डार्क वेब से 8,088 बिटकॉइन, भारत में 10.82 करोड़ की विदेशी रकम…हल्द्वानी के बनमीत पर ईडी का सबसे बड़ा दावा
अमेरिकी जांच, क्रिप्टोकरेंसी, विदेशी रेमिटेंस और करोड़ों की संपत्ति का पूरा मामला

Rajkumar Dhiman, Dehradun: अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के चर्चित मामले में हल्द्वानी निवासी बनमीत सिंह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विशेष पीएमएलए अदालत में ऐसे तथ्य रखे हैं, जिनसे करोड़ों रुपये के विदेशी लेनदेन, हजारों बिटकॉइन और डार्क वेब के जरिए संचालित कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की तस्वीर सामने आती है। विशेष अदालत के समक्ष दायर प्रथम अनुपूरक अभियोजन शिकायत (First Supplementary Prosecution Complaint) में ईडी ने दावा किया है कि बनमीत सिंह और उसका भाई परविंदर सिंह वर्षों तक डार्क वेब के जरिए प्रतिबंधित मादक पदार्थ बेचते रहे और इसकी कमाई क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से छिपाई गई।
अमेरिका से आया एमएलएटी, यहीं से शुरू हुई जांच
ईडी के अनुसार 22 नवंबर 2022 को भारत सरकार को अमेरिका के न्याय विभाग (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस) की ओर से म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस (एमएलएटी) अनुरोध प्राप्त हुआ। इसमें एफबीआई, डीईए और आईआरएस द्वारा बनमीत सिंह, परविंदर सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी एवं मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जानकारी दी गई। अमेरिकी एजेंसियों ने भारतीय बैंक खातों, कंपनियों, यात्रा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। बाद में 1 फरवरी 2024 को एक और पूरक एमएलएटी भेजा गया, जिसमें जांच से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य उपलब्ध कराए गए।
डार्क वेब पर ‘लिस्टन’ नाम से चलता था नेटवर्क
ईडी के मुताबिक अमेरिकी जांच में सामने आया कि दोनों भाई डार्क वेब पर “Liston” और “Listonishere” नामों से सक्रिय थे। ये Silk Road, AlphaBay और Hansa जैसे डार्क वेब मार्केटप्लेस पर अवैध दवाओं और नशीले पदार्थों की बिक्री करते थे। भुगतान बिटकॉइन में लिया जाता था और बाद में उसे विभिन्न क्रिप्टो वॉलेट एवं मिक्सिंग सर्विस के जरिए छिपाया जाता था। परविंदर सिंह कथित तौर पर “Cady Lass” और “Indiabenzos” नामों का भी इस्तेमाल करता था।
8,088 बिटकॉइन का दावा
अमेरिकी एजेंसियों के हवाले से ईडी ने अदालत को बताया कि सिंह संगठन को कम से कम 8,088.229314 बिटकॉइन प्राप्त हुए थे। अदालत में 16 सार्वजनिक बिटकॉइन एड्रेस का पूरा विवरण भी रखा गया, जिनमें सबसे बड़े वॉलेट में 4,250.993333 BTC, दूसरे में 1,196.999717 BTC, तीसरे में 1,170.000039 BTC, चौथे में 525 BTC, पांचवें में 470.647038 BTC सहित कुल 8,088.229314 BTC दर्ज हैं।
268.22 बिटकॉइन जब्त, 4,250 बिटकॉइन पर विवाद
ईडी ने बताया कि जांच के दौरान परविंदर सिंह से 268.22 बिटकॉइन जब्त या फ्रीज किए गए। वहीं बनमीत सिंह ने पूछताछ में कहा कि कुल 8,131.302 बिटकॉइन में से उसने वर्ष 2017 में अपने हिस्से के 3,880 बिटकॉइन अमेरिका को सरेंडर कर दिए, जबकि 4,250 बिटकॉइन परविंदर सिंह के पास हैं। दूसरी ओर परविंदर सिंह ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा कि 4,250 बिटकॉइन बनमीत सिंह के ही पास हैं।
2012 से 2017 तक नहीं बताया वैध आय का स्रोत
ईडी का आरोप है कि बनमीत सिंह वर्ष 2012 से 2017 के बीच भारत और यूनाइटेड किंगडम में अपनी किसी वैध आय का प्रमाण नहीं दे सका। इसके बावजूद उसके तथा परिवार के बैंक खातों में विदेश से बड़ी रकम आई। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान वह इन विदेशी रेमिटेंस का संतोषजनक स्रोत नहीं बता पाया।
भारत में आए 10.82 करोड़ रुपये
ईडी के अनुसार वर्ष 2012 से 2017 के बीच बनमीत सिंह और उसके परिवार के खातों में ₹10,82,17,789.42 की विदेशी धनराशि आई। इसमें से लगभग ₹9.87 करोड़ की संपत्तियों को 18 जुलाई 2024 के अस्थायी कुर्की आदेश (PAO-03/2024) के तहत अटैच किया गया।
किन खातों में आई रकम
ईडी ने अदालत में बैंक खातों का भी विवरण रखा कि एक्सिस बैंक (बनमीत सिंह) में लगभग 1.07 करोड़ रुपये,
एक्सिस बैंक संयुक्त खाता (बनमीत सिंह एवं अमरप्रीत कौर) में लगभग 2.31 करोड़ रुपये डॉयचे बैंक में लगभग 3.24 करोड़ रुपये और कोटक महिंद्रा बैंक : लगभग 53.84 लाख रुपये आए। इन सभी विदेशी रेमिटेंस को ईडी ने कथित अपराध की आय बताया है।
दिल्ली में खरीदा फ्लैट, एफडी भी बनाई
अभियोजन के अनुसार विदेशी धन से नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1, ई-83, तीसरी मंजिल पर फ्लैट खरीदा गया। यह संपत्ति बाद में बनमीत सिंह की पत्नी अमरप्रीत कौर चावला के नाम दर्ज कराई गई। इसके अलावा विदेशी धन से तीन फिक्स्ड डिपॉजिट भी बनाए गए। ईडी का आरोप है कि इसका उद्देश्य अपराध की कमाई को वैध दिखाना था।
ब्रिटेन में गिरफ्तारी के बाद भी चलते रहे बिटकॉइन
ईडी ने अमेरिकी जांच का हवाला देते हुए कहा कि अप्रैल 2019 में यूनाइटेड किंगडम में बनमीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद भी संगठन के बिटकॉइन विभिन्न वॉलेट में स्थानांतरित होते रहे। जून 2019 में कथित तौर पर Peel Chain Technique और Wasabi Wallet जैसी क्रिप्टो मिक्सिंग सेवा का उपयोग कर ट्रांजैक्शन किए गए, जिससे धन के स्रोत का पता लगाना कठिन हो जाए।
ईडी का दावा- दोनों भाई मिलकर चलाते थे नेटवर्क
ईडी ने अदालत में कहा कि बनमीत सिंह अवैध ड्रग कारोबार का मुख्य संचालक था और परविंदर सिंह को ड्रग्स उपलब्ध कराता था। एजेंसी का दावा है कि दोनों भाई मिलकर डार्क वेब के जरिए मादक पदार्थ बेचते थे और उसी से अर्जित धन को बिटकॉइन, बैंक खातों, संपत्तियों और निवेश के जरिए सफेद धन के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।



