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घपले के आरोप में घिरे 03 अफसरों को 15 हजार करोड़ के कार्यों का ‘खास’ जिम्मा, भाजपा नेता ने ही खोला मोर्चा

केंद्र और राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी शारदा, हरिद्वार गंगा और ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की योजनाओं में मनमर्जी की तैनाती पर गंभीर सवाल

Rajkumar Dhiman, Dehradun: सिंचाई विभाग के जो अधिकारी करोड़ों रुपये के घपले के आरोपों में घिरे हैं और जांच का सामना कर रहे हैं, उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी परियोजना का जिम्मा सौंपने का गंभीर मामला सामने आया है। उससे भी गंभीर यह कि अधिकारियों की तैनाती शासन और मंत्री के अनुमोदन पर नहीं, बल्कि विभाग के प्रमुख अभियंता ने नियमों के विपरीत जाकर स्वयं कर दी। यह आरोप विपक्ष ने नहीं, बल्कि भारतीय जनता युवा मोर्चा उत्तराखंड के जिला उपाध्यक्ष, पिथौरागढ़ (अनुसूचित जनजाति) कमल दास ने लगाए हैं। उन्होंने 03 अधिकारियों के नाम और कारगुजारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज और मुख्य सचिव समेत अन्य को पत्र भेजा है। जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे अधिकारियों के तैनाती आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है। बड़ा सवाल यह भी है कि यदि सिंचाई विभाग में इसी तरह भ्रष्टाचार की गंगा बहती रही तो विकास ‘जानी जॉन जनार्दन की जेबों में ही तरा रम पम पम पम’ करता रह जाएगा।

भारतीय जनता युवा मोर्चा उत्तराखंड के जिला उपाध्यक्ष (अनुसूचित जनजाति) कमल दास की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सिंचाई विभाग और उससे संबंधित महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, मनमानी और विवादित अधिकारियों की नियुक्ति गंभीर बात है। इससे देवभूमि में चल रही हजारों करोड़ की परियोजनाओं में संदेहास्पद अधिकारियों की तैनाती से सरकार की छवि और ईमानदार शासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही यह भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए खड़ी की गई सरकार की जीरो टॉलरेंस की अवधारणा को भी चुनौती देता है।

शिकायत में कहा गया है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में शारदा कॉरिडोर, हरिद्वार गंगा कॉरिडोर, ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के उत्तराखंड में 15 हजार करोड़ रुपये के कार्य किए जाने हैं। इन कार्यों के लिए सिंचाई विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (UPDCCL) को कार्यदाई संस्था नामित किया गया है। इसके तहत पीआईयू (प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट) गठित किए गए हैं।

यहीं से खेल शुरू किया गया और परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सिंचाई विभाग से 03 ऐसे अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया, जिन पर करोड़ों रुपये के घोटालों के आरोप हैं। इनके विरुद्ध एसआईटी जांच गतिमान है और शासन की ओर से आरोप पत्र भी दिए गए हैं।

इनमें मनोज सिंह अधीक्षण अभियंता पर सूर्यधार बैराज निर्माण, हरिद्वार जनपद में पूर्व में किये गये कार्यों, पिथौरागढ़ जनपद में पूर्व में किये गये कार्यों आदि के करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप हैं तथा उत्तराखंड शासन ने इन्हें आरोप पत्र दिए हैं। वर्तमान में ये जांच का सामना कर रहे हैं। फिर भी मनोज सिंह को महाप्रबंधक पीआईयू-3 का जिम्मा दे दिया गया।

इसी तरह विवेक शर्मा सहायक अभियंता, जिन पर सिंचाई खंड काशीपुर में 07 से 08 करोड़ रुपये के घपले के आरोप हैं और वह एसआईटी जांच का सामना कर रहे हैं, उन्हें प्रबंधक पीआईयू-3 का कार्यभार दिया गया है। सहायक अभियंता अरुण नेगी पर भी सिंचाई खंड काशीपुर में घपले के आरोप हैं और इनके विरुद्ध भी एसआईटी जांच चल रही है। बावजूद इसके अरुण नेगी को पीआईयू-3 में सहायक प्रबंधक बनाया गया है।

ऐसे अधिकारियों की तैनाती सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता ने अपने स्तर पर की है, जबकि तैनाती के लिए सचिव सिंचाई व सिंचाई मंत्री से अनुमोदन लिया जाना आवश्यक था। परंतु प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र की ओर से अपनी मर्जी से आदेश किये गये हैं, जो कि नियम विरुद्ध है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र द्वारा इतनी बड़ी परियोजना के कार्य प्रारम्भ होने से पूर्व ही महाभ्रष्ट अधिकारियों को नियुक्ति दी गई है तो आने वाले समय में इस पर नजाने कितने भ्रष्टाचार से हरे होगें यह एक सोचने का विषय है। इस प्रकार भ्रष्ट अधिकारियों को उक्त परियोजना में नियुक्ति देने से उत्तराखंड सरकार की छवि जनता में खराब होगी व ईमानदार अधिकारियों की कार्य करने की क्षमता में गिरावट आएगी।

भाजपा नेता कमल दास के पत्र में आग्रह किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमा व ईमानदारी को ध्यान में रखते हुए व इस देवभूमि की ईमानदारी को ध्यान में रखते हुए इन तीनों महाभ्रष्ट अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश/द्वैत कार्यभार के आदेश निरस्त करते हुए ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। भाजपा जिलाध्यक्ष कमल के अनुसार “प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ईमानदार नीति के विपरीत, प्रमुख अभियंता ऐसे अधिकारियों को नियुक्त कर रहे हैं, जिनका अतीत घोटालों से भरा है। इससे न केवल जनता का विश्वास टूटेगा, बल्कि सरकारी कार्यों की पारदर्शिता भी खत्म हो जाएगी।”

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