उत्तराखंड में स्कूल बस और वैन का किराया तय, थमेगी मनमानी, मगर असमंजस बरकरार
राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश के क्रम में तय किया गया किराया

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में स्कूली छात्रों के परिवहन शुल्क को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति अब खत्म हो गई है। राज्य परिवहन प्राधिकरण ने एक अहम बैठक में स्कूल बस, वैन, टैक्सी और मैक्सी कैब के लिए मासिक परिवहन शुल्क निर्धारित कर दिया है। यह निर्णय परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह फैसला नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। जिसमें बस का न्यूनतम किराया 2200 और अधिकतम 3700 रुपये है, जबकि वैन का न्यूनतम किराया 2100 और अधिकतम 3500 रुपये प्रति छात्र/छात्रा तय किया गया है।
हालांकि, इस किराए में प्रति 10 किलोमीटर की रेंज पर किराया दरें तय की गई हैं। इसे प्रति पांच किमी के हिसाब से किए जाने को अधिक औचित्यपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, 10 किमी की रेंज में अगले 10 किमी शुरुआत 11 की जगह 10 से ही की जा रही है। यही गणना प्रत्येक 10 किमी की रेंज में की जा रही है। ऐसे में किराए की दर को लेकर असमंजस और विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
इस तरह उठाए गए कदम
हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद एक समिति गठित की गई थी, जिसने स्कूलों में चलने वाले वाहनों के खर्च का विस्तृत अध्ययन किया। इसमें वाहन की कीमत और किस्त, चालक और परिचालक का वेतन, ईंधन खर्च, बीमा और परमिट शुल्क, मेंटेनेंस और अन्य खर्च का आकलन किया गया।
इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए परिवहन शुल्क तय किया गया है, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े और वाहन संचालकों को भी उचित भुगतान मिल सके।
स्कूल बस के लिए तय मासिक शुल्क (प्रति छात्र)
1 से 10 किमी: ₹2200
10 से 20 किमी: ₹2700
20 से 30 किमी: ₹3200
30 किमी से अधिक: ₹3700
स्कूल वैन/टैक्सी/मैक्सी कैब के लिए मासिक शुल्क (प्रति छात्र)
1 से 5 किमी: ₹2100
5 से 10 किमी: ₹2500
10 से 20 किमी: ₹3000
20 किमी से अधिक: ₹3500
क्या बदलेगा इस फैसले से? प्राधिकरण का दावा
-अब स्कूल मनमाने तरीके से परिवहन शुल्क नहीं बढ़ा सकेंगे
-अभिभावकों को तय और पारदर्शी दरों पर सेवा मिलेगी
-परिवहन सेवाओं में एकरूपता आएगी
-विवाद और शिकायतों में कमी आने की उम्मीद



