
Round The Watch News: अपनी बुलंद आवाज, बेबाक अंदाज और पर्दे पर किरदारों में जान डालने वाले दिग्गज अभिनेता विश्वनाथ गजानन पाटेकर, जिन्हें दुनिया नाना पाटेकर के नाम से जानती है, अब हमारे बीच नहीं हैं। गुरुवार, 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर तबीयत बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन के एक दिन बाद पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मृत्यु (यूडी) का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब मौत की परिस्थितियों और कारण की जांच कर रही है। हालांकि, अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि पुलिस को किसी अपराध का संदेह मिल चुका है। यह मृत्यु की परिस्थितियों की कानूनी जांच की प्रक्रिया है।
रात ढाई बजे दोस्त को भेजा संदेश, सुबह अस्पताल में तोड़ा दम
गोवा के डोना पाउला स्थित ओशन पार्क में रहने वाले नाना पाटेकर ने गुरुवार तड़के करीब 2:30 बजे अपने एक मित्र को संदेश भेजकर असहज महसूस होने और शरीर के बाईं ओर दर्द की जानकारी दी थी। रात होने के कारण मित्र समय पर संदेश नहीं देख सके। बाद में करीब चार बजे जब वह उनके आवास पहुंचे तो अभिनेता की हालत गंभीर थी। वह पसीने से तर थे और सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
इसके बाद तत्काल चिकित्सा सहायता मांगी गई। मणिपाल अस्पताल की टीम एंबुलेंस के साथ उनके आवास पहुंची और उन्हें सीपीआर देते हुए अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की करीब 45 मिनट तक कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अस्पताल के डॉक्टर शेखर साल्कर के अनुसार, अभिनेता को सुबह करीब 4:20 बजे अस्पताल लाया गया था और सुबह 5:20 बजे मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट को मौत का तत्काल कारण बताया था, जबकि उसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं थी।
बीएनएसएस की धारा 194 के तहत जांच
पणजी पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, अभिनेता को डोना पाउला स्थित उनके आवास से बांबोलिम के मणिपाल अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में मृत अवस्था में लाया गया था। इसके बाद पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया। मामले की जांच पीएसआइ नितिन नाइक की देखरेख में की जा रही है।
जांच के तहत पुलिस ने मृत्यु की परिस्थितियों का पता लगाने, संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने और चिकित्सकीय तथ्यों का परीक्षण करने की प्रक्रिया अपनाई। पुलिस की जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि मौत किन परिस्थितियों में हुई। केवल यूडी केस दर्ज होने से किसी साजिश या आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं होती।
पांच दशक के अभिनय सफर का अंत
नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में करीब पांच दशक तक अपनी अलग पहचान बनाए रखी। उनकी अभिनय शैली में आक्रामकता, संवेदनशीलता और संवादों की असाधारण ताकत का अनूठा मेल था। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’, ‘खामोशी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली।
उन्होंने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किए और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित हुए। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य किरदारों तक, उन्होंने हर तरह के अभिनय में अपनी क्षमता साबित की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा में उनका योगदान असाधारण था और उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
नाना पाटेकर का जाना केवल एक अभिनेता का दुनिया से विदा होना नहीं है। यह उस कलाकार का अंत है, जिसकी आवाज और अभिनय ने कई पीढ़ियों के दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। पर्दे पर वह अक्सर व्यवस्था से सवाल करते दिखे, लेकिन अपने सहज और बेबाक व्यक्तित्व के कारण पर्दे के बाहर भी उनकी एक अलग पहचान रही।
नाना पाटेकर का उत्तराखंड से जुड़ाव, जोशीमठ में घर बनाने की जताई थी इच्छा
उत्तराखंड की वादियों ने कई लोगों को अपना मुरीद बनाया है, लेकिन कुछ लोगों के लिए पहाड़ों का आकर्षण पर्यटन तक सीमित नहीं रहता। वे इन वादियों को अपना घर बनाने का सपना देखने लगते हैं। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर भी ऐसे ही लोगों में शामिल थे। उत्तराखंड से उनका जुड़ाव केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं था। उन्होंने यहां की प्राकृतिक सुंदरता और लोगों के व्यवहार की खुले दिल से तारीफ की थी। जोशीमठ क्षेत्र में शूटिंग के दौरान उन्होंने जमीन खरीदकर यहीं बसने की इच्छा भी जताई थी। अब उनके निधन के बाद उत्तराखंड से जुड़ी उनकी यह याद एक अधूरे सपने की तरह सामने आई है।
नीती घाटी में नौ दिन तक की शूटिंग
नाना पाटेकर मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र पहुंचे थे। उनकी फिल्म की शूटिंग चीन सीमा से सटी नीती घाटी में हुई थी। इस दौरान वह नीती गांव, तपोवन और लाता क्षेत्र में भी पहुंचे। बताया गया कि उन्होंने यहां करीब नौ दिन बिताए। इस दौरान स्थानीय लोगों से उनका संवाद हुआ और उन्होंने हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखा।
उनके प्रवास के दौरान जोशीमठ की तत्कालीन उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने भी उनसे मुलाकात की थी और उन्हें स्थानीय सेब तथा अखरोट भेंट किए थे। इसके बाद अभिनेता हेलीकॉप्टर से रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी पहुंचे थे। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने यहां की वादियों को बेहद खूबसूरत बताया और भविष्य में जमीन खरीदकर रहने की इच्छा जाहिर की थी।
मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात में भी जताई थी इच्छा
उत्तराखंड के साथ नाना पाटेकर का जुड़ाव आगे भी बना रहा। अक्टूबर 2022 में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके कैंप कार्यालय में मुलाकात की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें पहाड़ी टोपी भेंट की थी। मुलाकात में उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, फिल्म शूटिंग और प्रदेश में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई थी।
तब नाना पाटेकर ने कहा था कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से बेहद अच्छी है। उन्होंने यहां के लोगों के व्यवहार और आत्मीयता की भी तारीफ की थी। इसी दौरान उन्होंने प्रदेश में अपना घर बनाने की इच्छा जाहिर की थी।
उत्तराखंड के लिए क्या मायने रखता था उनका जुड़ाव?
उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग की संभावनाओं के लिहाज से नाना पाटेकर जैसे कलाकारों का आकर्षित होना महत्वपूर्ण था। हिमालयी भू-दृश्य, स्थानीय संस्कृति और पहाड़ी जीवनशैली फिल्म निर्माताओं को लंबे समय से आकर्षित करते रहे हैं। किसी कलाकार का यहां बसने की इच्छा जाहिर करना भी प्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करता है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में नाना पाटेकर के उत्तराखंड में जमीन खरीदने या घर बनाने की परियोजना पूरी होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए उनकी इच्छा को पूरी हुई योजना के बजाय एक ऐसे सपने के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जिसे उन्होंने सार्वजनिक रूप से जाहिर किया था।
आज जब वह दुनिया में नहीं हैं, तो जोशीमठ और नीती घाटी से जुड़ी उनकी यादें उत्तराखंड के लिए एक भावनात्मक प्रसंग बन गई हैं। जिस पहाड़ में उन्होंने अपना घर बसाने की संभावना देखी थी, वहां उनका सपना पूरा नहीं हो सका। लेकिन देवभूमि की वादियों के प्रति उनका आकर्षण उनकी उत्तराखंड यात्रा की एक यादगार निशानी बनकर रहेगा।



