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डूबते अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में फंसी 8 करोड़ की बैंक गारंटी, आबकारी विभाग में हड़कंप

एक तरफ है अर्बन कोऑपरेटिव बैंक का डूबता जहाज और दूसरी तरफ हैं परेशान 09 हजार ग्राहक, अब आबकारी विभाग भी सकते में

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून के अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में शराब कारोबारी संजय मल्होत्रा ‘गोलू’ की करीब 8 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी फंसने से प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। यह गारंटी आबकारी विभाग के समक्ष राजस्व सुरक्षा के तौर पर प्रस्तुत की गई थी, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की वसूली न होने की स्थिति में इसे भुनाया जा सके।

जानकारी के अनुसार, बैंक गारंटी कथित तौर पर कारोबारी की 5 करोड़ रुपये की एफडी के एवज में जारी की गई थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि एफडी और गारंटी प्रक्रिया में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई। क्या बैंक पर आरबीआई के 06 माह के प्रतिबंध की वजह मुश्किल हालात पैदा हो रहे हैं या बैंक गारंटी को लेकर वास्तव में फर्जीवाड़ा किया गया है। बैंक प्रबंधन की तरफ से या ठेकेदार की ओर से इस संदर्भ में स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

अर्बन कोऑपरेटिव बैंक घोटाले पर खातेदारों ने मीडिया से मुखातिब होकर पीड़ा बयां की थी।

जैसे ही आबकारी विभाग को इस संभावित अनियमितता की सूचना मिली, विभाग सतर्क हो गया। जिला आबकारी अधिकारी वीरेंद्र जोशी और अन्य अधिकारी बैंक पहुंचे और गारंटी की वैधता की जांच की। बैंक ने गारंटी जारी होने की पुष्टि तो की, लेकिन भुनाने (एन्कैशमेंट) को लेकर कोई संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं दे सका। इसके बाद विभाग ने बैंक को औपचारिक नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ताकि यह साफ हो सके कि वास्तव में बैंक गारंटी बनी है और सिर्फ प्रतिबंध के कारण इसे भुनाने में बाधा है।

आरबीआई की पाबंदी के बीच खाताधारकों को राहत की तैयारी
ऋण घोटाले और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लगाए गए छह माह के प्रतिबंध के बाद अब अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के खाताधारकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। जिन खातों में 5 लाख रुपये तक की जमा राशि है, वहां से निकासी की अनुमति जल्द दी जाएगी।

दूसरी तरफ 5 लाख रुपये से अधिक जमा वाले खातों में चिकित्सा, शिक्षा, कारोबार, ऋण अदायगी जैसी अनिवार्य जरूरतों के प्रमाण देने पर आंशिक निकासी संभव होगी। बैंक प्रबंधन के अनुसार, चेयरमैन मयंक ममगाईं और बोर्ड सदस्यों ने RBI अधिकारियों से मुलाकात कर खाताधारकों की गंभीर स्थिति से अवगत कराया, जिसके बाद यह सहमति बनी। हालांकि, बड़ी जमाओं से कितनी राशि निकाली जा सकेगी, इसकी सीमा अभी स्पष्ट नहीं की गई है।

डीआईसीजीसी के माध्यम से छोटे जमाकर्ताओं को सुरक्षा
बैंक सचिव बीरबल ने बताया कि Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) ने छोटे खाताधारकों को राहत देने का निर्णय लिया है। इसके लिए आवश्यक फार्म बैंक को मिल चुके हैं और अनुमान है कि 40–45 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये तक की जमा राशि वाले खातों से निकासी शुरू हो जाएगी।

बैंक के लगभग 9,000 खातों पर प्रतिबंध लगा है, जिनमें से 80% से अधिक खाते ऐसे हैं जिनकी जमा 5 लाख रुपये या उससे कम है। यानी बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं को इस व्यवस्था से राहत मिलने की संभावना है।

मर्जर की ओर बढ़ता बैंक, अल्मोड़ा बैंक से बातचीत
अर्बन कोऑपरेटिव बैंक देहरादून की वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 50–58 करोड़ रुपये की ऋण वसूली अभी बाकी है, जबकि खाताधारकों की कुल जमा राशि करीब 124 करोड़ रुपये है। सभी वित्तीय प्रयासों के बाद भी बैंक अधिकतम 105 करोड़ रुपये ही जुटा पाने की स्थिति में है।

इस परिस्थिति में दो ही रास्ते बचे हैं—या तो बैंक का परिसमापन (लिक्विडेशन) हो, या किसी सक्षम बैंक में उसका विलय (मर्जर) कराया जाए। खाताधारकों के हितों को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने मर्जर का रास्ता चुना है।
चेयरमैन मयंक ममगाईं के अनुसार, बैंक का विलय अल्मोड़ा अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में करने का प्रस्ताव दिया जा चुका है। आवश्यक दस्तावेज साझा किए गए हैं और प्रारंभिक स्तर पर अल्मोड़ा बैंक संतुष्ट नजर आ रहा है। इस प्रस्ताव की जानकारी RBI को भी दे दी गई है।

2013-14 के ऋण घोटाले पर अब एफआईआर की तैयारी
बैंक के संकट की जड़ें वर्ष 2013–14 के एक बड़े ऋण घोटाले से जुड़ी मानी जा रही हैं। उस दौरान करीब 24 व्यक्तियों को जेसीबी मशीन (बैक हो लोडर) के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण जारी किए गए। न तो आवश्यक प्रविष्टियां की गईं और न ही नियमों का पालन हुआ, जिससे ये सभी ऋण एनपीए बन गए और बैंक आर्थिक गर्त में चला गया।

बैंक सचिव बीरबल के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन सचिव आर.के. बंसल और प्रबंधक संजय गुप्ता को दोषी पाया गया था। आर.के. बंसल की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन वसूली के लिए उनकी विरासत से जुड़े उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाया जा रहा है। वहीं, तत्कालीन प्रबंधक संजय गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

निस्तारण की की तरफ जल्द बढ़ाने होंगे ठोस कदम
एक तरफ शराब ठेकेदार की करोड़ों की बैंक गारंटी फंसने से प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है, तो दूसरी ओर हजारों खाताधारकों की जमा पूंजी अटकी हुई है। मर्जर, डीआईसीजीसी राहत, आंशिक निकासी और कानूनी कार्रवाई—इन सभी कदमों के बीच अर्बन कोऑपरेटिव बैंक देहरादून इस समय अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद में खड़ा है, और आने वाले सप्ताह इसकी दिशा तय करने वाले होंगे।

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