एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाला: ईडी ने 13.89 करोड़ की संपत्तियां अटैच की
लैंडयूज में खेल करने के मामले में 04 आरोपियों पर कार्रवाई, 26 करोड़ से अधिक का लिया अतिरिक्त मुआवजा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: राष्ट्रीय राजमार्ग-74 से जुड़े बहुचर्चित भूमि मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपितों की लगभग 13.89 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर दी हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार जांच की शुरुआत पंतनगर थाना (ऊधम सिंह नगर) में दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने भूमि से जुड़े कानूनों के तहत पूर्व दिनांकित (बैक-डेटेड) आदेश हासिल कराए और बाद में उन्हें राजस्व अभिलेखों में दर्ज करवाया। इसका उद्देश्य कृषि भूमि को गैर-कृषि श्रेणी में दिखाकर मुआवजे की दर कई गुना बढ़ाना था।
26 करोड़ से अधिक के अतिरिक्त मुआवजे का खेल
ईडी की पड़ताल में खुलासा हुआ कि यह पूरी प्रक्रिया राजस्व अधिकारियों और बिचौलियों की कथित मिलीभगत से अंजाम दी गई। इसी साजिश के तहत एनएच-74 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित भूमि पर गैर-कृषि दर लागू कराकर करीब 26.02 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त किया गया। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपितों को अनुचित लाभ मिला।
जिन पर शिकंजा कसा गया
ईडी की कार्रवाई के दायरे में जिन चार लोगों की संपत्तियां कुर्क की गई हैं, वे हैं दिलबाग सिंह, जरनैल सिंह (पुत्र सुंदर सिंह), बलजीत कौर (पत्नी प्रताप सिंह) और दलविंदर सिंह (पुत्र प्रताप सिंह)।
अवैध धन से संपत्ति खरीदी
जांच एजेंसी का कहना है कि इस अवैध मुआवजे की रकम का इस्तेमाल आरोपितों ने अचल संपत्तियां खरीदने में किया। इसके अलावा पैसा अन्य बैंक खातों और रिश्तेदारों के खातों में भी ट्रांसफर किया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए 13.89 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है।
अब तक ईडी की प्रमुख कार्रवाई
-एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर दर्ज कर पीएमएलए के तहत जांच शुरू।
-चरणों में छापेमारी कर दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड जब्त।
इससे पहले भी तीन बार अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए जा चुके हैं।
-अब तक विशेष पीएमएलए न्यायालय देहरादून में 7 अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) दायर।
क्या है पूरा घोटाला
एनएच-74 के चौड़ीकरण के दौरान भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कृषि भूमि को कागजों में गैर-कृषि दिखाकर मुआवजे की दर बढ़ाई गई। बैक-डेटेड आदेशों और राजस्व रिकॉर्ड में बाद में की गई एंट्रियों के जरिए करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान कराया गया। ईडी की जांच अभी जारी है और कुर्क संपत्तियों की पुष्टि के लिए मामला न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष भेजा जाएगा। दोष सिद्ध होने की स्थिति में ये संपत्तियां स्थायी रूप से जब्त की जा सकती हैं।



