पद्मभूषण सम्मान पर सियासी घमासान: भगत सिंह कोश्यारी के चयन पर उद्धव गुट का हमला, संजय राउत बोले—‘महाराष्ट्र का अपमान’
पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भाजपा और केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Rajkumar Dhiman, Dehradun: महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान दिए जाने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “महाराष्ट्र का अपमान” करार दिया है।
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें देशभर से कुल 131 विभूतियों को सम्मानित किया गया। इस सूची में 5 पद्मविभूषण, 13 पद्मभूषण और 113 पद्मश्री पुरस्कार शामिल हैं। सार्वजनिक क्षेत्र में योगदान के लिए भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।
संजय राउत का तीखा तंज
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कुचलकर शिंदे-भाजपा सरकार स्थापित करने के “इनाम” के तौर पर कोश्यारी को यह सम्मान दिया गया है।
राउत ने आगे कहा कि यही वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा जोतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले जैसे महान व्यक्तित्वों को लेकर विवादित बयान दिए थे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए लिखा, “महाराष्ट्र का अपमान करने वालों को भाजपा सम्मानित कर रही है—वाह! बहुत बढ़िया!”
क्यों विवादों में रहे भगत सिंह कोश्यारी
भगत सिंह कोश्यारी का महाराष्ट्र में 2019 से 2023 तक का राज्यपाल कार्यकाल लगातार विवादों में रहा। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने पूरे राज्य में तीव्र विरोध को जन्म दिया था। इसके अलावा महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के संदर्भ में दिए गए बयान भी राजनीतिक और सामाजिक विवाद का कारण बने। उनके कार्यकाल के दौरान ही 2019 में देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को तड़के शपथ दिलाने का घटनाक्रम सामने आया था, जिसके बाद 72 घंटे में सरकार गिर गई।
इस पूरे दौर में महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना) और राज्यपाल के बीच टकराव की स्थिति बनी रही। विपक्षी दलों ने उन्हें हटाने के लिए कई बार अभियान भी चलाया।
अनुभव और राजनीतिक सफर
विवादों से इतर, भगत सिंह कोश्यारी को एक अनुभवी राजनेता माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत आरएसएस से की और बाद में भाजपा में अहम भूमिकाएं निभाईं। वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा और राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। कोश्यारी उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री भी रहे हैं और केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल रहने के साथ-साथ उनके पास गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी रहा।
बधाइयों के साथ विरोध
जहां उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई भाजपा नेताओं ने कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान मिलने पर बधाई दी है, वहीं महाराष्ट्र की राजनीति में यह सम्मान एक बार फिर राज्यपाल पद, संवैधानिक मर्यादा और केंद्र-राज्य संबंधों पर बहस का मुद्दा बन गया है।



