
Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) ने आर्केडिया हिलॉक्स ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का निर्माण करने वाली Golden Era Infratech Pvt. Ltd. और उसके निदेशकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अंतरिम आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि विवादित फ्लैटों की न तो रजिस्ट्री होगी और न ही किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में कोई अधिकार सृजित किया जाएगा, जब तक मामले का अंतिम निस्तारण नहीं हो जाता।
रेरा सदस्य नरेश सी मठपाल के समक्ष एक जैसी प्रकृति की 9 शिकायतों को एक साथ सुनवाई के लिए क्लब किया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने परियोजना Arcadia Hillocks के फ्लैटों का पूरा भुगतान कर दिया, उन्हें कब्जा भी दे दिया गया, लेकिन इसके बावजूद बिल्डर द्वारा अब तक बिक्री विलेख (Sale Deed) निष्पादित नहीं किया गया।
भुगतान पूरा, कब्जा मिला… फिर भी रजिस्ट्री क्यों नहीं
रेरा के समक्ष पेश तथ्यों के अनुसार, संबंधित फ्लैट खरीदारों ने अनुबंध के तहत अपनी सभी वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं। इसके बावजूद प्रमोटर कंपनी और उसके निदेशक जानबूझकर रजिस्ट्री टालते रहे। इससे खरीदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि इस बीच सर्किल रेट, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में वृद्धि हो चुकी है। रेरा ने प्रथम दृष्टया माना कि यह स्थिति रेरा अधिनियम 2016 की धारा 11, 14 और 17 का उल्लंघन प्रतीत होती है।
निदेशक लापता, आपराधिक मामले भी दर्ज
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं के अधिवक्ता ने प्राधिकरण को बताया कि प्रमोटर कंपनी के निदेशक अतुल गर्ग, प्रतीक गर्ग, अंजलि गर्ग और शाश्वत गर्ग न केवल कार्यवाही से अनुपस्थित हैं, बल्कि कथित रूप से लापता हैं। इनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की बात भी रिकॉर्ड पर लाई गई। वहीं, पूर्व में रेरा शाश्वत गर्ग, उसकी पत्नी साक्षी गर्ग की थानो स्थित इंपीरियल वैली नाम से प्लॉटेड डेवलपमेंट की परियोजना पर रोक लगा चुका है। दूसरी तरफ ईडी भी बिल्डर दंपती और उनके सहयोगियों पर मनी लॉन्ड्रिंग पर शिकंजा कस चुकी है।
रेरा ने तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए माना कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो खरीदारों के हितों को अपूरणीय क्षति हो सकती है। एक ही फ्लैट को दूसरे व्यक्तियों को बेचा जा सकता है। रेरा के अंतरिम आदेश में सभी विवादित फ्लैटों पर Status Quo बनाए रखने का निर्देश दिया, जबकि जिला निबंधक/उप निबंधक देहरादून को स्पष्ट आदेश दिया कि किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री न की जाए। जिला प्रशासन को आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए दिए गए हैं। यह आदेश रेरा अधिनियम की धारा 36 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पारित किया गया है और अंतिम निर्णय तक प्रभावी रहेगा।
खरीदारों के लिए बड़ी राहत, बिल्डरों के लिए कड़ा संदेश
रेरा का यह आदेश स्पष्ट संकेत है कि पूरी राशि लेने के बावजूद रजिस्ट्री लटकाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह फैसला न सिर्फ गोल्डन एरा प्रकरण में फ्लैट खरीदारों के लिए राहत है, बल्कि राज्य भर के बिल्डरों के लिए भी कड़ा चेतावनी संदेश माना जा रहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।



