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रुद्रप्रयाग में होली में चिकन-मटन की जगह काकड़ ही खा गए, 14 लोगों को किया गिरफ्तार

प्रतिबंधित काकड़ (बार्किंग डियर) का शिकार करने और उसे खाने के आरोप में सख्त कार्रवाई

Round The Watch News: रुद्रप्रयाग जिले की बच्छणस्यूं पट्टी के क्वली गांव में कुछ लोगों पर होली का ऐसा खुमार चढ़ा कि उन्होंने चिकन-मटन की जगह प्रतिबंधित श्रेणी के वन्यजीव काकड़ का शिकार कर उसे खा भी लिया। काकड़ (भौंकने वाला हिरण) के अवैध शिकार और उसके मांस के सेवन के आरोप में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई होली के दिन की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

वन विभाग के अनुसार मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर टीम ने गांव में छापा मारा। सूचना मिली थी कि कुछ लोग होली के मौके पर जंगल से काकड़ का शिकार कर उसका मांस पका रहे हैं। इसके बाद वन क्षेत्राधिकारी संजय सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान शिकार में शामिल होने के आरोप में गांव के 14 लोगों को रात करीब आठ बजे गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों को गुरुवार को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद वन विभाग ने उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत रिपोर्ट तैयार की। विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) रजत सुमन ने बताया कि वन्यजीवों के अवैध शिकार को लेकर विभाग पूरी तरह सख्त है और इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है।

संरक्षित वन्यजीव है काकड़
काकड़, जिसे barking deer या भारतीय मुन्टजैक भी कहा जाता है, उत्तराखंड के जंगलों में पाया जाने वाला एक छोटा हिरण है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित प्रजातियों में आती है, जिसके शिकार या अवैध व्यापार पर प्रतिबंध है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार काकड़ सामान्यतः घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में अकेले या छोटे समूह में रहते हैं और खतरा महसूस होने पर कुत्ते जैसी आवाज निकालते हैं, इसी कारण इन्हें ‘भौंकने वाला हिरण’ कहा जाता है।

पहाड़ी क्षेत्रों में शिकार की घटनाएं चिंता का विषय
उत्तराखंड के कई दूरस्थ गांवों में त्योहारों या सामूहिक आयोजनों के दौरान कभी-कभी जंगली जानवरों के अवैध शिकार की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन्हें रोकने के लिए वन विभाग लगातार अभियान चला रहा है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीव संरक्षण कानून का पालन करें और किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अवैध शिकार केवल कानूनन अपराध ही नहीं, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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