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उत्तराखंड: डीआईजी को सस्पेंड किया, वर्दी घोटाले पर सीएम धामी का कड़क एक्शन

आखिरकार DIG अमिताभ श्रीवास्तव पर गिरी गाज, संयुक्त जांच समिति गठित

Rankumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति एक बार फिर जमीन पर दिखी है। होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद में हुए बड़े घोटाले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही, प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

क्या है वर्दी सामग्री खरीद का घोटाला?
होमगार्ड्स के लिए हर साल वर्दी, जूते, बेल्ट, कैप, बैज और अन्य एक्सेसरीज़ की खरीद होती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान इस खरीद में करोड़ों के बजट को जारी किया गया था। लेकिन जांच में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं उजागर हो गईं:

1️⃣ टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं
महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को छुपाया गया और योग्य फर्मों को बाहर कर मनपसंद कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। साथ ही टेंडर की शर्तें बदली गईं ताकि खास ठेकेदार को फायदा मिले
2️⃣ बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीद की गई। वर्दी सामग्री की कीमतें बाजार दर से 20–40% अधिक दिखाई गईं और कम गुणवत्ता की सामग्री को उच्च गुणवत्ता दिखाकर बिल पास कराए गए।
3️⃣ एक ही फर्म को बार-बार लाभ दिया गया। प्रतिस्पर्धी बोली को दरकिनार कर एक ही सप्लायर को लगातार टेंडर दिए गए और फर्जी तकनीकी योग्यता के दस्तावेज भी सामने आए।
4️⃣ स्टाक में कमी, बिलों में बढ़ोतरी की जाती रही। रिकॉर्ड के अनुसार खरीदी गई वर्दी का स्टॉक और वास्तविक उपलब्धता में भारी अंतर पाया गया और विभागीय बिलों में मात्रा बढ़ाकर दिखाई गई।कुछ सामान कभी विभाग तक पहुंचा ही नहीं

घोटाला कैसे अंजाम दिया गया? पूरी कहानी
घोटाले की शुरुआत वर्दी सामग्री के टेंडर नोटिस से होती है। शुरुआत से ही शर्तें ऐसी तय की गईं कि वही फर्में भाग ले सकें जिन्होंने अधिकारियों से सांठगांठ कर रखी थी। फर्जी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की गईं। सैंपल टेस्टिंग में मिली कमियों को दबा दिया गया। अंदरखाने तय दरों पर सप्लायरों से कमीशन तय किया गया। वास्तविक खरीद कीमत और बिलों में दिखाए गए मूल्य में भारी अंतर रखा गया। इसके बाद वर्दी सामग्री कम गुणवत्ता की भेजी गई। कई वस्तुएं कागजों में खरीदी दिखीं, लेकिन असल में विभाग तक पहुंचीं ही नहीं। भुगतान जांच में बिना उचित दस्तावेज़ों के जारी किया गया।

जब शिकायतें बढ़ीं, तो महानिदेशक होमगार्ड्स ने जांच रिपोर्ट शासन को भेजी। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि टेंडर प्रक्रिया नियमों के विपरीत हुई और पारदर्शिता का अभाव था। कई चरणों में वित्तीय अनियमितताएं और जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया गया। सीधे इन अनियमितताओं के लिए डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

सीएम धामी का कड़ा संदेश: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
सीएम धामी ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की नीति पर काम कर रही है। किसी भी अधिकारी-कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार किया गया तो बख्शा नहीं जाएगा। संयुक्त जांच समिति पूरे प्रकरण की परतें खोलेगी। खरीद प्रक्रिया से जुड़ी फाइलें, भुगतान रिकॉर्ड, टेंडर डॉक्यूमेंट और सप्लायरों की भूमिका की जांच होगी। दोष सिद्ध होने पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई तय है।

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