Uttarakhand

खड़ी चढ़ाई पार कर गांव पहुंचे डीएम प्रशांत आर्य, जमीनी सक्रियता से जीता ग्रामीणों का विश्वास

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम में सरकारी अमले को अपने करीब पाकर गदगद हुए ग्रामीण

Onkar Bahuguna, Uttarkashi: उत्तरकाशी के सरबड़ियार क्षेत्र के डिंगाड़ी गांव में शनिवार को आयोजित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार, प्रशासन चला गांव की ओर” अभियान के समापन शिविर में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने प्रशासन की संवेदनशील और प्रतिबद्ध कार्यशैली का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया।

करीब तीन किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय कर स्वयं गांव पहुंचना ही उनके जनकेंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार प्रशासन सचमुच उनके द्वार तक पहुंचा है।

अमूमन देखा जाता है कि कई आला अधिकारी सुदूरवर्ती गांवों में जाने से कतराते हैं—जहां न लग्जरी गाड़ियों के साथ प्रशासनिक काफिला सहज पहुंच पाता है, न सरकारी गेस्ट हाउस की सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। लेकिन पहाड़ जैसी दृढ़ सोच रखने वाले जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने इन धारणाओं को तोड़ते हुए साबित किया कि प्रशासन का असली दायित्व अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना है। पहाड़ियों का दर्द समझने और सरकार के प्रमुख अभियान “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” को साकार करने के उद्देश्य से वे स्वयं सुदूर गांव सरबड़ियार पहुंचे और जन से तंत्र को जोड़ने का सशक्त प्रयास किया।

16 में से 13 समस्याओं का मौके पर समाधान
शिविर में कुल 16 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 13 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। साथ ही मौके पर 8 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। ग्रामीणों की मांग पर डीएम ने आपदा से क्षतिग्रस्त मराड़ी पुल के एबेटमेंट एवं संपर्क मार्ग निर्माण के लिए तत्काल 8 लाख रुपये स्वीकृत किए और लोक निर्माण विभाग को शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। इस त्वरित निर्णय से ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला।

राशन कार्ड, आधार शिविर और सड़क प्रगति
राशन कार्ड संबंधी मांगों पर पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आठ गांवों के लिए संयुक्त आधार शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिससे ग्रामीणों को दूर-दराज न जाना पड़े। पीएमजीएसवाई अंतर्गत स्वीकृत सड़कों की डीपीआर शीघ्र केंद्र सरकार को भेजे जाने की जानकारी दी गई।

भूस्खलन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर संवेदनशील पहल
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के संयुक्त सर्वे के निर्देश दिए गए। विद्यालय में किचन व शौचालय निर्माण, मोतियाबिंद ऑपरेशन, ट्रैकिंग अनुमति और मोबाइल टॉवर सक्रिय करने जैसे मुद्दों पर भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की यह पहल केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रयास थी। उन्होंने यह संदेश दिया कि विकास और शासन केवल मुख्यालयों तक सीमित नहीं, बल्कि सुदूर पहाड़ियों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। उनके इस जमीनी जुड़ाव ने अभियान को वास्तविक अर्थों में जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।

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