वीडियो: उत्तराखंड पुलिस को सबसे भ्रष्ट बताकर किसान ने सिर में मारी गोली, कहा अंग बेचकर पैसे एसएसपी को देना
4 करोड़ की ठगी से परेशान सिख किसान की नैनीताल में आत्महत्या, सीएम धामी ने गंभीर रुख अपनाया

Amit Bhatt, Uttarakhand: ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी सिख किसान सुखवंत सिंह ने 4 करोड़ रुपये की जमीन ठगी और पुलिस की कथित अनदेखी से परेशान होकर नैनीताल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक पर LIVE वीडियो बनाकर पूरे मामले का खुलासा किया और उत्तराखंड पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो में उन्होंने खुद को न्याय न मिलने से पूरी तरह टूट चुका बताया। साथ ही कहा कि बॉडी पार्ट बेचकर पैसे एसएसपी और अन्य पुलिस कार्मिकों में बांट देना।
सुखवंत सिंह पत्नी और 12 वर्षीय बेटे के साथ घूमने के लिए नैनीताल आए थे। शनिवार देर रात होटल के कमरे में यह घटना हुई। गोली चलने की आवाज सुनकर होटल स्टाफ और पुलिस मौके पर पहुंची। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
फेसबुक LIVE में क्या बोले सुखवंत सिंह
आत्महत्या से पहले बनाए गए फेसबुक LIVE वीडियो में सुखवंत सिंह ने बेहद भावुक और तीखे शब्दों में अपनी पीड़ा रखी। वीडियो की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा—“मैं एक किसान हूं और मैं मर चुका हूं। अब आप मेरी यह वीडियो मरने के बाद देख रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि काशीपुर के एक गिरोह ने उनसे करीब 4 करोड़ रुपये की ठगी की। इसमें से करीब 3 करोड़ रुपये नकद और 1 करोड़ रुपये बैंक खाते के जरिए दिए गए थे।
जमीन कुछ और दिखाई, रजिस्ट्री कहीं और करा दी
वीडियो में सुखवंत सिंह ने बताया कि उन्हें जिस जमीन का सौदा दिखाया गया था, उसकी रजिस्ट्री नहीं कराई गई। आरोप है कि धोखे से कम कीमत वाली दूसरी जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। उन्होंने कहा कि इस धोखाधड़ी के पीछे कई लोग शामिल हैं और यह पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से किया गया।
एक नहीं, 02 बार ठगे जाने का आरोप
सुखवंत सिंह ने दावा किया कि उनके साथ सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दो बार धोखाधड़ी की गई। जब वह इस मामले की शिकायत लेकर थाना आईटीआई काशीपुर पहुंचे तो वहां उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन थानाध्यक्ष ने उनके साथ गाली-गलौज की और उन्हें थाने से भगा दिया।
चार महीने तक पुलिस ने किया मानसिक उत्पीड़न
LIVE वीडियो में किसान ने कहा कि वह पिछले चार महीनों से लगातार पुलिस के चक्कर काट रहा था। पैगा चौकी से लेकर एसएसपी कार्यालय तक कई बार गया, लेकिन कहीं से न्याय नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 दिसंबर 2025 को जब वह दोपहर करीब डेढ़ बजे एसएसपी कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें डांटकर बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद चौकी में भी कथित तौर पर अपमानित किया गया।
“मेरे शरीर के अंग बेचकर पैसा पुलिस वालों में बांट देना”
वीडियो का सबसे गंभीर और चौंकाने वाला हिस्सा तब सामने आया जब सुखवंत सिंह ने कहा—“मेरे शरीर के सारे अंग बेचकर जो भी पैसा मिले, वह एसएसपी मणिकांत मिश्रा, एएसओ कुंदन सिंह रौतेला, थाना आईटीआई के प्रकाश बिष्ट और पैगा चौकी के सभी अधिकारी-कर्मचारियों में बांट दिया जाए, ताकि उनके बीवी-बच्चे उस पैसे से मौज कर सकें।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के बड़े अधिकारी इस पूरे मामले में आपस में मिले हुए हैं। उन्होंने अपनी आखिरी इच्छा बताते हुए कहा कि इस मामले की जांच सिर्फ CBI से कराई जाए और जिन लोगों पर आरोप हैं, उन्हें जमानत न दी जाए।
शव घर पहुंचते ही फूटा आक्रोश
रविवार देर शाम सुखवंत सिंह का पार्थिव शरीर काशीपुर स्थित उनके घर पहुंचा। शव पहुंचते ही घर पर भारी संख्या में लोग जुट गए। परिजनों और ग्रामीणों में गुस्सा साफ नजर आया। परिवार ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि—सुखवंत सिंह की आखिरी फेसबुक LIVE वीडियो को प्राथमिक सबूत माना जाए। वीडियो में नामजद अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाए। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि सोमवार दोपहर 12 बजे तक कार्रवाई नहीं हुई, तो शव को थाने पर रखकर प्रदर्शन किया जाएगा।
सरकार और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुष्कर सिंह धामी ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, उत्तराखंड के एडीजी (कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने कुमाऊं रेंज के आईजी रिद्धिम अग्रवाल को गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट भी पहुंचे थे सुखवंत सिंह
परिजनों के मुताबिक आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह नैनीताल पहुंचे थे और उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट में करीब आधे घंटे तक वकीलों से बातचीत की थी। उस समय वह बेहद परेशान नजर आ रहे थे, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यह मामला केवल एक किसान की आत्महत्या का नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि—क्या जमीन धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय मिल रहा है? क्या पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी? क्या वीडियो में लगाए गए आरोपों के आधार पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? अब पूरे उत्तराखंड की नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।



