देश के कई शहरों में रजिस्टर्ड बिल्डर पर दून में शिकंजा, सरकार को चूना लगाने में फंसे
स्टेट जीएसटी की टीम ने छापेमारी कर वसूले 48 लाख, फर्जी खरीद से टैक्स चोरी करने का मामला

Rajkumar Dhiman, Dehradun: राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) ने कर चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए शहर के एक बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच में सामने आया कि बिल्डर ने फर्जी फर्मों के जरिए माल की खरीद दिखाकर अपनी कर देनदारी कम करने की कोशिश की। राजपुर रोड स्थित बिल्डर के कार्यालय पर विभागीय टीम ने छापा मारा। यह कार्रवाई आयुक्त राज्य कर सोनिका के निर्देश और संयुक्त आयुक्त, देहरादून संभाग के मार्गदर्शन में गठित टीम द्वारा की गई। करीब तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई में जीएसटी से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की गई। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बिल्डर कई शहरों/राज्य में पंजीकृत है और इसी कारण आसानी से बाहर की फर्जी फर्मों से सिर्फ बिलों के आधार पर खरीद दर्शाई गई।
जांच के दौरान पता चला कि बिल्डर ने जिन बाहरी फर्मों से खरीद दर्शाई थी, उनमें से कई या तो बंद हो चुकी थीं या उनका जीएसटी पंजीकरण पहले ही रद्द हो चुका था। इससे स्पष्ट हुआ कि फर्जी खरीद के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत लाभ लेकर कर चोरी की गई।
कार्रवाई के दौरान टीम को कर चोरी के ठोस प्रमाण मिले। इसके बाद बिल्डर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए तत्काल 48 लाख रुपये जमा करा दिए। हालांकि, विभाग का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआती राशि है और जांच आगे बढ़ने पर कर चोरी का आंकड़ा और बढ़ सकता है। जांच दल के नेतृत्व कर रहे उपायुक्त विजय कुमार ने बताया कि बिल्डर की वित्तीय गतिविधियों और विभिन्न प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद वास्तविक कर देनदारी तय की जाएगी।
विभाग ने संकेत दिए हैं कि शहर के अन्य बिल्डर भी निगरानी में हैं और आने वाले समय में उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। इस कार्रवाई में उपायुक्त योगेश मिश्रा, सहायक आयुक्त अवनीश पांडे, सहायक आयुक्त दीपक सेमवाल और राज्य कर अधिकारी गजेंद्र भंडारी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
आयुक्त राज्य कर सोनिका ने स्पष्ट किया कि कर चोरी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी कारोबारियों से अपील की है कि वे नियमों के अनुसार कर का भुगतान करें, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।



