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कनिष्ठ आईएफएस अधिकारी के तबादले पर घिरे प्रमुख सचिव सुधांशु, हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी की पेशकश

अवमानना मामले में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु का अनुपालन शपथपत्र दाखिल, कहा अवमानना की कल्पना भी नहीं कर सकता

Rajkumar Dhiman, Dehradun: कनिष्ठ आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार के तबादले को लेकर उत्तराखंड के प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण आरके सुधांशु हाई कोर्ट में दायर अवमानना मामले में घिर गए हैं। अब उन्होंने हाई कोर्ट में दाखिल अनुपालन शपथपत्र में बिना शर्त माफी की पेशकश की है। हालांकि, उन्होंने यह माफी इस शर्त के साथ पेश की है कि यदि कोर्ट यह मानता है कि उनकी ओर से अनजाने में किसी तरह की अवमानना हुई है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी कथित चूक को जानबूझकर या स्वेच्छा से कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं माना जाए।

यह मामला अवमानना याचिका पंकज कुमार बनाम रमेश कुमार सुधांशु एवं अन्य से जुड़ा है। याचिका अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 तथा उत्तराखंड हाई कोर्ट रूल्स के के तहत दाखिल की गई है। मामला चमोली जिले से संबंधित है। 29 अगस्त 2026 को दाखिल अनुपालन शपथपत्र में सुधांशु ने खुद को वर्तमान में प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण, उत्तराखंड सरकार के पद पर तैनात बताया है।

तीन अधिकारी बनाए गए प्रतिवादी
अवमानना मामले में सुधांशु के अलावा मुकेश कुमार राय, वर्तमान में संयुक्त सचिव, पर्यावरण एवं वन, उत्तराखंड तथा रंजन कुमार मिश्रा, वर्तमान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (पीसीसीएफ एवं एचओएफ) को भी प्रतिवादी बनाया गया है। सुधांशु ने शपथपत्र में कहा है कि वह मामले में प्रतिवादी नंबर एक हैं और उन्होंने अवमानना याचिका, उसके साथ लगे दस्तावेज और संबंधित कार्यालय रिकॉर्ड का अध्ययन किया है।

4 सितंबर 2025 के अंतरिम आदेश के अनुपालन का था मामला
अवमानना याचिका में मूल विवाद रिट याचिका पंकज कुमार बनाम उत्तराखंड सरकार एवं अन्य में हाई कोर्ट के 4 सितंबर 2025 के अंतरिम आदेश के अनुपालन से जुड़ा था। अनुपालन शपथपत्र में सुधांशु ने प्रारंभिक आपत्ति लेते हुए कहा है कि अब अवमानना याचिका निष्प्रभावी हो चुकी है, क्योंकि जिस मूल रिट में अंतरिम आदेश पारित हुआ था, वह स्वयं हाई कोर्ट द्वारा 13 जुलाई 2026 को निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित की जा चुकी है।

25 अगस्त 2025 का तबादला आदेश, फिर 13 अप्रैल 2026 का नया आदेश
मामले में सबसे अहम कड़ी आईएफएस पंकज कुमार से जुड़े तबादला आदेश हैं। सरकार ने 25 अगस्त 2025 के तबादला आदेश के बाद 13 अप्रैल 2026 को फिर नया तबादला आदेश जारी किया। लेकिन दोनों आदेशों को सरकार ने बाद में वापस ले लिया।

अनुपालन शपथपत्र में राज्य सरकार के दो आदेश का उल्लेख है। इन दोनों आदेशों के जरिए क्रमशः 25 अगस्त 2025 और 13 अप्रैल 2026 के तबादला/तैनाती आदेश वापस लिए जाने की बात कही गई है। यानी पंकज कुमार से संबंधित विवादित तबादले को लेकर सरकार ने पहले नया आदेश जारी किया और बाद में पुराने तथा नए दोनों तबादला आदेश वापस ले लिए।

