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हल्द्वानी डबल मर्डर: 25 साल के गैंगस्टर गौरव नेगी उर्फ अक्कू की भूमिका, 11 केस पहले से दर्ज

पहले शुभम को मारा और फिर साक्ष्य मिटाने को लक्ष्मी को भी पत्थरों से आखिरी सांस तक मारते रहे आरोपी

Round The Watch News: हल्द्वानी में हुए सनसनीखेज डबल मर्डर ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया है। इस दोहरे हत्याकांड में 25 वर्षीय कुख्यात गैंगस्टर गौरव नेगी उर्फ अक्कू ठाकुर की मुख्य भूमिका सामने आई है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि शराब और चरस के नशे में मामूली विवाद ने देखते ही देखते खूनी रूप ले लिया और प्रेमी युगल शुभम (31) व लक्ष्मी (19) को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। मामले में पुलिस ने गैंगस्टर गौरव नेगी, उसके साथी दीपेश लटवाल, सौरभ और दीपू शर्मा को गिरफ्तार किया है।

नशे में शुरू हुआ विवाद, पत्थरों से कुचलकर हत्या
पुलिस के अनुसार, घटना की रात आरोपी अक्कू और उसके साथी शराब व चरस के नशे में थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर शुभम और आरोपियों के बीच कहासुनी हुई। विवाद इतना बढ़ गया कि पहले शुभम पर हमला किया गया।

शुभम की हत्या के बाद आरोपियों को आशंका हुई कि लक्ष्मी पुलिस के सामने पूरी घटना का खुलासा कर देगी। इसके बाद युवती को भी निशाना बनाया गया। प्रत्यक्ष तथ्यों के अनुसार, दोनों पर तब तक पत्थरों से वार किए गए जब तक उनकी सांसें थम नहीं गईं। यह वारदात हल्द्वानी की गल्ला मंडी क्षेत्र में हुई, जिसने शहर को दहशत में डाल दिया।

सबसे पहले कैसे मिली सूचना?
घटना की पहली जानकारी गल्ला मंडी के सिक्योरिटी प्रभारी अंशुल पांडे को मिली। उन्होंने खून से लथपथ शव देखे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। स्थानीय लोगों से पूछताछ में सामने आया कि रात में घटनास्थल के आसपास चीखने-चिल्लाने की आवाजें भी सुनी गई थीं। लेकिन लोगों ने यह सोचकर अनदेखा कर दिया कि अक्सर मजदूर और ट्रक चालक शराब पीकर आपस में झगड़ते रहते हैं।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि घटनास्थल के पास लगे कुछ सीसीटीवी कैमरे खराब थे। हालांकि दूर लगे कैमरों में अक्कू और उसके साथियों की झलक मिल गई। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जहां उन्होंने पूरे दोहरे हत्याकांड की कहानी कबूल कर ली।

पोस्टमार्टम में पांच घंटे, वीडियोग्राफी भी
गल्ला मंडी से शवों को कब्जे में लेकर पुलिस सीधे मोर्चरी पहुंची। पहले लक्ष्मी और फिर शुभम का पोस्टमार्टम किया गया। पूरी प्रक्रिया में लगभग पांच घंटे लगे। पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी की गई। लक्ष्मी के पोस्टमार्टम में महिला चिकित्सक की उपस्थिति सुनिश्चित की गई। जांच के लिए बिसरा सुरक्षित रखा गया है। पुलिस का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट से घटना की क्रूरता और स्पष्ट हो सकेगी।

अल्मोड़ा से हल्द्वानी आया था शुभम
मृतक शुभम मूल रूप से अल्मोड़ा के तल्ला खोल्टा क्षेत्र का रहने वाला था। वह पांच साल पहले रोजगार की तलाश में हल्द्वानी आया था। शुभम के पिता डाक विभाग में वरिष्ठ पद पर रहे थे, जबकि मां पूर्व ग्राम प्रधान थीं—दोनों का निधन हो चुका है। पिता की मृत्यु एक वर्ष पूर्व ही हुई थी।

