मोहम्मद दीपक को नहीं मिली हाई कोर्ट से राहत, जांच में सहयोग के आदेश
दीपक को सोशल मीडिया पर अनावश्यक सक्रिय न रहने की भी दी गई हिदायत

Round The Watch News: कोटद्वार के चर्चित विवाद मामले में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कुमार को कोई राहत देने से साफ इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद याचिका को निस्तारित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता पुलिस जांच में पूरा सहयोग करें और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूरी बनाए रखें, ताकि जांच प्रभावित न हो।
कोर्ट में क्या हुआ
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के पक्ष ने दलील दी कि उनकी ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे पर पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की, बल्कि अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। यह भी कहा गया कि घटना में शामिल लोगों के नाम बताने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई, जबकि वह खुद भीड़ को शांत कराने गए थे और उल्टा उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
वहीं, सरकार की ओर से पेश पक्ष ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि घटना के समय याचिकाकर्ता मौके पर मौजूद थे और भीड़ के साथ धक्का-मुक्की करते हुए उनका वीडियो सामने आया है। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें समेत 22 लोगों की पहचान कर मुकदमा दर्ज किया है, जिसकी जांच जारी है। अब तक इस पूरे प्रकरण में 05 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
क्या है पूरा मामला
कोटद्वार में वायरल एक वीडियो से यह मामला चर्चा में आया था। वीडियो में दीपक कुमार एक मुस्लिम व्यक्ति की दुकान का नाम बदलने को लेकर की जा रही जोर जबरदस्ती के विरोध में सवाल उठाते नजर आए और खुद को “मोहम्मद दीपक” बताया। यह वीडियो तेजी से इंटरनेट मीडिया पर फैल गया, जिसके बाद उन्हें समर्थन मिलने लगा और कथित तौर पर लोगों से छोटी-छोटी आर्थिक मदद भी मिलने लगी।
हालांकि, इसके बाद 28 जनवरी को दीपक और उनके सहयोगी के खिलाफ दुर्व्यवहार, मोबाइल छीनने और आपराधिक धमकी जैसे आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया। इसी के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर केस रद्द करने, परिवार की सुरक्षा और संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि इस स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने और सोशल मीडिया से दूर रहने की हिदायत देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।



