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भ्रष्टाचार का अड्डा बना सब रजिस्ट्रार कार्यालय, डीएम के छापे में अव्यवस्थाएं उजागर

ऋषिकेश के सब रजिस्ट्रार कार्यालय (भूमि) में मिला फर्जी कर्मचारी, जमीनों के कई खेल हुए उजागर

Amit Bhatt, Dehradun: जिलाधिकारी सविन बंसल ने सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश पर छापा मारा। जहां गंभीर अनियमितताओं, अवैध कार्यप्रणाली और व्यापक अव्यवस्था का खुला पर्दाफाश हुआ। निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। डीएम सविन बंसल ने साफ कहा कि इस स्तर की लापरवाही और नियमों का उलंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ज़िम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई तय है।

सब रजिस्ट्रार के अभाव में लिपिक कर रहा था निबंधन, स्पष्ट अवैधता का मामला
निरीक्षण में सबसे बड़ा खुलासा था सब रजिस्ट्रार के अनुपस्थित होने के बावजूद लिपिक अवैधानिक रूप से विलेखों का निबंधन। डीएम ने पूछा—“जब आपको संपत्ति मूल्यांकन (47-ए) का ज्ञान ही नहीं, तो स्टांप शुल्क कैसे पास किया?” तो संबंधित निबंधक लिपिक बगले झांकता रह गया।

औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर रजिस्ट्री—करोड़ों की स्टांप चोरी की आशंका
निरीक्षण में कई ऐसी रजिस्ट्रियां बरामद हुईं, जिनमें औद्योगिक क्षेत्रों के भूखंडों को आवासीय दरों पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर रजिस्ट्री किया गया था। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता करोड़ों की संभावित स्टांप चोरी की ओर संकेत करती है। इस पूरे प्रकरण पर डीएम ने विस्तृत आख्या तत्काल तलब की है।

घोस्ट कार्मिक मिला—न नियुक्ति पत्र, न उपस्थिति में नाम
औचक निरीक्षण के दौरान एक घोस्ट (फर्जी) कर्मचारी भी पकड़ा गया, जिसका न कोई नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति पंजिका में उसका नाम दर्ज था। जिलाधिकारी ने तत्काल सभी कार्मिकों का रिकार्ड तलब कर लिया है।

पुराना डेटाबेस चल रहा था—संदेहास्पद विलेख जब्त
कार्यालय में पुराने, संदिग्ध डेटाबेस का उपयोग किया जा रहा था, जिसके लिए कोई तर्क नहीं दिया जा सका। डीएम ने सभी संदिग्ध/कूटरचित विलेखों के साथ-साथ कार्यालय का कंप्यूटर भी जब्त कर तहसील प्रशासन को सुपुर्द किया।

सैकड़ों मूल अभिलेख महीनों से लंबित—अलमारी में धूल खा रहे थे
निरीक्षण में पाया गया कि 3 दिन की निर्धारित सीमा के बावजूद सैकड़ों मूल विलेख 6 माह से अधिक समय से लंबित पड़े थे और कई अभिलेख अलमारी में धूल खाते मिले। उपभोक्ता महीनों से कार्यालय के चक्कर काट रहे थे, लेकिन न तो मूल अभिलेख लौटाए जा रहे थे और न ही रजिस्ट्री की नकल उपलब्ध कराई जा रही थी।

रजिस्ट्री नकल—24 घंटे की सीमा, मगर मामला महीनों/वर्षों से लंबित
अर्जेंट रजिस्ट्री नकल, जिसे 24 घंटे में उपलब्ध होना चाहिए, कई मामलों में महीनों और वर्षों से लंबित मिली। इस तरह की कार्यप्रणाली ने साफ किया कि सब रजिस्ट्रार कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन रहा है।

कार्यालय 9:30 बजे खुला, पहली रजिस्ट्री 11:15 पर—कार्मिकों के पास कोई जवाब नहीं
डीएम ने पाया कि समय से कार्यालय खुलने के बावजूद कार्य प्रारंभ करने में अनुचित देरी की जा रही थी। पूछे जाने पर कार्मिक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।

फरियादी भी बोले—पीड़ितों ने सुनाई अपनी आपबीती
कार्यालय में मौजूद कई आमजन ने डीएम के सामने अपनी समस्याएँ रखीं—मूल अभिलेख न मिलने से लेकर रजिस्ट्री प्रक्रियाओं में अवैध वसूली और अनावश्यक देरी तक। इस पर डीएम ने उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए।

डीएम ने दिए कड़ी कार्रवाई के संकेत
जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा—“जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही या नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं। दोषियों पर कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।” निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर, तहसीलदार चमन सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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