गंगा–यमुना घाटी में शीतलहर का कहर, माइनस तापमान से जनजीवन ठप
पहाड़ों में जमने लगा पानी, नदी, झरने ही नहीं नलों का पानी भी बना बर्फ

Rajukumar Dhiman, Dehradun: समूची गंगा और यमुना घाटी इन दिनों भीषण शीतलहर की गिरफ्त में है। कड़ाके की ठंड ने पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बढ़ते शीत प्रकोप से ग्रामीण इलाकों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। पानी की पाइपलाइनें जमने लगी हैं, झरने और तालाब बर्फ की सफेद चादर ओढ़ चुके हैं, जबकि नदियों का प्रवाह भी प्रभावित होने लगा है।
ठंड का असर इतना भयावह है कि शाम ढलते ही लोग अलाव के सहारे समय काटने को मजबूर हैं। गंगोत्री धाम में न्यूनतम तापमान माइनस तीन डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है, जबकि यमुनोत्री धाम में माइनस चार डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।
जनवरी का महीना शुरू हो जाने के बावजूद उत्तरकाशी के ऊंचे इलाकों में अब तक बर्फबारी नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद दोपहर बाद चलने वाली सर्द हवाओं ने ठंड का असर और बढ़ा दिया है। मुखीमठ, हर्षिल, सुख्खी, धराली, खरशाली, मोरी, जखोल सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में लोग हाड़ कंपाने वाली ठंड में दिन-रात गुजार रहे हैं।
यमुनोत्री और गंगोत्री धाम समेत ढाई हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान शून्य से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, ऊंचाई वाले इलाकों में शाम होते-होते बारिश और बर्फबारी की संभावना फिर से बन रही है।
जिला मुख्यालय और निचले घाटी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 12 डिग्री और न्यूनतम चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। गंगोत्री धाम से लगी हर्षिल घाटी में यात्रा बंद होने के कारण सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां नदियों और झरनों का पानी, जो सामान्यतः अविरल बहता रहता है, अब जमने लगा है, जिससे प्राकृतिक जल प्रवाह पर भी असर पड़ रहा है।
भीषण ठंड से बचाव के लिए लोग अपने स्तर पर अलाव जलाने और वैकल्पिक उपाय अपनाने को मजबूर हैं। वहीं प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से ग्रामीणों ने शीतलहर को देखते हुए राहत और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।



