उत्तराखंड में 76 युवक-युवतियों के सामने बिना शादी खुद को विवाहित दिखाने का विकल्प
उत्तराखंड जनगणना: लिव-इन कपल्स को ‘विवाहित’ मानने का विकल्प, 10 अप्रैल से स्वगणना शुरू

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार प्रक्रिया कई मायनों में अलग और आधुनिक होगी, क्योंकि पहली बार लोगों को डिजिटल स्वगणना (Self Enumeration) का विकल्प दिया जा रहा है। खास बात यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल्स को भी जनगणना में अपनी स्थिति खुद तय करने का अधिकार मिलेगा।
लिव-इन कपल्स के लिए बड़ा बदलाव
राज्य में लागू के बाद अब तक 76 लिव-इन कपल्स का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जनगणना में इन कपल्स को एक अहम विकल्प दिया गया है कि अगर कपल अपने रिश्ते को स्थिर मानता है या भविष्य में शादी की योजना रखता है, तो वह खुद को ‘विवाहित’ श्रेणी में दर्ज कर सकता है। यह पूरी प्रक्रिया स्व-घोषणा (Self Declaration) पर आधारित होगी, यानी किसी बाहरी प्रमाण की जरूरत नहीं होगी। 76 की यह संख्या इसलिए दी गई है, क्योंकि वर्तमान में यूसीसी के तहत इतने ही जोड़ों ने लिव-इन रिलेशनशिप में पंजीकरण कराया है।
कब और कैसे होगी जनगणना?
– स्वगणना (Self Enumeration): 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026
– मकान सूचीकरण व गणना: 25 अप्रैल से 24 मई 2026
-इस दौरान लोग खुद ऑनलाइन डेटा भर सकते हैं या फिर एन्यूमरेटर घर आकर जानकारी दर्ज करेगा।
-दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति की अपनी दी गई जानकारी ही अंतिम मानी जाएगी।
किराएदारों और परिवारों के लिए क्या नियम?
जनगणना में उन लोगों को भी शामिल किया जाएगा जो किराए के मकानों में रहते हैं या अस्थायी रूप से किसी स्थान पर रह रहे हैं। हर व्यक्ति को उसी स्थान पर गिना जाएगा, जहां वह जनगणना के समय रह रहा है। इससे शहरों में रहने वाले किराएदारों और प्रवासी लोगों का सही डेटा मिल सकेगा।
अधिकारियों की तैयारी पूरी
जनगणना कार्य निदेशक ईवा श्रीवास्तव के अनुसार जनगणना को सफल बनाने के लिए हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रगणक (Enumerators) और पर्यवेक्षकों की तैयारी अंतिम चरण में है। पूरे राज्य में सैकड़ों बैच में प्रशिक्षण आयोजित किए गए हैं। उद्देश्य है कि डिजिटल और पारदर्शी तरीके से डेटा संग्रह किया जा सके।
क्यों खास है यह जनगणना?
– पहली बार डिजिटल और स्वगणना आधारित प्रक्रिया
– लिव-इन कपल्स को स्वतंत्र पहचान चुनने का अधिकार
– शहरी और किराएदार आबादी का अधिक सटीक डेटा
सामाजिक बदलावों को स्वीकार्यता
उत्तराखंड की यह जनगणना सामाजिक बदलावों को स्वीकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। खासकर लिव-इन कपल्स को ‘विवाहित’ मानने का विकल्प देना यह दिखाता है कि सिस्टम अब व्यक्तिगत जीवन की वास्तविकताओं को मान्यता देने की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।



