
Rajkumar Dhiman, Dehradun: वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) के चर्चित पेपर लीक प्रकरण में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित आशीष कुमार गुप्ता (40) को गिरफ्तार कर लिया है। शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा में सहायक प्रोफेसर रहे आशीष कुमार गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने छात्रों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से परीक्षा से पहले विश्वविद्यालय के प्रश्नों से मिलते-जुलते सवाल व्हाट्सएप ग्रुप और छात्रों के आंतरिक पोर्टल के माध्यम से साझा कर परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता भंग की। विश्वविद्यालय की शिकायत पर प्रेमनगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। अब उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है और इस पूरे प्रकरण में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की ओर से गुरुवार को कोतवाली प्रेमनगर में तहरीर दी गई। तहरीर के आधार पर मु.अ.सं. 144/2026 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316, 318(4) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने तत्काल साक्ष्य जुटाकर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने गवाहों के बयान, विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से शाकुम्भरी विहार, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) का निवासी है।
ई-मेल शिकायत से खुला पूरा मामला
प्रकरण की शुरुआत सम सेमेस्टर परीक्षा के दौरान हुई। 8 जुलाई 2026 को आयोजित परीक्षा के संबंध में विश्वविद्यालय को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें बताया गया कि 3 जुलाई 2026 को शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में नियुक्त सहायक प्रोफेसर ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे। परीक्षा संपन्न होने के बाद जब इन प्रश्नों का वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलान किया गया तो उनमें काफी समानता पाई गई।
मामले को गंभीर मानते हुए कुलपति के निर्देश पर विश्वविद्यालय ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की, जबकि शिवालिक कॉलेज ने भी अलग से आंतरिक जांच कराई। दोनों जांचों में सामने आया कि Machine Learning for Internet of Things (Subject Code: IOTT004) विषय के External Paper Setter रहे आशीष कुमार गुप्ता ने परीक्षा से पहले छात्रों के आंतरिक पोर्टल और व्हाट्सएप के माध्यम से प्रश्न साझा किए थे, जिससे परीक्षा की गोपनीयता और शुचिता भंग हुई।
दूसरा प्रश्नपत्र भी उसी शिक्षक ने बनाया, दोनों परीक्षाएं रद्द
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि Electromagnetic Field Theory (Subject Code: ECT043) विषय का प्रश्नपत्र भी उसी शिक्षक ने तैयार किया था। विश्वविद्यालय ने दूसरे प्रश्नपत्र की गोपनीयता भी प्रभावित होने की आशंका जताते हुए दोनों विषयों की परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दीं। दोनों विषयों की पुनर्परीक्षा अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। इसकी विस्तृत तिथि और परीक्षा केंद्रों की सूची विश्वविद्यालय अलग से जारी करेगा।
पहले बर्खास्तगी, फिर सात साल का प्रतिबंध और अब गिरफ्तारी
मामला सामने आने के बाद शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने पहले आरोपी शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका इंक्रीमेंट रोक दिया था। संस्थान और विश्वविद्यालय की जांच में आरोप सिद्ध होने पर कॉलेज प्रशासन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें सात वर्षों के लिए सभी परीक्षा संबंधी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया। विश्वविद्यालय ने विधिक कार्रवाई का निर्णय लेते हुए परीक्षा नियंत्रक के माध्यम से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अब आरोपी की गिरफ्तारी हुई है।
अन्य आरोपी की भूमिका भी जांच के दायरे में
दून पुलिस के अनुसार, आरोपी से बरामद मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश में कोई अन्य व्यक्ति, छात्र या कर्मचारी शामिल था या नहीं। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर अन्य आरोपितों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से समझौता करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।



