सहकारी बैंकों के बड़े लेनदेन पर आयकर विभाग का शिकंजा, पिथौरागढ़ बैंक में 300 करोड़ ट्रांजेक्शन पर सवाल
पिथौरागढ़ और चंपावत की 31 शाखाओं में जांच, 2023 से 2026 तक के ट्रांजेक्शन खंगाले

Rajumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में जिला सहकारी बैंकों के बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देने में कथित अनियमितताओं का मामला लगातार सामने आ रहा है। अब पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक में करीब 300 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दिए जाने का मामला सामने आया है। आयकर विभाग के इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन प्रकोष्ठ, देहरादून की टीम ने बैंक में वर्ष 2023 से 2026 तक के बड़े ट्रांजेक्शन की जांच की। यह कार्रवाई आयकर अधिकारी वीरेंद्र कुमार और आयकर निरीक्षक मोहित राणा ने की, जो गुरुवार देर शाम तक चली।
पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक की पिथौरागढ़ और चंपावत में कुल 31 शाखाएं हैं। इनमें करीब ढाई से तीन लाख खाते संचालित हैं। जांच में करीब 300 करोड़ रुपये के लेनदेन की रिपोर्टिंग में गड़बड़ी सामने आने की जानकारी है। बैंक प्रबंधन ने आयकर विभाग को भरोसा दिलाया है कि 15 दिन के भीतर सभी खामियां दूर कर दी जाएंगी। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि जांच में कितने लेनदेन और खाताधारक प्रभावित पाए गए हैं तथा विभाग ने बैंक को क्या औपचारिक निर्देश दिए हैं।
तीन साल के लेनदेन की जांच में सामने आया मामला
आयकर विभाग की टीम ने वर्ष 2023 से 2026 के बीच हुए बड़े वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड खंगाले। जांच का मुख्य विषय निर्धारित श्रेणी के लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देने से जुड़ा है। ऐसे लेनदेन की सूचना निर्धारित नियमों के अनुसार वित्तीय संस्थानों को देनी होती है। इससे विभाग बड़े वित्तीय लेनदेन की निगरानी कर सकता है और कर संबंधी अनियमितताओं की पहचान कर सकता है।
पिथौरागढ़ बैंक में करीब 300 करोड़ रुपये के लेनदेन की रिपोर्टिंग में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन को खामियां दूर करने का भरोसा देना पड़ा है। हालांकि, रिपोर्टिंग में कमी का अर्थ अपने आप में यह नहीं है कि पूरी रकम अवैध है या संबंधित खाताधारकों ने कर चोरी की है। इसके लिए लेनदेन और खातों की अलग-अलग जांच जरूरी होगी।
अन्य जिला सहकारी बैंक भी आ चुके दायरे में
पिथौरागढ़ से पहले आयकर विभाग उत्तरकाशी, कोटद्वार (पौड़ी), काशीपुर और हरिद्वार (रुड़की मुख्यालय) स्थित जिला सहकारी बैंकों में भी बड़े लेनदेन की रिपोर्टिंग से जुड़ी जांच कर चुका है। मार्च 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में इन बैंकों में जांच और कार्रवाई का उल्लेख किया गया था।
इन मामलों में सामने आए आंकड़े इस प्रकार हैं
-जिला सहकारी बैंक उत्तरकाशी में बड़े वित्तीय लेनदेन की रिपोर्टिंग की जांच
-पौड़ी, कोटद्वार में बड़े लेनदेन की जानकारी देने में कथित अनियमितताओं की जांच
-ऊधम सिंह नगर, काशीपुर में बड़े लेनदेन और पैन संबंधी जानकारी की जांच
-हरिद्वार, रुड़की में मार्च 2026 में जांच में शुरुआती रिपोर्ट में करीब 40 करोड़ रुपये के लेनदेन में गड़बड़ी की आशंका
-पिथौरागढ़ वर्ष 2023 से 2026 तक के लेनदेन की जांच में करीब 300 करोड़ रुपये की रिपोर्टिंग संबंधी गड़बड़ी सामने आने की जानकारी
महज तीन बैंकों में 1200 करोड़ के लेनदेन पर पहले उठे थे सवाल
मार्च 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर के तीन जिला सहकारी बैंकों में करीब 1200 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़ी रिपोर्टिंग संबंधी अनियमितताओं का मामला सामने आया था। रिपोर्ट में करीब 800 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी नहीं देने और 400 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन में पैन संबंधी जानकारी दर्ज नहीं होने का उल्लेख किया गया था। इसके बाद हरिद्वार जिला सहकारी बैंक के रुड़की स्थित मुख्यालय में भी आयकर विभाग ने जांच की। मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में वहां करीब 40 करोड़ रुपये के लेनदेन में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी।
सहकारिता विभाग ने भी रखा था अपना पक्ष
मार्च 2026 में सहकारिता विभाग की ओर से यह पक्ष सामने आया था कि कुछ जिला सहकारी बैंकों में मामला वित्तीय घोटाले के बजाय आयकर विभाग के पोर्टल पर एसएफटी (निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन) रिटर्न से संबंधित डेटा अपलोड और तकनीकी त्रुटियों से जुड़ा था। विभाग के अनुसार, इन त्रुटियों को दूर करने की प्रक्रिया की जा रही थी। इसलिए पिथौरागढ़ बैंक के मामले में भी यह स्पष्ट होना जरूरी है कि करीब 300 करोड़ रुपये के लेनदेन में रिपोर्टिंग संबंधी कमी किस प्रकृति की थी, कितने लेनदेन की सूचना नहीं दी गई और क्या कोई कर संबंधी अनियमितता प्रमाणित हुई है।



