वीडियो: महिला वन बीट अधिकारी की चाबी छीनी, अतिक्रमण रोकने पहुंचीं थीं
कड़वापानी क्षेत्र में हरिओम आश्रम पर वन बीट अधिकारी की रिपोर्ट में गंभीर आरोप, वन क्षेत्र में मृत गौवंश से मामला और भी संगीन

Rajkumar Dhiman, Dehradun: प्रदेश सरकार भले ही वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। आशारोड़ी रेंज के कड़वापानी बीट क्षेत्र में वन भूमि पर हो रहे कथित अतिक्रमण को रोकने पहुंची महिला बीट अधिकारी के साथ अभद्रता का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि न सिर्फ अधिकारी के साथ बदसलूकी की गई, बल्कि उनकी स्कूटी की चाबी भी जबरन छीन ली गई।
मंगलवार को बीट अधिकारी रेनू जोशी को सूचना मिली थी कि वन भूमि से सटे क्षेत्र में दीवार का निर्माण कराया जा रहा है। मौके पर पहुंचकर उन्होंने निर्माण रोकने के निर्देश दिए, लेकिन आरोप है कि आश्रम से जुड़े लोगों ने आदेश मानने से इनकार कर दिया और विवाद शुरू हो गया। इसी दौरान एक युवक ने पहले उनका मोबाइल छीनने की कोशिश की और बाद में स्कूटी की चाबी निकाल ली।
संयुक्त सर्वे के बावजूद नहीं सुरक्षित हो पाई वन भूमि
बीट अधिकारी की ओर से वन क्षेत्राधिकारी आशारोड़ी रेंज को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2020 में राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम ने सर्वे कर इस क्षेत्र को वन एवं झाड़ी भूमि के रूप में दर्ज किया था। इसके बावजूद मौके पर न तो सीमांकन के लिए बाउंड्री पिलर लगाए गए और न ही अतिक्रमण रोकने की ठोस कार्रवाई की गई। इस संबंध में बीट अधिकारी ने एक रिपोर्ट आशारोड़ी क्षेत्र के रेंजर को एक रिपोर्ट भी भेजी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जब-जब अतिक्रमण रोकने का प्रयास किया गया, तब-तब आश्रम संचालक की ओर से अभद्रता और दबाव बनाया गया।
पुलिस ने माफी मंगवाई, लेकिन निर्माण पर नहीं लगी रोक
मंगलवार की घटना के बाद बीट अधिकारी रेनू की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस के सख्त रुख के बाद आरोपी युवक ने माफी मांग ली, लेकिन स्कूटी की चाबी वापस नहीं की गई। इसके बजाय आश्रम की ओर से ही एक व्यक्ति को बुलाकर डुप्लीकेट चाबी बनवाई गई और मामला वहीं शांत करा दिया गया। हैरानी की बात यह भी रही कि पूरे घटनाक्रम के बावजूद निर्माण कार्य पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई।
गौसेवा के दावे, जंगल में मिल रहे मृत गौवंश
बीट अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में आश्रम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार आश्रम में निराश्रित गौवंश की देखभाल का दावा किया जाता है, लेकिन वन क्षेत्र में कई घायल और बीमार गौवंश खुले में छोड़े जा रहे हैं। अधिकारी ने जंगल में मृत पड़े गौवंश की तस्वीरें और वीडियो भी संलग्न किए हैं। बताया गया है कि मृत पशुओं के कारण आवारा कुत्तों की आवाजाही बढ़ रही है, जिससे वन्यजीवों पर भी खतरा पैदा हो रहा है।
दोबारा होगा सर्वे और कार्रवाई के मिले संकेत
वन क्षेत्राधिकारी प्रभाष वेदवाल का कहना है कि वर्ष 2020 के संयुक्त सर्वे के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में दोबारा सर्वे कराने के लिए लिखा गया है। यदि सर्वे में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वन क्षेत्र में मृत गौवंश मिलने के मामलों में भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।



