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हल्द्वानी बनभूलपुरा केस में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: भूमि पर रहने का ‘अधिकार’ नहीं, लेकिन बेदखली फिलहाल रोक पर

50 हजार लोगों से जुड़ा मामला, 2024 में हिंसा में मारे गए थे 06 लोग, 300 पुलिस और नगर निगम कर्मी भी हुए थे घायल

Round The Watch News: हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे और राज्य सरकार की जमीन पर अतिक्रमण से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि वहां रह रहे लोग उस भूमि पर स्थायी रूप से रहने का अधिकार का दावा नहीं कर सकते। साथ ही कोर्ट ने पुनर्वास के लिए प्रशासन को रमजान के बाद 19 मार्च से शिविर लगाने और पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन प्रक्रिया आसान बनाने के निर्देश दिए।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि योग्य पाए गए परिवारों को 6 महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। हालांकि, अगली सुनवाई अप्रैल तक किसी भी परिवार को बेदखली का सामना नहीं करना पड़ेगा।

“लोग यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे लाइन कहां बिछेगी”: चीफ जस्टिस सूर्यकांत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि परियोजना के लिए जमीन अनिवार्य है, और प्रभावित लोग उसी स्थान पर पुनर्वास की शर्त नहीं रख सकते।

सीजेआई ने कहा, “जब बेहतर सुविधाओं वाली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है, तो मूल स्थान पर रहने की ज़िद क्यों? किसी भी रेलवे परियोजना के लिए दोनों तरफ भूमि की आवश्यकता होती है।” पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवार PMAY के तहत आवेदन करें और जिला मजिस्ट्रेट उनकी पात्रता तय करेंगे। अदालत ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा कि पुनर्वास के दौरान इन परिवारों की आजीविका पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

पुनर्वास शिविर 10 दिन चलेंगे, DM रहेंगे मौजूद
सुनवाई के बाद अधिवक्ता रऊफ रहीम ने बताया कि 20 मार्च से जिला प्रशासन की मौजूदगी में शिविर संचालित होंगे।
परिवार प्रमुखों को निवास अवधि, परिवार के सदस्यों, बिजली बिल, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का विवरण देना होगा।

जरूरत पड़ने पर सामाजिक कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहेंगे।
जस्टिस बागची: “यह अधिकार का नहीं, सहायता का मामला”
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि जमीन राज्य सरकार की है और उसके उपयोग का निर्णय राज्य करना चाहता है। उनके अनुसार अदालत की प्रारंभिक राय यही है कि यह मामला स्वामित्व के अधिकार से अधिक मानवीय राहत और पुनर्वास का है।

PMAY पर सुझाव, घर बनाकर देने का विकल्प भी देखें: CJI
सीजेआई ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि सरकार यह भी विचार कर सकती है कि PMAY के तहत भूमि अधिग्रहण कर प्रभावितों के लिए सीधे घर बनवाए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्थायी समाधान मिल सके।

केंद्र और रेलवे का पक्ष
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि रेलवे को 30.5 हेक्टेयर भूमि रियलाइन्मेंट सहित अन्य सुविधाओं के विस्तार के लिए चाहिए। रेलवे ने कहा कि वह पहले की अदालतों द्वारा निर्धारित एक्स-ग्रेशिया सहायता राशि का भुगतान करेगा।

अपीलकर्ताओं ने रेलवे की 2019 की पुनर्वास नीति और परियोजना क्षेत्र में पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि आज की कार्रवाई से समाधान की दिशा में एक कदम और बढ़ा है और अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना।

50 हजार लोगों की जिंदगी से जुड़ा मामला, सुरक्षा कड़ी
यह विवाद लगभग 5,000 परिवारों और लगभग 50,000 लोगों के जीवन से जुड़ा है। सुनवाई से पहले बनभूलपुरा और हल्द्वानी रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भारी सुरक्षा तैनात की गई। पुलिस और PAC की कंपनियों ने फ्लैग मार्च किया, खुफिया तंत्र को अलर्ट पर रखा गया और सभी आवागमन प्वाइंट्स पर निगरानी बढ़ाई गई। लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई।

पृष्ठभूमि: 17 साल पुराना विवाद
2007 — हाईकोर्ट का पहला आदेश
बनभूलपुरा व गफूरबस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने को हाईकोर्ट ने 2007 में आदेश दिए थे। प्रशासन 0.59 एकड़ भूमि खाली करा सका।
2013 — गौला नदी खनन मामले में अतिक्रमण का मुद्दा फिर उठा
गौला पुल और अवैध खनन पर दायर याचिका सुनवाई के दौरान रेलवे भूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा दोबारा सामने आया।
2016 — 10 सप्ताह में अतिक्रमण हटाने के आदेश
9 नवंबर 2016 को कोर्ट ने रेलवे को 10 सप्ताह में जमीन खाली कराने को कहा।
राज्य सरकार और अतिक्रमणकारियों ने जमीन को नजूल भूमि बताया, पर 2017 में कोर्ट ने यह दावा खारिज कर दिया।
2017 — मामला पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित लोगों को निर्देश दिया कि वे अपनी व्यक्तिगत प्रार्थनाएं हाईकोर्ट में जमा करें, लेकिन प्रगति सीमित रही।
2022 — हाईकोर्ट में नई याचिका
21 मार्च 2022 को रेलवे की विफलता का हवाला देते हुए एक और जनहित याचिका दायर हुई।
अतिक्रमणकारी अपना स्वामित्व साबित नहीं कर सके।
2023 — “50 हजार लोगों को रातों-रात बेघर नहीं किया जा सकता” — सुप्रीम कोर्ट
जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना पुनर्वास योजना के व्यापक बेदखली उचित नहीं है।
2024 — बनभूलपुरा हिंसा, 6 मौतें
8 फरवरी 2024 को अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़क गई। 6 लोगों की मौत हुई, 300 से अधिक पुलिस व निगम कर्मचारी घायल हुए और इलाके में कर्फ्यू लगाया गया।

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