उत्तराखंड एसटीएफ ने करोड़ों की ठगी करने वाले अरवाज को गाजियाबाद से दबोचा
श्रीनगर के व्यक्ति से 1.31 करोड़ ठगने के मामले में एक्शन, पंजाब पुलिस के रिटायर्ड अफसर से ठगे जा चुके थे 08 करोड़

Rajkumar Dhiman, Uttarakhand: उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साइबर क्राइम टीम ने निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले शातिर साइबर अपराधी को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के अपराध मुक्त उत्तराखण्ड के मिशन के तहत पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड दीपम सेठ के दिशा-निर्देशन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह के नेतृत्व में की गई, जिनके निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है।
मामला पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर निवासी एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को रजत वर्मा और मीना भट्ट बताते हुए उसे एक लिंक के माध्यम से “71 Wealth Enhancement” नामक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ लिया। इसके बाद उसे रोजाना 5 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाने का झांसा दिया गया।
कथित मीना भट्ट ने रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर लिंक https://app.dbscoopreation.com भेजकर “Internal Equity Account” में रजिस्ट्रेशन कराया और अलग-अलग बैंक खातों व UPI के माध्यम से निवेश कराने के नाम पर उससे कुल 1,31,76,000 रुपये (एक करोड़ इकतीस लाख छिहत्तर हजार) की ठगी कर ली गई। कुछ समय बाद जब उसे धोखाधड़ी का एहसास हुआ तो उसने शिकायत दर्ज कराई, जिस पर साइबर क्राइम थाना देहरादून में मु.अ.सं. 62/2025 धारा 318(4), 61(2) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए तकनीकी जांच शुरू की। घटना में प्रयुक्त बैंक खातों, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप डाटा और मेटा कंपनी से पत्राचार कर महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई। विश्लेषण के दौरान सामने आया कि “DSB” नामक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संगठित तरीके से लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा था। इसी नेटवर्क के जरिए पहले पंजाब पुलिस के एक रिटायर्ड अधिकारी से भी लगभग 8 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी, और इस घटना से आहत होकर उस अधिकारी ने खुद को गोली मार ली थी।
जांच में एसटीएफ टीम ने मुख्य अभियुक्त की पहचान अरवाज सैफी पुत्र मोहम्मद सलीम निवासी C-66, DLF Colony, दिलशाद गार्डन, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), उम्र 31 वर्ष के रूप में की। आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी इन्वेस्टमेंट ग्रुप बनाकर लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देता था। उसके खातों में इस प्रकरण से संबंधित लगभग 10 लाख रुपये जमा पाए गए, जबकि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि महज दो महीनों में उसके बैंक खातों से करीब 2 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। इसके अलावा संबंधित बैंक खाते के खिलाफ उत्तराखंड सहित देश के 9 राज्यों में शिकायतें दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जिसके लिए अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क किया जा रहा है।
एसटीएफ टीम ने अभियुक्त को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया और उसके कब्जे से एक वीवो मोबाइल फोन तथा दो सिम कार्ड बरामद किए, जिनका इस्तेमाल इस साइबर अपराध में किया जा रहा था। गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक अनिल कुमार, उप निरीक्षक दिनेश पंवार और कांस्टेबल सोहन बडोनी शामिल रहे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने इस मामले को लेकर जनता से महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम का कोई भी कानूनी प्रावधान नहीं है और कोई भी एजेंसी जैसे CBI, ED, मुंबई क्राइम ब्रांच या साइबर क्राइम व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस जारी नहीं करती। उन्होंने लोगों को चेताया कि किसी भी अनजान लिंक, फर्जी निवेश योजना, पैसे दोगुना करने के ऑफर या संदिग्ध कॉल-मैसेज के झांसे में न आएं। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
यह पूरा मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि लालच में आकर निवेश करने की जल्दबाजी लोगों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और किसी भी निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल ही साइबर अपराध से बचने का सबसे कारगर उपाय है।



