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सचिवालय में कानून, न्याय और संविधान में योगदान पर गहन विमर्श, अंबेडकर को बताया राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड सचिवालय में किया गया विचार मंथन, समतामूलक समाज निर्माण का संदेश दिया

Rajkumar Dhiman, Dehradun: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार को उत्तराखंड सचिवालय में श्रद्धा, सम्मान और वैचारिक विमर्श का आयोजन किया गया। उत्तराखंड सचिवालय अनुसूचित जाति एवं जनजाति समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बाबा साहेब की प्रतिमा और भगवान बुद्ध की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

सोमवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ अपर सचिव समाज कल्याण प्रकाश चंद्र आर्य ने किया। साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में विक्रम सिंह यादव, दीपक जोशी, पूर्व अध्यक्ष सचिवालय संघ, सुनील कुमार लाखेड़ा अध्यक्ष सचिवालय संघ ने भूमिका अदा की, जबकि उनकी कार्यकारिणी के सदस्य भी मौजूद रहे। इस अवसर पर डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने उन्हें केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि कानूनविद, अर्थशास्त्री, सामाजिक सुधारक और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रखर प्रवक्ता के रूप में याद किया।

अगले वर्ष राष्ट्रीय पर्व की तर्ज पर भव्य आयोजन का आह्वान
पूर्व अध्यक्ष दीपक जोशी ने कार्यक्रम को समतामूलक समाज के निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि बाबा साहेब के विचार राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और भाईचारे को मजबूत करते हैं। उन्होंने अगले वर्ष 14 अप्रैल को 26 जनवरी और 15 अगस्त की तरह राष्ट्रीय पर्व के रूप में भव्य स्तर पर मनाने का आह्वान किया। साथ ही सचिवालय परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा का शीघ्र अनावरण कराने का आश्वासन भी दिया।

सचिवालय के सभी सभागारों में लगेगी बाबा साहेब की तस्वीर
कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया कि सचिवालय संघ की ओर से सभी सभागारों और अनुभागों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगाई जाएगी, ताकि उनके विचार और प्रेरणा सदैव कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच बनी रहे।

कानून, न्याय और संविधान में योगदान पर चर्चा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में डॉ. अंबेडकर के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। कमल कुमार ने कहा कि स्वतंत्र भारत की न्यायिक और संवैधानिक संरचना को मजबूत आधार देने में बाबा साहेब की भूमिका ऐतिहासिक रही। संविधान सभा में दिए गए उनके विचारों को आज भी लोकतंत्र की आत्मा माना जाता है।

अर्थशास्त्री के रूप में बाबा साहेब की दूरदृष्टि
कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर के अर्थशास्त्री रूप पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ता के रूप में ऋचा ने बताया कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी करने वाले डॉ. अंबेडकर ने अपनी प्रसिद्ध शोध कृति “The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution” के माध्यम से भारतीय मुद्रा व्यवस्था पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया था। यह भी रेखांकित किया गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गठन के वैचारिक आधार में उनके आर्थिक चिंतन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

सामाजिक उद्धारक और समता के प्रतीक
वक्ताओं ने बाबा साहेब को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान का सबसे बड़ा प्रतीक बताते हुए कहा कि उन्होंने समाज के वंचित और शोषित वर्गों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके विचार स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित समाज के निर्माण की दिशा में आज भी पथप्रदर्शक हैं।

‘Annihilation of Caste’ और लोकतंत्र की व्याख्या
कार्यक्रम में विनय कुमार आर्य ने डॉ. अंबेडकर के प्रसिद्ध विचार “मेरा आदर्श स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे पर आधारित समाज होगा, जो लोकतंत्र का ही दूसरा नाम है।” की विस्तृत व्याख्या की। साथ ही उनकी चर्चित कृति ‘Annihilation of Caste’ के सामाजिक और वैचारिक महत्व पर भी चर्चा हुई।

सामाजिक लोकतंत्र पर जोर
वक्ता वर्षा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल राजनीतिक लोकतंत्र पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना भी उतनी ही आवश्यक है। इस संदर्भ में डॉ. अंबेडकर के संविधान सभा में 25 नवंबर 1949 को दिए गए ऐतिहासिक वक्तव्य का उल्लेख किया गया। “बंधुत्व के बिना समानता और स्वतंत्रता का महत्व रंग-रोगन से अधिक कुछ नहीं होगा।” इस विचार को आज के सामाजिक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक बताया गया।

विरोधाभासी जीवन की चेतावनी पर चर्चा
कार्यक्रम में बाबा साहेब के संविधान सभा के ऐतिहासिक कथन “26 जनवरी 1950 को हम एक विरोधाभासी जीवन में प्रवेश करेंगे।” पर चिरंजी लाल ने गंभीर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि यह चेतावनी आज भी समाज और लोकतंत्र के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामाजिक असमानता और आर्थिक विषमता अब भी चुनौती बनी हुई है। इस अवसर पर प्रमिला टम्टा, निधि अरोड़ा आदि में भी विचार रखे।

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