वह भाई-बहनों में सबसे छोटा था
पिता की मृत्यु के सदमे से परिवार उभर भी नहीं पाया था कि अब शुभम की निर्मम हत्या की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया। अल्मोड़ा में जैसे ही घटना की सूचना पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक और सनसनी फैल गई।

कुछ वर्ष पहले शुभम नशे की लत का शिकार हो गया था। उसे हल्द्वानी के कटघरिया स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां करीब पांच साल तक उपचार चला। बाद में वह वहीं कर्मचारी बना और फिर दूसरे केंद्र में काउंसलर के रूप में काम करने लगा।

पढ़ाई और संघर्ष: लक्ष्मी की दोहरी जिम्मेदारी
मृतका लक्ष्मी नैनीताल जिले की रहने वाली थी और हल्द्वानी में रहकर MBPG College में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। परिवार के अनुसार वह पढ़ाई में तेज थी और अपने खर्चों को संभालने के लिए मेडिकल स्टोर में नौकरी भी करती थी। उसके बड़े भाई ने बताया कि परिवार बड़ा है और लक्ष्मी सातवें नंबर पर थी। पिता ग्राम सभा मल्ली पोखरी में पुरोहित हैं। लेकिन, उसके संघर्ष और सपनों की कहानी को निर्मम तरीके से कुचल दिया गया।

25 साल की उम्र में 11 केस: गैंगस्टर अक्कू का आपराधिक रिकॉर्ड
गौरव नेगी उर्फ अक्कू ठाकुर का आपराधिक इतिहास चौंकाने वाला है। वर्ष 2020 (कोरोना काल) में अपराध की दुनिया में कदम रखा। पहला केस मारपीट, जान से मारने की धमकी और गालीगलौज का दर्ज हुआ। इसके बाद लगातार आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा। अक्कू पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत भी केस दर्ज हैं।
चार साल पहले पुलिस ने उसे गैंगस्टर घोषित किया।

अब तक कुल 11 केस दर्ज हो चुके हैं
2022 में उसके खिलाफ सबसे अधिक चार मुकदमे दर्ज हुए। बरेली रोड स्थित वसुंधरा कॉलोनी का निवासी अक्कू, जेल से जमानत पर छूटने के बाद भी नहीं सुधरा। उसका पूरा आपराधिक रिकॉर्ड हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा रहा, जिससे यह भी संकेत मिलता है कि उसे स्थानीय पुलिस का खास डर नहीं था।

सह-आरोपी दीपेश लटवाल का भी आपराधिक इतिहास
इस निर्मम हत्याकांड में शामिल दीपेश लटवाल मुखानी थाना क्षेत्र के उत्तरांचल विहार का निवासी है। 2019 में एनडीपीएस एक्ट के तहत पहला केस दर्ज। 2023 में घर में घुसकर मारपीट के मामले में नाम आया। उसके खिलाफ कुल तीन मुकदमे दर्ज हैं। उसने अक्कू से एक साल पहले अपराध की दुनिया में कदम रखा था।

समाज के लिए बड़ा सवाल
यह दोहरा हत्याकांड सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कई गंभीर सवाल खड़े करता है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति स्थानीय स्तर पर आपराधिक तत्वों का हौसला बढ़ाती है। हल्द्वानी का यह डबल मर्डर महज एक आपसी विवाद नहीं, बल्कि नशे, अपराध और लापरवाही का खतरनाक संगम साबित हुआ।

क्योंकि, 25 साल की उम्र में 11 मुकदमों का सामना कर चुका गैंगस्टर गौरव नेगी उर्फ अक्कू और उसके साथियों ने एक मामूली झगड़े को दो जिंदगियों के अंत में बदल दिया।

अब पुलिस की आगे की जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि अगर समय रहते अपराध की प्रवृत्ति पर लगाम न कसी जाए, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है।

सीसीटीवी सिस्टम की लापरवाही
छोटी घटनाओं को नजरअंदाज करने की सामाजिक प्रवृत्ति
अगर रात में सुनी गई चीखों को गंभीरता से लिया जाता या आसपास के कैमरे ठीक होते, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था।

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