एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में 12 सीटें रद्द, दून में 02 और गिरफ्तार, ऊधमसिंह नगर में आरोपियों की संख्या बढ़कर 34
देहरादून में अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार, नीट-यूजी की अब तक राज्य कोटे की कुल 15 सीटों का आवंटन निरस्त

Rajkumar Dhiman, Dehradun: नीट-यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस दाखिले के मामले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई हुई। देहरादून पुलिस की विशेष जांच दल (एसआइटी) ने संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार किया। दोनों पर 03 अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज, आधार कार्ड, मूल निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाकर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने में सहयोग करने का आरोप है। इसी दिन एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर 12 और अभ्यर्थियों का एमबीबीएस सीट आवंटन निरस्त कर दिया। इससे पहले तीन सीटें निरस्त हो चुकी हैं। इस तरह अब तक 15 सीटों का आवंटन रद हो चुका है।
03 अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज बनवाने का आरोप
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार संजय कुमार और गिरीश सिंह एक-दूसरे के पुराने परिचित हैं और वर्ष 2007 से एक-दूसरे को जानते हैं। जांच में सामने आया कि दोनों ने स्वाति, परी और खुशी के कूटरचित दस्तावेज, आधार कार्ड, मूल निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने में सहयोग किया। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तीनों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने में मदद की गई। इसके एवज में दोनों ने अनुचित धनराशि प्राप्त की।
मामले की शुरुआत 13 सितंबर को थाना रायपुर और थाना क्लेमेनटाउन में दर्ज मुकदमों से हुई। ‘अपणी सरकार’ पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनाने के लिए किए गए आवेदनों की जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। इसके बाद रायपुर में मुकदमा अपराध संख्या 380/26 और क्लेमेनटाउन में मुकदमा अपराध संख्या 86/26 दर्ज किया गया। यह कार्रवाई प्रदीप बहुगुणा की प्रारंभिक शिकायत के क्रम में शुरू हो पाई।
गलत पते से खुली फर्जीवाड़े की परत
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआइटी गठित की। टीम ने प्रकरण से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए और संबंधित शिक्षण संस्थानों में जाकर रिकॉर्ड की जांच की। जांच में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज कई पते गलत पाए गए।
शिक्षण संस्थानों से मिले रिकॉर्ड के आधार पर अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संजय कुमार और गिरीश सिंह की भूमिका सामने आई। पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
पहले तीन आरोपित भी गिरफ्तार
संजय कुमार और गिरीश सिंह से पहले एसआइटी रुपेश पंडित, अरविंद कुमार और धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर चुकी है। इस तरह देहरादून के दोनों मुकदमों में अब तक पांच आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
पुलिस की जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, प्रमाणपत्र बनवाने और उनके आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने की पूरी कड़ी खंगाली जा रही है। एसआइटी प्रकरण से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
03 के बाद अब 12 और अभ्यर्थियों की सीटें निरस्त
इधर, एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद 12 और अभ्यर्थियों का सीट आवंटन निरस्त कर दिया। ये सभी मामले ऊधमसिंह नगर जिले से संबंधित हैं। इन अभ्यर्थियों ने स्थायी निवास, जाति और अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीट हासिल की थी।
विश्वविद्यालय ने नीट-यूजी काउंसलिंग से जुड़े 778 प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए जिलों को भेजे थे। जिला स्तर से प्राप्त रिपोर्ट में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई। निरस्त सीटें हल्द्वानी, श्रीनगर, हरिद्वार, अल्मोड़ा और देहरादून के मेडिकल कॉलेजों में आवंटित थीं। इनमें 10 अभ्यर्थी दाखिला ले चुके थे, एक ने दाखिला नहीं लिया था और एक अभ्यर्थी दाखिले के बाद सीट छोड़ चुकी थी। निरस्त सीटों को आगे की काउंसलिंग के लिए रिक्त माना जाएगा।
निरस्त सीटों वाले अभ्यर्थियों में अनुराग भोजवाल, दीक्षा कुमारी, अलसामी फाजिल, चित्रा, प्रियांशु गुप्ता, वैष्णवी सिंह, प्रभात चौधरी, आवंतिका डवास, वैनवी कुमार, दक्ष चतुर्वेदी, काजल भारद्वाज और दीपांशु शामिल हैं। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार जिलों से प्रमाणपत्रों की सत्यापन रिपोर्ट लगातार प्राप्त हो रही है और फर्जी प्रमाणपत्र मिलने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
ऊधमसिंह नगर में 34 लोगों पर मुकदमे, सात गिरफ्तार
फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच का दायरा ऊधमसिंह नगर तक भी पहुंच चुका है। 28 सितंबर के उपलब्ध पुलिस/प्रशासनिक अपडेट के अनुसार जिले में अब तक 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, अन्य नामों को मिलाकर यह संख्या 34 भी बताई जा रही है।
वहीं उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार अलग-अलग मामलों में कम से कम सात आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें बाजपुर से पांच और गदरपुर से दो आरोपित शामिल हैं।
बाजपुर में नौ के खिलाफ मुकदमा, पांच गिरफ्तार
