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उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा निर्णय: भूजल के व्यावसायिक दोहन पर सख्त नियम, ‘भूजल व्यावसायिक उपयोग नियमावली’ को मंजूरी

उत्तराखंड में कल के जल पर आज उठाया गया ठोस कदम, सीएम धामी ने जल सुरक्षा पर अपनाया कड़ा रुख

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर और अनियंत्रित दोहन पर अंकुश लगाने के लिए आज एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। बुधवार 28 जनवरी 2025 को आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘उत्तराखंड भूजल (व्यावसायिक उपयोग) नियमावली’ को हरी झंडी दे दी गई। इस नियमावली के लागू होते ही अब राज्य में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक भूजल उपयोग पर कड़ी निगरानी और अनुमति प्रक्रिया अनिवार्य होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 08 विषयों पर हरी झंडी दी गई है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड) फाइल फोटो

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार का मकसद उद्योगों, होटलों, रिसॉर्ट्स, कमर्शियल RO यूनिटों, पानी बेचने वाले कारोबार, निर्माण कार्य, कार वाश और अन्य व्यावसायिक इकाइयों द्वारा किए जा रहे बोरवेल व ट्यूबवेल के अनियंत्रित दोहन को नियंत्रित करना है। घरेलू और कृषि उपयोग के लिए पुराने नियम पहले की तरह यथावत रहेंगे।

नई नियमावली के तहत अब राज्य में कोई भी व्यावसायिक इकाई भूजल का उपयोग तभी कर सकेगी जब वह सरकारी अनुमति/NOC प्राप्त करेगी, बोरवेल की जियो-टैगिंग, वॉटर मीटर लगाने और उपयोग की गई पानी की मासिक रिपोर्ट देने जैसी शर्तें पूरा करेगी। साथ ही, व्यावसायिक इकाइयों को अपने परिसर में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाना अनिवार्य होगा, ताकि जितना पानी निकाला जाए, उतनी ही पुनर्भरण क्षमता भी तैयार की जा सके।

राज्य सरकार ने भूजल निकासी पर श्रेणीवार उपयोग शुल्क भी निर्धारित कर दिया है, जिसके तहत होटल–रिसॉर्ट, उद्योग, RO प्लांट और वाटर टैंकर संचालन जैसे व्यवसायों को अपने उपयोग के अनुरूप शुल्क देना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर सरकार ने कड़े प्रावधान भी किए हैं।

अवैध बोरवेल और बिना अनुमति भूजल दोहन पर भारी जुर्माना, NOC रद्द करने और बोरवेल सील करने जैसी कार्रवाई की जाएगी। कैबिनेट के इस फैसले को राज्य में जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि भूजल दोहन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा सकता है। नई नियमावली से न केवल व्यावसायिक दोहन पर रोक लगेगी, बल्कि जल–संसाधनों के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

उत्तराखंड कैबिनेट ने अक्टूबर 2024 में व्यावसायिक भूजल उपयोग पर शुल्क तय किया था, जिसे अब लागू किया जा सकता है
सुरक्षित क्षेत्र → ₹32
अर्ध–गंभीर क्षेत्र → ₹52
गंभीर क्षेत्र → ₹64
अतिदोहित क्षेत्र → ₹128
(यह जल मूल्य/groundwater royalty प्रति किलोलीटर है — यह वही दरें हैं जिन्हें पूर्व में कैबिनेट ने हरी झंडी दी थी और जिन्हें बाद में लागू किया जाना था।)

उत्तराखंड कैबिनेट में इन्हें भी हरी झंडी
1. स्वास्थ विभाग के कर्मचारियों को सेवाकाल के दौरान एक बार म्यूचुअल आधार पर ट्रांसफर को हरी झंडी
2. जमीन अधिग्रहण अब सरकार सीधे आपसी सहमति पर भूस्वामी से बात कर सकती है
3. सिडकुल उधमसिंहनगर द्वारा अधिगृहित भूमि सब-लीज पर दिए जाने को हरी झंडी
4. चार जनजाति कल्याण अधिकारी के पदों को हरी झंडी
5. GRD उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय को कैबिनेट की हरी झंडी
6. चिन्यालीसैण और गोचर हैलीपेड को रक्षा मंत्रालय को देने पर कैबिनेट की हरी झंडी
7. हरित हाइड्रोजन को राज्य में बढ़ावा देने हेतु नीति को हरी झंडी

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