13 जुलाई को हाई कोर्ट ने मूल रिट कर दी निस्तारित
हाई कोर्ट की 13 जुलाई 2026 की कार्यवाही भी अनुपालन शपथपत्र के साथ संलग्न की गई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ के समक्ष राज्य की ओर से बताया गया कि 25 अगस्त 2025 का तबादला आदेश 7 जुलाई 2026 को वापस लिया गया और उसके बाद 13 अप्रैल 2026 को जारी नया तबादला आदेश भी 7 जुलाई को वापस ले लिया गया।

इन दोनों आदेशों को कोर्ट के समक्ष रखा गया। इसके बाद पीठ ने माना कि परिस्थितियों में पंकज कुमार की रिट याचिका निष्प्रभावी (infructuous) हो गई है और उसे उसी आधार पर निस्तारित कर दिया। सभी लंबित आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

सुधांशु बोले- कोर्ट के आदेश को तोड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकता
अवमानना मामले में सुधांशु ने अपने बचाव में कहा है कि वह जिम्मेदार सरकारी सेवक हैं और हाई कोर्ट तथा उसके आदेशों के प्रति उनके मन में सर्वोच्च सम्मान है। उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने की कल्पना भी नहीं कर सकते।

शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि उन्होंने हाई कोर्ट के आदेशों का उनके अक्षर और भावना दोनों के अनुरूप पालन करने के लिए हमेशा ईमानदार प्रयास किए हैं और भविष्य में भी ऐसा करते रहेंगे।

‘अगर अवमानना हुई तो बिना शर्त माफी’
सबसे महत्वपूर्ण रूप से सुधांशु ने कोर्ट से कहा है कि यदि हाई कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि उनसे अनजाने में किसी भी प्रकार की अवमानना हुई है, तो वह बिना शर्त माफी मांगते हैं।

साथ ही उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि उनकी कथित चूक को जानबूझकर या स्वेच्छा से की गई अवज्ञा न माना जाए। उन्होंने वर्तमान अवमानना कार्यवाही को बंद करने और अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को डिस्चार्ज करने का अनुरोध भी किया है।

सरकार का तर्क- अब कोई आदेश उल्लंघन में नहीं
अनुपालन शपथपत्र का मूल तर्क यह है कि जिस अंतरिम आदेश के अनुपालन को लेकर अवमानना का मामला खड़ा हुआ, उससे संबंधित मूल रिट ही 13 जुलाई 2026 को निस्तारित हो चुकी है। इसके अलावा पंकज कुमार के संबंध में 25 अगस्त 2025 और 13 अप्रैल 2026 के दोनों तबादला आदेश 7 जुलाई 2026 को वापस लिए जा चुके हैं। इसलिए शपथपत्र में कहा गया है कि वर्तमान में सुधांशु की ओर से हाई कोर्ट के किसी आदेश को फ्लोट या अवहेलना करने का कोई प्रश्न नहीं है।

कानूनी रूप से अहम है माफी की भाषा
हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी बारीकी है। सुधांशु ने सीधे तौर पर अवमानना किए जाने की स्वीकारोक्ति नहीं की है। उनकी भाषा है कि यदि कोर्ट यह निष्कर्ष निकालता है कि अनजाने में अवमानना हुई, तो वह बिना शर्त माफी मांगते हैं। साथ ही उन्होंने इसे जानबूझकर की गई अवज्ञा न मानने का अनुरोध किया है।

इस तरह कनिष्ठ आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार के तबादले से शुरू हुआ विवाद पहले हाई कोर्ट पहुंचा, फिर अवमानना कार्यवाही तक गया और अब सरकार के दोनों तबादला आदेश वापस लेने तथा मूल रिट के निस्तारण के बाद प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी ने अदालत के समक्ष ‘बिना शर्त माफी’ की पेशकश की है।

दस्तावेज के अनुसार अगला निर्णायक पहलू यह रहेगा कि हाई कोर्ट इस अनुपालन शपथपत्र और माफी की पेशकश को किस रूप में स्वीकार करता है तथा अवमानना कार्यवाही पर क्या आदेश देता है।

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