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ब्रेकिंग: CBI जांच का बड़ा फैसला, अंकिता हत्याकांड के सभी पत्ते खुलेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अंकिता के माता-पिता की इच्छा और जनभावनाओं के अनुरूप उठाया बड़ा कदम

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड सरकार ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच CBI से कराने की सिफारिश करने का बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़ित माता-पिता की मांग को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को CBI जांच के लिए प्रस्ताव भेजा है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि अब यह मामला केंद्र की जांच एजेंसी के पास जाएगा, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हर पहलू की जांच हो सके।

सरकार का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड में कानून का राज रहेगा और मातृशक्ति की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि दोषियों को किसी भी स्थिति में नहीं बख्शा जाएगा।

📌 केस का संक्षिप्त बैकग्राउंड
📍 अंकिता भंडारी कौन थीं?
अंकिता भंडारी 19 वर्ष की युवती थीं, जो उत्तराखंड के पौड़ी-गढ़वाल जिले के वनंत्रा रिज़ॉर्ट (Vanantara Resort) में रिसेप्शनिस्ट थीं।

📆 घटना कब हुई?
18 सितंबर 2022 को अंकिता आख़िर बार देखी गईं। कुछ दिनों बाद उनका शव चिल्ला कैनाल में मिला, जिसे पोस्टमार्टम के बाद कई चोटों के साथ पाया गया।

📌 अपराध कैसे हुआ?
आरोप है कि रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य व उसके दो कर्मचारियों — सौरभ भास्कर और अनकित गुप्ता — ने अंकिता की हत्या की क्योंकि उसने कथित रूप से “विशेष सेवाएँ” देने से इंकार कर दिया था।

📍 कोर्ट का फैसला:
2025 में कोटद्वार की अदालत ने पुलकित आर्य और दोनों कर्मचारियों को आज़ीवन कारावास (लाइफ इम्प्रिज़नमेंट) की सज़ा सुनाई है।

📣 न्याय की मांग और आंदोलन
🔥 जन आक्रोश और प्रदर्शन
अंकिता के हत्या के बाद से ही मामले ने व्यापक आक्रोश को जन्म दिया था।
2022 में स्थानीय स्तर पर विरोध हुए और SIT जांच शुरू हुई।
2026 में मामला फिर से जोर पकड़ने लगा जब कुछ कथित वीआईपी लिंक से जुड़े वीडियो और आरोप सामने आए।

हाल के दिनों में उत्तराखंड के कई शहरों में CBI जांच की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए हैं — जिसमें युवाओं, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों के लोग शामिल हैं।
कई समूहों ने 11 जनवरी को राज्यव्यापी बंद का भी ऐलान किया है ताकि न्याय की मांग को और मजबूती मिले।

⚖️ CBI जांच की मांग क्यों?
अंकिता के माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ता यह चाहते हैं कि केस की जांच राज्य की SIT के बजाय CBI से हो ताकि:
✔ निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके
✔ किसी राजनीतिक दबाव से मुक्त तरीके से सच्चाई सामने आ सके
✔ जो भी ‘वीआईपी लिंक’ आरोप हैं, उनका खुलासा हो सके।

इस मांग के समर्थन में कई राजनीति दल भी आगे आए हैं, जैसे कि कांग्रेस के नेता हरीश रावत जिन्होंने पैदल मार्च किया और सरकार पर निष्पक्षता से काम न करने का आरोप लगाया।

🏛️ राजनीति और विवाद
यह मुद्दा अब राजनीतिक तनाव का भी कारण बन गया है:
🔹 विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार “साक्ष्यों को दबा रही है” और CBI जांच में देरी कर रही है।
🔹 राज्य सरकार कह रही है कि पहले से ही निष्पक्ष जांच चल रही थी और वो कोई भी सबूत दबाए बिना आगे बढ़ेगी।
🔹 मुख्यमंत्री धामी ने कुछ विपक्षियों से माफी मांगने तक कहा है और कहा है कि सरकार अंकिता के परिवार के साथ खड़ी है।

राजनीति के बीच अंकिता के नाम पर एक नर्सिंग कॉलेज का नामकरण भी किया गया है, जिसे अंकिता भंडारी कॉलेज के नाम से जाना जाएगा — यह सरकार की ओर से सम्मान और न्याय की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया गया है।

📍 लोगों की भावना और आगे की राह
अंकिता के लिए “न्याय” की मांग अब सिर्फ एक केस नहीं रह गई है — यह सुरक्षा, महिला सम्मान, निष्पक्ष जांच और सामाजिक न्याय के व्यापक मुद्दे का प्रतीक बन गयी है।
लोगों की आशा है कि CBI जांच के बाद सभी तथ्य खुलेंगे, और जो भी दोषी हैं — चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो — उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

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