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फर्जीवाड़े से एमबीबीएस सीट पाने वाले एलिस तोमर पर दून में मुकदमा, फिर भी दाखिला बरकरार

एसडीएम सदर देहरादून से फर्जी स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने पर लेखपाल स्वाति ने दर्ज कराया मुकदमा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: नीट-यूजी 2025 की राज्य काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे एमबीबीएस दाखिले के मामले में बुधवार को दो बड़े अपडेट सामने आए हैं। एक ओर एमबीबीएस सीट हासिल करने वाले एलिस तोमर के खिलाफ वसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, दूसरी ओर 03 और एमबीबीएस सीटों का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इसके साथ फर्जी या अनियमित प्रमाणपत्रों के आधार पर निरस्त एमबीबीएस सीटों की संख्या 19 पहुंच गई है। नई कार्रवाई में राजकीय मेडिकल कालेज हरिद्वार की दो और राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर की एक सीट शामिल है।

हालांकि, अभी एलिस तोमर का दाखिला निरस्त नहीं किया जा सका है। इस मुकदमे के साथ देहरादून में कुल 11 आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और 05 को गिरफ्तार किया गया है। कुमाऊं मंडल की बात करें तो वहां फर्जी प्रमाण पत्रों पर 30 पर मुकदमा है, जबकि 07 की गिरफ्तारी अब तक की जा चुकी है।

उधर, दाखिले निरस्त करने की नवीनतम कार्रवाई ऊधमसिंहनगर के जिलाधिकारी की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने की है। निरस्त सीटों में जुमराह अशरफ की हरिद्वार मेडिकल कालेज की सीट, आदित्य प्रजापति की श्रीनगर मेडिकल कालेज की सीट और वरुण ढेढा की हरिद्वार मेडिकल कालेज की सीट शामिल है। जुमराह अशरफ और आदित्य प्रजापति से संबंधित सीटें ओबीसी महिला, जबकि वरुण ढेढा की सीट यूआर-अनाथ श्रेणी में आवंटित हुई थी।

विश्वविद्यालय के अनुसार प्रथम और द्वितीय चरण की काउंसलिंग में सीट आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट, पसंद, स्थायी निवास और आरक्षण संबंधी दावों के आधार पर हुआ था। प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद दस्तावेज जिलों को सत्यापन के लिए भेजे गए। जिलाधिकारियों की रिपोर्ट मिलने पर संबंधित दाखिले निरस्त किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय इन मामलों की सूची काउंसलिंग पोर्टल पर जारी करेगा और तीनों नई रिक्त सीटें तीसरे चरण की काउंसलिंग में शामिल की जाएंगी।

देहरादून से शुरू हुई जांच के बाद बढ़ता जा रहा कार्रवाई का दायरा
मामले की शुरुआती परतें देहरादून में खुली थीं। 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमे दर्ज हुए। रायपुर में अपराध संख्या 380/26 और क्लेमेंटाउन में अपराध संख्या 86/26 दर्ज किया गया। प्रारंभिक शिकायत प्रदीप बहुगुणा ने की थी। एलिस तोमर का मामला भी उन्होंने ही उठाया था।

एसएसपी देहरादून के निर्देश पर एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआइटी ने जांच शुरू की। जांच में कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में गलत पते और प्रमाणपत्रों में अनियमितता सामने आई। एसआइटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड जुटाए और दस्तावेजों की जांच शुरू की।

इस मामले में एसआइटी अब तक रूपेश पंडित, अरविंद कुमार, धीरज कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। संजय कुमार और गिरीश सिंह पर स्वाति, परी और खुशी के फर्जी आधार, मूल निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने में सहयोग का आरोप है। इनके माध्यम से मेडिकल दाखिले में अनुचित लाभ दिलाने और धनराशि के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

ऊधमसिंहनगर में भी कार्रवाई का दायरा बढ़ा
फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में ऊधमसिंहनगर में अब तक 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाने और कम से कम सात आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इनमें बाजपुर में पांच और गदरपुर में दो गिरफ्तारियां शामिल हैं।

बाजपुर के एक मामले में मोहम्मद आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना पत्नी आशीष भारद्वाज, रोहित, हरपाल, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और चित्रा नामजद हैं। इनमें मोहम्मद आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना और रोहित गिरफ्तार हो चुके हैं।

जांच में चित्रा, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और रिया सिंह से जुड़े प्रमाणपत्रों में अनियमितता सामने आई और इन्हें निरस्त किया गया। पूछताछ में मोहम्मद आलम ने दीक्षा और चित्रा के प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 5,000 रुपये मिलने की बात कही। श्याम बिहारी ने अपने बेटे अनुराग के जाति और मूल निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बरेली निवासी हरपाल को 50,000 रुपये देने की बात बताई। मामले में छह मोबाइल फोन भी जब्त किए गए।

बाजपुर के ही अलग मामले में अल-सामी फाजिल, उसके पिता तौफीक अहमद और महेशपुरा निवासी रवि के खिलाफ कार्रवाई हुई। अल-सामी के जाति प्रमाणपत्र में कथित तौर पर फर्जी गृहकर प्रमाणपत्र और रसीद का इस्तेमाल किया गया था। नगर पालिका के रिकॉर्ड में इनका कोई विवरण नहीं मिला।

गदरपुर में राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार की शिकायत पर 25 सितंबर को मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें शुभम हुड़िया, निखिल वर्मा, प्रमोद सैनी, शेखर अरोड़ा, लवी, प्रियंशु गुप्ता, वैष्णवी सिंह, अवंतिका दावस, वानवी कुमार और प्रभात चौधरी नामजद हैं। शुभम हुड़िया और निखिल वर्मा गिरफ्तार हुए। पुलिस ने दो मोबाइल, एक लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और एक एसएसडी कब्जे में लिए हैं। रुद्रपुर में दीपांशु, दक्ष चतुर्वेदी और शुभम हुड़िया के खिलाफ भी जाति और मूल निवास प्रमाणपत्रों में अनियमितता को लेकर मुकदमा दर्ज है।

चार राजस्व कर्मचारी निलंबित
प्रमाणपत्रों के सत्यापन में लापरवाही के आरोप में चार राजस्व कर्मचारी भी निलंबित किए जा चुके हैं। देहरादून में जगदीश राठौर और डिंपल, जबकि ऊधमसिंहनगर में बाजपुर के राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद अजमल खान और गदरपुर के राजस्व उपनिरीक्षक सरताज अली के खिलाफ कार्रवाई हुई।

विश्वविद्यालय ने प्रथम और द्वितीय चरण के 778 दाखिलों से जुड़े प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए संबंधित जिलों को भेजे हैं। इनमें स्थायी निवास, जाति, ईडब्ल्यूएस, अनाथ और अन्य आरक्षण श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्र शामिल हैं। जिलों से रिपोर्ट मिलने का सिलसिला जारी है और फर्जी प्रमाणपत्र सामने आने पर संबंधित दाखिले निरस्त किए जा रहे हैं। इससे पहले 16 सीटें निरस्त होने की जानकारी सामने आई थी। जो अब बढ़कर 19 हो चुके हैं।

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