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देहरादून में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई: सुनील राठी गैंग के दो सक्रिय सदस्य गिरफ्तार

बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे आरोपी, दो पिस्टल और सात कारतूस बरामद

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखण्ड एसटीएफ और देहरादून पुलिस की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुख्यात अपराधी सुनील राठी गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों के कब्जे से 02 अवैध .32 बोर पिस्टल और 07 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी देहरादून में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।

यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशों तथा एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के नेतृत्व में की गई। तकनीकी और मैनुअल इनपुट के आधार पर 26 फरवरी की देर रात थाना राजपुर क्षेत्र से भानू चौधरी (निवासी सहारनपुर) और पारस (निवासी मुजफ्फरनगर) को एक स्कॉर्पियो वाहन सहित दबोचा गया। दोनों के विरुद्ध थाना राजपुर में धारा 111(3) बीएनएस व 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मुख्तार अंसारी व संजीव जीवा गैंग से रहा है कनेक्शन
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी पारस पूर्व में माफिया मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा गैंग का शूटर रह चुका है। दोनों अपराधियों की मृत्यु के बाद वह सुनील राठी गैंग में शामिल हो गया। एसटीएफ के अनुसार पारस सुनील राठी के इशारे पर हरिद्वार और देहरादून की विवादित व बेशकीमती जमीनों में हस्तक्षेप कर उगाही कर रहा था।
मोबाइल फोन की जांच में पौड़ी जेल में बंद सुनील राठी से लगातार संपर्क के सबूत मिले हैं। यह भी सामने आया है कि आरोपी भानू के साथ पौड़ी जेल में मुलाकात के लिए जाता रहा है। जांच में हरिद्वार के एक विवादित प्रॉपर्टी डीलर का नाम भी प्रकाश में आया है, जो पूर्व में हत्या के मामले में जेल जा चुका है और राठी के संपर्क में था।
व्यापारी थे दहशत में, शिकायत को कोई तैयार नहीं
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार देहरादून और हरिद्वार के कुछ व्यापारी इन आरोपियों की उगाही से परेशान थे, लेकिन सुनील राठी के भय के कारण कोई भी सामने आकर शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। फिलहाल पुलिस यह खंगाल रही है कि इस नेटवर्क की जड़ें कहां-कहां तक फैली हैं और किन-किन लोगों की संलिप्तता है।
आरोपी पारस का आपराधिक इतिहास
पारस के खिलाफ मुजफ्फरनगर, शामली और देहरादून में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2012 से 2020 तक उसके खिलाफ 8 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।
पुलिस का कहना है कि राज्य में सक्रिय गैंगों और अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस गिरफ्तारी को उत्तराखण्ड में संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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