का आधार क्या है?
दुष्यंत गौतम का आरोप है कि Instagram, Facebook, YouTube और X (Twitter) पर वीडियो, रील्स, पोस्ट और कैप्शन के माध्यम से उन्हें अंकिता भंडारी मामले का “VIP” बताकर बिना किसी न्यायिक निष्कर्ष के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिससे उनकी सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान हुआ। इसे याचिका में “सोशल मीडिया ट्रायल” करार दिया गया है।
अदालत से मांगी गई प्रमुख राहतें
वाद में मानहानि के रूप में 02 करोड़ से अधिक के हर्जाने के साथ ही आपत्तिजनक कंटेंट पर स्थायी निषेधाज्ञा और भविष्य में ऐसे आरोपों के प्रकाशन पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (X, Meta, Google/YouTube) को कंटेंट हटाने/ब्लॉक करने के निर्देश के साथ ही कथित मानहानिकारक सामग्री के आगे प्रसार पर पूर्ण रोक की मांग की गई है।
दुष्यंत कुमार गौतम ने इन्हें बनाया पार्टी
– उर्मिला सनावर — अभिनेत्री/सोशल मीडिया पर्सनैलिटी; —- Instagram हैंडल @urmila_actress_bjp।
– सुरेश राठौर — पूर्व विधायक, उत्तराखंड (भाजपा से निष्कासित)।
– इंडियन नेशनल कांग्रेस — अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के माध्यम से।
– उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) — अध्यक्ष गणेश गोदियाल के माध्यम से।
– गणेश गोदियाल — अध्यक्ष, UPCC।
– आम आदमी पार्टी (AAP) — राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के माध्यम से।
– आलोक शर्मा — कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट (Facebook: @aloksharmacongress)।
– मोहित चौहान — X (पूर्व Twitter) हैंडल @mohitlaws।
– X अकाउंट @PMNehru — पैरडी अकाउंट।
– X (पूर्व Twitter)
– Meta Platforms, Inc. (Facebook/Instagram)
– Google LLC (YouTube आदि)
इन साक्ष्य और FIR का किया उल्लेख
याचिका में 30 से अधिक डिजिटल साक्ष्य, जिनमें वीडियो ट्रांसक्रिप्ट, स्क्रीनशॉट, सोशल मीडिया पोस्ट, और उर्मिला सनावर व सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज FIRs का भी उल्लेख है। साथ ही AI-जनरेटेड/डीपफेक होने की आशंका और SIT जांच का संदर्भ भी दिया गया है।
वाद का स्वरूप और अदालत में की गई मांगें
याचिका के अनुसार, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, रील्स, पोस्ट और कैप्शन के जरिए वादी को अंकिता भंडारी मामले का “VIP” बताकर गंभीर आरोप लगाए गए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा, निजता और सार्वजनिक छवि को क्षति पहुंची। वादी ने अदालत से मांग की है कि विवादित कंटेंट को तत्काल हटाया/ब्लॉक किया जाए। ऐसे कंटेंट के आगे प्रसार पर रोक लगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निर्देश जारी हों और मानहानि के लिए हर्जाना दिलाया जाए।
वाद में यह दिया गया तर्क
– सितंबर 2022: अंकिता भंडारी (19) लापता, बाद में हत्या और आपराधिक मामला दर्ज।
– मई 2025: ट्रायल का अंतिम निर्णय—वादी का नाम कहीं नहीं।
– दिसंबर 2025 (अंतिम सप्ताह): उर्मिला सनावर द्वारा Instagram पर वीडियो/रील्स अपलोड—वादी को कथित “VIP” बताने का दावा।
– इसके बाद: कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल्स (Instagram/YouTube/Facebook) और UPCC/नेताओं के पोस्ट-वीडियो; “BJP का VIP” कथानक।
– दिसंबर 2025: AAP के आधिकारिक पेजों से भी समान कथानक वाले पोस्ट/रील्स।
– 24–26 दिसंबर 2026: उर्मिला सनावर/अन्य के खिलाफ कई FIRs दर्ज।
– 26 दिसंबर 2026: उत्तराखंड राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने गृह सचिव व डीजीपी को पत्र।
– 28–30 दिसंबर 2026: X पर पैरडी अकाउंट @PMNehru व @mohitlaws के पोस्ट।
– इसके बाद: कई मीडिया/डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कथानक का विस्तार।
वाद के रूप में कोर्ट में दाखिल किए गए साक्ष्य
अदालत में 30+ से अधिक डिजिटल साक्ष्य रखे गए हैं, जिनमें शामिल हैं Instagram Reels/वीडियो (उर्मिला सनावर), कथित कॉल-रिकॉर्डिंग/दावे। INC के Instagram/YouTube वीडियो, UPCC व गणेश गोदियाल के Facebook पोस्ट/रील्स/लाइव।
AAP के Facebook पोस्ट/रील्स। X (Twitter) पोस्ट — @PMNehru, @mohitlaws। तीन FIRs (2026) — कथित भ्रामक/मानहानिकारक सामग्री के प्रसार को लेकर।
उत्तराखंड SC आयोग के पत्र आदि।



