कारगिल के रणबांकुरों को मशालों से सलाम, एबीवीपी की यात्रा में गूंजे देशभक्ति के नारे
गांधी पार्क से घंटाघर तक मशाल यात्रा में जुटे सैकड़ों छात्र-छात्राऐं

Amit Bhatt, Dehradun: कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) देहरादून महानगर ने शनिवार को राष्ट्र के अमर शहीदों की स्मृति में भव्य मशाल यात्रा निकाली। गांधी पार्क से शुरू होकर घंटाघर तक पहुंची यात्रा में सैकड़ों छात्र-छात्राओं और युवा कार्यकर्ताओं ने हाथों में जलती मशालें लेकर कारगिल के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे मार्ग में ‘भारत माता की जय’, ‘कारगिल के वीर शहीद अमर रहें’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया।
यात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में एबीवीपी के प्रदेश मंत्री यशवंत पंवार उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना आसान है, लेकिन बिना किसी स्वार्थ के राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का निस्वार्थ निर्वहन करना भारतीय सेना से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के वीर जवानों ने दुर्गम चोटियों और विषम परिस्थितियों में अदम्य साहस, पराक्रम और वीरता का परिचय देकर देश की अखंडता की रक्षा की। उनका यह बलिदान प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सदैव राष्ट्र प्रथम की भावना को मजबूत करने और कारगिल के अमर शहीदों के त्याग व बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और देश की एकता व संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया।
घंटाघर पहुंचकर मशाल यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान सभी कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर कारगिल के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने का संकल्प लिया।
मशाल यात्रा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुमित कुमार, विभाग संगठन मंत्री प्रमेश जोशी, डीएवी छात्रसंघ अध्यक्ष ऋषभ मल्होत्रा, एसजीआरआर छात्रसंघ अध्यक्ष बलवीर कुँवर, महानगर मंत्री आयुषी पैन्यूली, जिला छात्रा विस्तारिका भावना सहित एबीवीपी के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता तथा सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल रहे। आयोजन का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रबल करना तथा कारगिल के अमर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को स्मरण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करना रहा।



