Dehradun

दून के जड़ी-बूटी कारोबारी पर जीएसटी का छापा, फर्जी कारोबार से करोड़ों डकारने का खेल आया सामने

कारोबारी से एक करोड़ की वसूली की गई, जांच अभी गतिमान

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून में राज्य कर विभाग (GST) ने जड़ी-बूटी कारोबार से जुड़ी एक फर्म पर बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि फर्म केवल कागज़ों पर खरीद दिखाकर करोड़ों रुपये का टैक्स क्रेडिट हड़प रही थी, जबकि वास्तविक खरीद का कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं था।

राज्य कर आयुक्त सोनिका के निर्देश पर, संयुक्त आयुक्त अजय सिंह के मार्गदर्शन में आढ़त बाजार क्षेत्र स्थित फर्म पर छापा मारा गया। जांच टीम को प्रारंभिक जांच में ही संकेत मिल गए थे कि औषधीय उत्पादों के निर्माण के नाम पर जड़ी-बूटियों की फर्जी खरीद दर्शाई जा रही है और केवल बिलों के सहारे ITC क्लेम किया जा रहा है।

सिर्फ बिल, कोई माल नहीं
जांच में स्पष्ट हुआ कि फर्म ने कई सप्लायर्स से कागज़ी लेन-देन दिखाकर खरीद दर्शाई, जबकि ज़मीनी स्तर पर न तो माल की आवाजाही थी और न ही भौतिक स्टॉक का कोई प्रमाण। इस फर्जीवाड़े का मकसद केवल एक ही था
कि गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना है और टैक्स देनदारी को शून्य या न्यूनतम दिखाना है।

दबाव बढ़ा तो किया एक करोड़ जमा
जब विभाग को कर चोरी के ठोस सबूत मिले और दस्तावेजों की जांच शुरू हुई, तो कारोबारी ने दबाव में आकर करीब एक करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा कर दिए। उपायुक्त सुरेश कुमार ने बताया कि फर्म से बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक संकेत हैं कि कर चोरी की वास्तविक राशि इससे कहीं अधिक हो सकती है।

जांच का दायरा बढ़ा
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक फर्म तक सीमित नहीं रह सकता। फर्जी सप्लायर्स, बिलिंग नेटवर्क, बोगस फर्मों की चेन और ITC क्लेम करने वाली अन्य कंपनियां भी जांच के दायरे में लाई जा सकती हैं।

जांच टीम में शामिल अधिकारी
इस कार्रवाई में सहायक आयुक्त टीकाराम चन्याल, कृष्ण कुमार, भूपेंद्र, यतीश सेमवाल सहित कई अधिकारी शामिल रहे।

क्या कहता है यह केस
यह केस दिखाता है कि फर्जी ITC नेटवर्क अब संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा है। केवल बिलिंग के ज़रिये टैक्स चोरी का मॉडल तैयार किया जा रहा है और सप्लायर–डीलर–फर्म की पूरी चेन पर काम करने की रणनीति होनी चाहिए। क्योंकि, हर्बल और फार्मा सेक्टर में टैक्स फ्रॉड की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है।

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