केदारनाथ के प्रचार में 10.79 करोड़ का गड़बड़झाला, 12 ऐसे धारावाहिक बनाए, जो दिखाए ही नहीं गए
कैग ने पकड़ी त्रिवेंद्र सरकार में की गई बड़ी अनियमितता, कुंभ 2021 के कार्यों में भी बड़ा खेल

Rajkumar Dhiman, Dehradun: केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के क्रम में देश और दुनिया को नए केदारनाथ धाम के दर्शन कराने और प्रचार-प्रसार की दिशा में त्रिवेंद्र सरकार में 10.79 करोड़ रुपये के ऐसे काम किए गए, जिन्हें जनता तो नहीं देख पाई, मगर सरकारी धन ठिकाने लग गया। कैग ने न सिर्फ इस गड़बड़झाले को पकड़ा, बल्कि सरकारी तंत्र की मंशा पर गंभीर सवाल भी उठाए। इसके अलावा कैग ने मार्च 2022 तक की विभिन्न योजनाओं में 186 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी पकड़ी है। जिसमें कुंभ 2021 में कराए गए कार्य भी शामिल हैं। रिपोर्ट में पर्यटन, कौशल विकास, आपदा पुनर्निर्माण, कुंभ मेला प्रबंधन और विभिन्न विभागीय परियोजनाओं में अनियमित खर्च, अधूरी योजनाएं, गलत डीपीआर, फर्जी दावे और प्रशासनिक लापरवाही के कई मामले सामने आए हैं।
केदारनाथ विकास प्रचार परियोजना में 10.79 करोड़ पूरी तरह बेकार
वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए कम्युनिकेशन मीडिया प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। जांच में सामने आया कि परियोजना बिना उचित प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के शुरू की गई। निविदा और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इस परियोजना पर 10.79 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसका कोई प्रभावी परिणाम नहीं मिला। कैग ने इसे पूरी तरह निष्फल खर्च माना। यह कार्य कैलाश एंटरटेनमेंट प्रा लि को दिए गए 12 धारावाहिकों से संबंधित था।
कैग जांच में पाया गया कि अप्रैल 2015 धारावाहिक संबंधी कार्य दिए गए थे। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने धारावाहिक बनाए जाने के बाद वर्ष 2017 में सूचना एवं लोक संपर्क विभाग उत्तराखंड को वर्ष 2017 में उसकी मास्टर कॉपी दे दी थी। वहीं, जनवरी 2020 में फर्म को 10.79 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि धारावाहिक का प्रसारण किया ही नहीं जा सका था। यह स्थिति मई 2023 तक यथावत रही।
ठेकेदार विवाद और अधूरी परियोजना से 2.98 करोड़ गए बेकार
लेखा परीक्षा में पाया गया कि परिवहन विभाग की लापरवाही और कमजोर वित्तीय प्रबंधन के कारण एक परियोजना पर किया गया 2.98 करोड़ का खर्च पूरी तरह निष्फल हो गया। कार्य ठेकेदार को दिया गया, लेकिन बाद में अनुबंध समाप्त कर दिया गया। अनुबंध समाप्त होने के 69 महीने बाद भी विभाग और ठेकेदार के बीच विवाद का समाधान नहीं हुआ।
आपदा पुनर्निर्माण परियोजना में 75.81 करोड़ का दुरुपयोग
उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट-एडिशनल फाइनेंसिंग (यूडीआरपी-एएफ) की आडिट में कई गंभीर कमियां सामने आईं। पुल, सड़क, नदी तट संरक्षण और एसडीआरएफ प्रशिक्षण केंद्र जैसे 23 स्वीकृत कार्य शुरू ही नहीं किए गए। इसके बावजूद 75.81 करोड़ की राशि योजना के दायरे से बाहर के कार्यों पर खर्च कर दी गई। कुल 74 कार्यों में से 43 कार्यों की लागत बढ़ाकर दिखाई गई। कई जगह गलत डिजाइन, अनावश्यक डीपीआर, अनुचित निर्माण तकनीक अपनाई गई। सस्पेंशन ब्रिज की जगह स्टील ट्रस ब्रिज बनाए गए, जिससे लागत बढ़ी।
कौशल विकास योजना में फर्जी दावे और करोड़ों की गड़बड़ी
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2.0 के कार्यान्वयन में भी गंभीर खामियां सामने आईं और प्रशिक्षण में भारी विफलता उजागर हुई।