बाजपुर में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र बनवाने के मामले में नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इनमें मो. आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना पत्नी आशीष भारद्वाज, रोहित, हरपाल, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और चित्रा के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने इनमें मो. आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना और रोहित को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
जांच में चित्रा, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और रिया सिंह के नाम से जारी प्रमाणपत्रों में अनियमितता सामने आई और संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए गए। पूछताछ में मो. आलम ने दीक्षा और चित्रा के प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पांच हजार रुपये मिलने की बात कही। वहीं अनुराग भोजवाल के पिता श्याम बिहारी भोजवाल ने बयान में कहा कि बेटे का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने के लिए जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में उन्होंने बरेली निवासी हरपाल को 50 हजार रुपये दिए थे। उन्होंने इस काम में शिवम माथुर, रोहित और अर्चना की मदद मिलने की बात भी कही।
जांच के दौरान फर्जी किरायेदार सत्यापन कराने के आरोप भी सामने आए। पूछताछ में आरोपितों के मोबाइल फोन से कूटरचित दस्तावेजों से संबंधित साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। पुलिस ने छह मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
बाजपुर में पिता-पुत्री समेत तीन पर अलग मुकदमा
बाजपुर में ही एक अन्य मामले में अलसामी फाजिल, उसके पिता तौफिक अहमद और महेशपुरा निवासी रवि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच में अलसामी के नाम से जारी जाति प्रमाणपत्र में लगाया गया गृहकर प्रमाणपत्र और रसीद कूटरचित पाए जाने का आरोप है। नगर पालिका के रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेज का रिकॉर्ड नहीं मिला। इस मामले में तौफिक अहमद से भी पूछताछ की गई है।
यह मामला महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अलसामी फाजिल का नाम विश्वविद्यालय की ओर से निरस्त की गई 12 एमबीबीएस सीटों की सूची में भी शामिल है। इस मामले में उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर गिरफ्तारी को सात गिरफ्तारियों में शामिल नहीं किया गया है।
गदरपुर में 10 के खिलाफ मुकदमा, दो गिरफ्तार
गदरपुर में 25 सितंबर को राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार की तहरीर पर 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें शुभम हुड़िया, निखिल वर्मा, प्रमोद सैनी, शेखर अरोड़ा, लवी, प्रियांशु गुप्ता, वैष्णवी सिंह, आवंतिका डवास, वनवी कुमारी और प्रभात चौधरी के नाम सामने आए हैं।
जांच में पांच छात्रों से जुड़े प्रमाणपत्रों में फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, खतौनी, परिवार रजिस्टर और विद्युत बिल समेत अन्य कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। पुलिस ने शुभम हुड़िया पुत्र राजकुमार हुड़िया, निवासी पुरानी मंडी, वार्ड नंबर-10, गदरपुर और निखिल वर्मा पुत्र मोती राम, निवासी वार्ड नंबर-11, गदरपुर को गिरफ्तार किया है। दोनों को 25 सितंबर को पूछताछ के लिए लाया गया था और संलिप्तता के साक्ष्य मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने दोनों के कब्जे और निशानदेही से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और एक एसएसडी बरामद की है। मोबाइल फोन से मिली रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों को जांच में शामिल किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।
रुद्रपुर में तीन पर मुकदमा
रुद्रपुर में भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने का मामला सामने आया। राजस्व उपनिरीक्षक की तहरीर पर दीपांशु, दक्ष चतुर्वेदी और शुभम हुड़िया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच में जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों के लिए लगाए गए दस्तावेजों में अनियमितता सामने आने की बात कही गई है।
इन मामलों को मिलाकर ऊधमसिंह नगर में चार अलग-अलग मुकदमों की जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में सामने आई है, जबकि जिले में कुल 30 लोगों के खिलाफ नाम सहित मुकदमे दर्ज होने का प्रशासनिक/पुलिस आंकड़ा 28 सितंबर के अपडेट में दिया गया है। सात गिरफ्तारियों में बाजपुर के मो. आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना और रोहित तथा गदरपुर के शुभम हुड़िया और निखिल वर्मा शामिल हैं।
चार राजस्व कर्मचारियों पर कार्रवाई
फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण में राजस्व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई है। देहरादून में जगदीश राठौड़ और डिंपल को निलंबित किया गया है। वहीं ऊधमसिंह नगर में बाजपुर के राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद अजमल खान और गदरपुर के राजस्व उपनिरीक्षक सरताज अली पर निलंबन की कार्रवाई हुई है।
बाजपुर में तहसीलदार की जांच में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने और स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलने के बाद मोहम्मद अजमल खान को निलंबित किया गया। गदरपुर में दस्तावेज सत्यापन में प्रथमदृष्टया लापरवाही पाए जाने के बाद सरताज अली के निलंबन की कार्रवाई की गई।
इस तरह एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में पांच गिरफ्तारियां, ऊधमसिंह नगर में सात गिरफ्तारियां, नीट-यूजी की 15 सीटों का निरस्तीकरण और ऊधमसिंह नगर में 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे सामने आ चुके हैं। वहीं प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन की प्रक्रिया में भूमिका सामने आने पर चार राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। एसआइटी और जिला प्रशासन की जांच जारी है तथा नए साक्ष्य मिलने पर आगे और कार्रवाई हो सकती है।



