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उत्तराखंड के जिला सहकारी बैंकों में 1200 करोड़ की गड़बड़ी, आयकर विभाग की जांच में खुलासा

कोटद्वार, उत्तरकाशी और काशीपुर के बैंकों ने आयकर की आंखों में झोंकी धूल, खातेदारों पर भी शिकंजा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड के जिला सहकारी बैंक एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। आयकर विभाग की हालिया जांच में तीन बैंकों में करीब 1200 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया है, जिससे बैंकिंग व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित बैंकों ने बड़ी मात्रा में हुए लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी। नियमों के मुताबिक, बैंकों को हर बड़े और असामान्य ट्रांजेक्शन की रिपोर्ट देना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इस प्रक्रिया की अनदेखी की गई।

800 करोड़ के लेनदेन की जानकारी छिपाई और 400 करोड़ में पैन दर्ज नहीं
सूत्रों के अनुसार, करीब 800 करोड़ रुपये के लेनदेन को विभाग से पूरी तरह छिपाया गया। वहीं, 400 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन में पैन नंबर तक दर्ज नहीं किए गए। इससे खाताधारकों को अपने आयकर रिटर्न में इन रकमों को दिखाने से बचने का मौका मिला।

आयकर विभाग की छापेमारी में खुलासा
आयकर विभाग की इंटेलिजेंस और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग ने उत्तरकाशी, कोटद्वार (पौड़ी) और काशीपुर स्थित जिला सहकारी बैंकों में छापेमारी की थी। इसी कार्रवाई के दौरान अनियमितताओं की परतें खुलीं। विभाग ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंप दी है।

बैंकों पर जुर्माने की तैयारी
विभाग अब संबंधित बैंकों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। शुरुआती तौर पर प्रत्येक बैंक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, जिन दिनों तक लेनदेन की जानकारी छिपाई गई, उस अवधि के लिए प्रतिदिन 500 से 1000 रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाएगा।

खाताधारकों पर भी शिकंजा
सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि ऐसे खाताधारक भी जांच के दायरे में हैं, जिन्होंने इन लेनदेन को अपने आयकर रिटर्न में शामिल नहीं किया। विभाग अब उनके रिटर्न की गहन जांच करेगा और गड़बड़ी पाए जाने पर टैक्स, ब्याज और पेनल्टी की वसूली करेगा।

हरिद्वार बैंक की जांच जारी, बड़े खुलासे के संकेत
इसी कड़ी में आयकर विभाग की टीम हरिद्वार (रुड़की मुख्यालय) स्थित जिला सहकारी बैंक की भी जांच कर रही है। शुरुआती संकेतों के अनुसार, यहां भी बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता सामने आ सकती है।

सहकारी बैंकों की पारदर्शिता पर सवालिया निशान
यह मामला न सिर्फ सहकारी बैंकों की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि वित्तीय निगरानी तंत्र की कमजोरियों को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे संभव हैं।

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