रिपोर्ट में कहा गया कि 130 बैचों के 90 प्रतिशत से अधिक प्रशिक्षु परीक्षा में फेल या अनुत्तीर्ण हो गए। इसके बावजूद प्रशिक्षण भागीदारों से 1.61 करोड़ की राशि वसूल नहीं की गई। वहीं, प्रशिक्षुओं को मिलने वाले लाभ जैसे प्रमाणित युवाओं को 500 रुपये का पुरस्कार नहीं दिया गया और महिला प्रशिक्षुओं को 1.97 करोड़ रुपये की यात्रा सहायता नहीं दी गई। 2.23 करोड़ रुपये का प्लेसमेंट सपोर्ट, 3.79 करोड़ रुपये के फर्जी प्लेसमेंट के मामले सामने आए। ऑडिट में पाया गया कि कई प्रशिक्षण संस्थानों ने फर्जी बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज लगाए। कुछ कंपनियां, जहां नौकरी दिखायी गई, असल में मौजूद ही नहीं थीं।
खराब प्रदर्शन के बावजूद भुगतान
98 प्रशिक्षण भागीदारों में से 31 ने एक भी उम्मीदवार को नौकरी नहीं दिलाई। फिर भी उन्हें 3.89 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह सब रिकार्ड में हेरफेर कर किया गया। एमआइएस डेटा में यह भी पाया गया कि 511 असफल उम्मीदवारों को भी नौकरी लगा हुआ दिखाया गया। कैग ने इसे निगरानी की गंभीर विफलता बताया।
पर्यटन योजनाओं में गलत साइट चयन से करोड़ों का नुकसान
प्रसाद और स्वदेश दर्शन योजनाओं के तहत पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास की जांच में भी कई कमियां सामने आईं। कुल 68 में से 10 और 71 में से 22 परियोजना घटक (50.33 करोड़ लागत के कार्य) या तो रद्द हुए या बदल दिए गए। दूसरी तरफ पांच परियोजनाओं पर 3.94 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन गलत स्थान चयन के कारण वे बेकार हो गईं।
निर्माण के बाद परियोजनाओं का उपयोग ही नहीं
हेरिटेज सर्किट में 14.41 करोड़ की 16 परियोजनाएं, बदरीनाथ-केदारनाथ परियोजना में 8.94 करोड़ की 10 परियोजनाएं निर्माण के 30 से 64 महीने बाद तक भी उपयोग में नहीं लाई गईं। वहीं, 4.88 करोड़ से बने पांच इंटरप्रिटेशन सेंटर
पर निरीक्षण के दौरान ताले लगे मिले। मार्च 2022 तक निगरानी समिति, संचालन और रखरखाव योजना भी नहीं बनाई गई थी।
बिना टेंडर के सलाहकार नियुक्ति और 8.06 करोड़ का अनियमित खर्च
शहरी विकास विभाग ने नियमों की अनदेखी करते हुए बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए सलाहकार की नियुक्ति कर दी। इसके लिए 8.06 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा विभिन्न खरीद में गड़बड़ी से 75.49 लाख का अतिरिक्त खर्च किया गया। क्योंकि, खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी।
हरिद्वार कुंभ 2021 में भी सामने आई अनियमितताएं
हरिद्वार कुंभ मेला 2021 की व्यवस्थाओं की जांच में भी कई अनियमितताएं मिलीं। 13 परियोजनाएं रद्द की गईं, मगर इन परियोजनाओं के लिए जारी 36.99 करोड़ वापस सरकार को नहीं लौटाए गए। इसके साथ ही कोविड जांच लैब चयन में नियमों की अनदेखी, बिना अनुमति अतिरिक्त कार्य, कार्यों को बांटकर नियमों से बचने की कोशिश, स्टील की कम प्राप्ति और अस्थायी सड़कों के निर्माण में 5.52 करोड़ रुपये की अनावश्यक लागत वृद्धि को भी इंगित किया गया है। हालांकि, कैग ने पुलिस के एआई आधारित भीड़ प्रबंधन सिस्टम की सराहना भी की।
कैग की प्रमुख सिफारिशें
-गलत डीपीआर और अतिरिक्त भुगतान के लिए जिम्मेदारी तय की जाए
-प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के फर्जी दावों की जांच हो
-परियोजनाओं के लिए सही साइट चयन और डेटा आधारित योजना बनाई जाए
-निर्माण के बाद ऑपरेशन और मेंटेनेंस व्यवस्था अनिवार्य की जाए
-खरीद और ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जाए



