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देहरादून में उमड़ा आक्रोश: अंकिता भंडारी न्याय महापंचायत में भारी भीड़, वीआईपी नाम सार्वजनिक करने की मांग तेज

महापंचायत में अंकिता की माता सोनी देवी और पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी भी पहुंचे

Divij Bahuguna, Dehradun: देहरादून में रविवार को आयोजित अंकिता भंडारी न्याय महापंचायत सरकार के खिलाफ बड़े जनाक्रोश का मंच बन गई। प्रदेशभर के सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिक मंचों के प्रतिनिधि सुबह से ही परेड ग्राउंड पहुंचने लगे, जिससे पूरा मैदान लोगों से भर गया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा घेरा और भी मजबूत कर दिया है।

आंदोलनकारी मंच की संरक्षक कमला पंत ने कहा कि तीन वर्ष बाद भी अंकिता हत्याकांड में “वीआईपी” का नाम सार्वजनिक न होना न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि पीड़ित परिवार अब भी न्याय के इंतजार में है। महापंचायत में व्यापक सहमति बनने के बाद आगे की आंदोलन योजना तय की जाएगी।

पीड़ित परिवार भी पहुंचा, भावनाओं का उफान
महापंचायत में अंकिता की माता सोनी देवी और पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी भी पहुंचे। दोनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें आज भी वही दर्द हिला देता है जो बेटी के न्याय की लड़ाई शुरू होने पर था। परिवार ने सीबीआई से वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने और जांच को और तेज तथा पारदर्शी करने की अपील की।

वीआईपी नाम पर उठ रहे सवाल तेज, डॉ. अनिल जोशी की भूमिका पर भी चर्चा
संगठनों ने यह प्रश्न भी उठाया कि जब पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा अंकिता के माता-पिता की ओर से दर्ज कराया जाना चाहिए था। ऐसे में डॉ जोशी की भूमिका सही नहीं है। उनकी मंशा और भूमिका को लेकर भी महापंचायत में विस्तृत चर्चा हो रही है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि वीआईपी का नाम सामने लाने में कोई बाधा है, तो उसे जनता के सामने स्पष्ट किया जाए। महापंचायत में आए प्रतिनिधियों और जनता ने एक सुर में कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए दोषियों को कड़ी सजा—यहाँ तक कि फांसी—दी जानी चाहिए। सबकी मांग है कि सीबीआई जांच बिना किसी दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप के पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़े।

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