crimeDehradun

मर्सिडीज मामले में दून पुलिस के कांप रहे हाथ, कोर्ट के एफआर खारिज करने के बाद दोबारा दाखिल की वही रिपोर्ट

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने लगाई फटकार, हाई कोर्ट ने अर्जी कर दी खारिज

Amit Bhatt, Dehradun: मर्सिडीज बेंज इंडिया प्रा.लि. पुणे के चेयरमैन, बार्कले मोटर्स देहरादून के निदेशकों व अन्य पदाधिकारियों पर दर्ज कराए गए धोखाधड़ी के मुकदमे में दून पुलिस के हाथ जांच के नाम पर कांपते दिख रहे हैं। आलम यह है कि जांच अधिकारी बलदीप सिंह को कोर्ट का भी भय नहीं है। यही कारण है कि जिस आधी अधूरी जांच के बाद लगाई गई एफआर (फाइनल रिपोर्ट) को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खारिज कर चुके थे, उस जांच को दोबारा कोर्ट में दाखिल कर दिया गया। जांच अधिकारी बलदीप सिंह की इस लापरवाही पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई और दोबारा जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। वहीं, इसी प्रकरण में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज करने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट में लगाई गई याचिका भी खारिज कर दी गई है।

आपको बता दें कि इस प्रकरण में पटेल नगर पुलिस ने एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी। जिसका आशय यह हुआ कि पुलिस के हाथ धोखाधड़ी के मामले में कुछ नहीं लगा। हालांकि, तल्ख टिप्पणियों के साथ देहरादून के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्र द्वितीय संदीप सिंह भंडारी ने एफआर को निरस्त कर दिया था। साथ ही पटेल नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक को दोबारा जांच के लिए आदेशित किया गया था। लेकिन, 02 माह बाद भी जब पुलिस ने नया कुछ नहीं किया और वही जांच दोबारा दाखिल कर दी तो कोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया।

प्रकरण: फिल्म प्रोड्यूसर को नई बताकर बेची पुराने मॉडल की कार
यह मामला नई कार की जगह पुराने मॉडल की कार बेचने का है। फिल्म प्रोड्यूशर दून निवासी जय प्रकाश तिवारी को मर्सिडीज बेंज की नई कारों का शौक है। वह मर्सिडीज का नया मॉडल लॉन्च होने पर पुरानी कार घाटे में बेच देते हैं और शोरूम से नई कार खरीद लेते हैं। हालांकि, अबकी बार मर्सिडीज बेंज के देहरादून स्थित शोरूम ने उन्हें नए की जगह पुराने मॉडल की कार थमा दी।

इस मामले में जय प्रकाश तिवारी ने मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता जय प्रकाश तिवारी निवासी बंसल होम दून एन्क्लेव ने बताया कि वह फिल्म प्रोड्यूसर हैं और नए मॉडल की कार रखने के शौकीन हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने मर्सडीज कार खरीदी थी। 07 फरवरी 2023 को उन्होंने नई मर्सिडीज सी क्लास कार खरीदने के एवज में अपनी मर्सिडीज लेमोजिन कार 18 लाख रुपये के घाटे में बेच दी।

इसके बाद उन्होंने मर्सिडीज सी क्लास 2023 माडल 09 फरवरी 2023 को बुक कराई थी। इसके लिए कंपनी के साथ समझौता भी किया था। 24 फरवरी 2023 को उन्होंने मर्सिडीज सी क्लास कार खरीदी, जिसके इनवाइस पर निर्माण वर्ष 2023 लिखा था। वाहन का पंजीकरण संख्या यूके07-एफके1199 है। परचेज आर्डर पर दोनों पक्षों के हस्ताक्षर भी किए गए थे।

उन्होंने बताया कि वाहन के इंश्योरेंस, जो कि कंपनी की ओर से कराया गया था, उसमें भी निर्माण वर्ष 2023 अंकित था। कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि मर्सिडीज बेंज का नया माडल जीएलसी आ रहा है, इसलिए वह 30 जून 2023 को मोहब्बेवाला स्थित कंपनी के शोरूम में गए और अपनी मर्सिडीज सी क्लास कार के बदले मर्सिडीज जीएलसी का नया माडल खरीदने की बात की। वह तब दंग रहे जब उन्हें बताया कि उनकी मर्सिडीज जीएलसी पर 30 प्रतिशत डेप्रिसिएशन (मूल्य ह्रास) कटेगा। जब उन्होंने डेप्रिसिएशन कटने के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि वाहन का माडल वर्ष 2022 का है।

जय प्रकाश तिवारी के मुताबिक जब उन्होंने कंपनी के कर्मचारी को बताया कि कार का परचेज बिल व वाहन का बीमा 24 फरवरी 2023 का है, तो इस पर कंपनी का कर्मचारी कोई जवाब नहीं दे पाया। जब उन्होंने इस संबंध में शोरूम के मैनेजर से शिकायत की तो उन्होंने जालसाजी कर एक फर्जी दस्तावेज तैयार किए। हालांकि, इस पर दोनों पक्षों के हस्ताक्षर नहीं थे। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो उन्हें चुप रहने की धमकी दी गई। इस बाबत उन्होंने मर्सिडीज बेंज कंपनी के डायरेक्टर, मैनेजिंग डायरेक्टर, चेयरमैन व संबंधित अधिकारियों को ईमेल से शिकायत की तो उन्होंने तकनीकी खामी बताते हुए मामले को रफा-दफा करने प्रयास किया।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया था कि यदि तकनीकी खराबी होती तो यह उन्हें वाहन खरीदते समय ही बता देते। तब पटेलनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक कमल कुमार ने शिकायतकर्ता की तहरीर पर मर्सिडीज बेंज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पुणे, संतोष अय्यर एमडी व सीईओ समेत चेयरमैन एवं संबंधित अधिकारी मोहब्बेवाला इंडस्ट्रियल एरिया सुभाष नगर चौक सहारनपुर रोड के खिलाफ जनवरी 2024 में मुकदमा दर्ज कराया था।

लंबे समय तक चली जांच के बाद पुलिस ने एफआर लगाकर मामला रफा दफा तो कर दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। यहां तक कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में पुलिस की जांच नाकाफी रही। क्योंकि, तमाम रिकॉर्ड शिकायतकर्ता ने ही उपलब्ध कराए हैं। पुलिस ने सिर्फ खानापूर्ति की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कोर्ट के सख्त रुख के बाद पुलिस की जांच दोबारा किस दिशा में आगे बढ़ती है।

मर्सिडीज ने माना, तकनीकी खामी से हुई दिक्कत, और भी ग्राहकों संग धोखाधड़ी का अंदेशा
जय प्रकाश तिवारी के अनुसार मर्सिडीज कंपनी के पदाधिकारियों ने माना है कि सिस्टम में आई तकनीकी खामी के कारण पुराने मॉडल की कार बेच दी गई। उन्होंने कहा कि यह गड़बड़ी 28 दिसंबर 2022 से मार्च 2023 तक रही। ऐसे में वह सिर्फ अपने लिए लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं। उनकी यह लड़ाई तकनीकी खामी की अवधि में कार खरीदने वाले तमाम ग्राहकों के हित के लिए है। तिवारी के अनुसार हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित ने भी इस बात को समझा है। लिहाजा, कंपनी की अर्जी खारिज कर दी गई। जबकि यह याचिका कोर्ट में डिफेक्ट के नाम पर 02 माह से लंबित नहीं थी। संभवतः किसी सेटिंग का इंतजार था। लेकिन, कोर्ट ने बता दिया कि कानून अपना काम करना जानता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button