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पौड़ी एसएसपी की फ्रेंड रिक्वेस्ट आए तो सावधान हो जाएं, नहीं तो पड़ेगा पछताना

साइबर ठगों ने बनाई एसएसपी की फर्जी फेसबुक आईडी, आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज

Rajkumar Dhiman, Dehradun: पौड़ी में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है। किसी अज्ञात व्यक्ति ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पौड़ी के नाम से फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर उनकी तस्वीर प्रोफाइल पर अपलोड कर दी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस की साइबर सेल हरकत में आ गई है और अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

साइबर सेल प्रभारी कमलेश शर्मा की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा गया है कि फर्जी अकाउंट के माध्यम से किसी भी प्रकार की संदिग्ध या भ्रामक गतिविधि साझा कर पुलिस की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा सकती है।

कोतवाली प्रभारी प्रदीप नेगी ने बताया कि अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साइबर टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अकाउंट संचालक की पहचान में जुटी है।

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि इस प्रकार के किसी भी संदिग्ध अकाउंट या संदेश पर भरोसा न करें और तुरंत साइबर सेल को सूचना दें।

🔎 हाल के महीनों में बढ़े फर्जी प्रोफाइल के मामले
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ महीनों में राज्यभर में कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नाम से फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाए जाने के मामले सामने आए हैं। हाल में 3 से 5 अधिकारियों के नाम से फेसबुक/इंस्टाग्राम पर फेक प्रोफाइल बनाए जाने की शिकायतें दर्ज हुईं।

कुछ मामलों में आरोपियों ने परिचितों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर पैसों की मांग की। डिजिटल पेमेंट (UPI/वॉलेट) के जरिए 5 हजार से 25 हजार रुपये तक की मांग करने की कोशिश की गई।

कहीं-कहीं सरकारी योजनाओं या तबादले/पोस्टिंग के नाम पर भी संपर्क साधने की कोशिश हुई। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में अधिकतर फर्जी अकाउंट विदेश या दूसरे राज्यों से संचालित पाए जाते हैं, जिनकी पहचान के लिए तकनीकी जांच की जाती है।

⚠️ कैसे रहें सतर्क?
किसी भी अधिकारी के नाम से आए मैसेज या फ्रेंड रिक्वेस्ट को पहले सत्यापित करें। पैसों की मांग होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। संदिग्ध अकाउंट को रिपोर्ट कर ब्लॉक करें। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता के साथ साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं, ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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