संघ प्रमुख मोहन भागवत का उत्तराखंड दौरा, राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू, RSS का भव्य होगा स्थापना दिवस

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उल्टी गिनती शुरू मानी जा रही है। माना जा रहा है कि चुनाव इसी वर्ष के अंत में या वर्ष 2027 की शुरुआत में हो सकते हैं। ऐसे में संघ प्रमुख का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में संगठनात्मक मजबूती, संभावित दावेदारों के चयन और जनता के मूड को भांपने में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। चूंकि भारतीय जनता पार्टी और संघ के वैचारिक संबंध लंबे समय से रहे हैं, इसलिए इस दौरे को चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का हिस्सा बताया जा रहा है।

दरअसल, संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन नागपुर में हुई थी। वर्ष 2025 में 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विजयदशमी 2025 से विजयदशमी 2026 तक की अवधि को ‘संघ शताब्दी वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में देशभर में विभिन्न सामाजिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में 22 एवं 23 फरवरी 2026 को सरसंघचालक मोहन भागवत दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर रहेंगे। प्रवास के दौरान वे देहरादून स्थित भाऊराव देवरस कुंज, प्रान्त कार्यालय, तिलक रोड में ठहरेंगे।
22 फरवरी को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रमुख नागरिकों के साथ संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है।
23 फरवरी को उत्तराखंड के सेवानिवृत्त सैनिकों के साथ विशेष संवाद होगा।
संघ कार्यकर्ताओं द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों और पूर्व सैनिकों से संपर्क कर उन्हें आमंत्रित किया जा रहा है।
भले ही कार्यक्रमों को सामाजिक संवाद का स्वरूप दिया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र संगठनात्मक फीडबैक और जमीनी स्थिति का आकलन भी इस दौरे का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। उत्तराखंड जैसे सामरिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में पूर्व सैनिकों और प्रभावशाली नागरिकों के साथ संवाद को भी रणनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि संघ प्रमुख के इस दौरे के बाद प्रदेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे चुनावी समीकरणों पर कोई प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, उत्तराखंड की सियासत में अटकलों और कयासों का बाजार गर्म है।



